मुजफ्फरपुर | थियोसोफिकल लॉज के ऐतिहासिक सभागार में बज्जिका विकास मंच ने भगवान महावीर के जन्म दिवस को बज्जिका दिवस के रूप में मनाया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता चितरंजन सिन्हा कनक ने की। संचालन करते हुए मंच के उपाध्यक्ष उदय नारायण सिंह ने कहा कि महावीर
भास्कर न्यूज | सरैया विश्व में शांति के लिए भगवान महावीर (वर्धमान) के सिद्धांत पंचमहावर्त अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह, अस्तेय एवं ब्रह्मचर्य प्रासंगिक हैं। इनमें से एक भी सिद्धांत हम आत्मसात कर लेंगे तो मेरा जीवन धन्य होकर परम मोक्ष को प्राप्त कर लेगा। भगवान महावीर ने जियो और जीने दो का मार्ग बताया था, जो आज भी प्रासंगिक है। ये बातें मंगलवार को भगवान महावीर स्वामी की 2625वीं जयंती पर सरैया स्थित प्राकृत जैन शास्त्र और अहिंसा शोध संस्थान के सभागार में विशिष्ट अतिथि वि मल तिवारी, अपर निदेशक, संग्रहालय निदेशालय, कला एवं सांस्कृतिक विभाग ने कही। वे स्व. जगदीश चंद्र माथुर स्मृति व्याख्यान माला में आज के वर्तमान में वर्धमान विषयक गोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। रीना जैन, सहायक आचार्य, दर्शन विभाग, सरस्वती आदर्श संस्कृत कॉलेज बेगूसराय ने कहा कि भगवान महावीर और सभी 24 तीर्थंकरों ने जीव एवं पृथ्वी के लिए जो सिद्धांत दिए वह पूरी दुनिया के लिए अनंत वीर पुरुष, अनंत ज्ञान और मोक्ष की प्राप्ति के िलए प्रासंगिक हैं। रंगनाथ सिंह ने कहा कि पूरा विश्व युद्ध के महाविनाश के मुहाने पर खड़ा है। शांति के लिए वर्धमान स्वामी के विचार पर अमल करने की जरूरत है। इसके अलावे विनय कुमार सिंह, संग्रहालय निदेशालय कला व संस्कृति विभाग, नागेन्द्र कुमार प्रभारी निदेशक सह डीईओ वैशाली, प्रो. योगेन्द्र सिंह योगी, पद्मश्री राजकुमारी देवी, दिलीप कुमार यादव, उप मुख्य पार्षद नप सरैया आदि ने संबोधित किया। अध्यक्षता संस्थान के पूर्व प्रभारी निदेशक डॉ. शिव कुमार मिश्र, संचालन संस्थान के पूर्व शोधार्थी डॉ. विनय पासवान ने किया। मौके पर संस्थान के प्रकाशन सहायक संजय कुमार, स्थानीय सुरेंद्र प्रसाद सिंह सहित बड़ी संख्या में प्रबुद्ध नागरिकों ने भाग लिया है।
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