Embraer KC-390 Millennium India: कंपनी भारत में KC-390 ऑपरेटरों के लिए एक MRO (मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल) हब स्थापित करने पर भी विचार कर रही है. इससे भारत में तकनीकी विशेषज्ञता और रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं. स्वीडन, नीदरलैंड और पुर्तगाल जैसे कई NATO देशों ने केसी-390 को अपनाया है. यह विमान लंबे समय से परिवहन विमान क्षेत्र में प्रमुख रहे C-130जे के लिए उभर रहा है.
Embraer KC-390 Millennium India: ब्राजील की कंपनी Embraer ने भारतीय वायुसेना के सैन्य परिवहन विमान प्रोग्राम में अपनी दावेदारी मजबूत की है. कंपनी ने अपने परिवहन विमान KC-390 Millennium को भारत में बड़े निवेश की पेशकश की है. एंब्रेयर के CEO फ्रांसिस्को गोम्स नेटो ने PTI से बातचीत में कहा कि KC-390 एक मल्टी-मिशन ट्रांसपोर्ट और एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग विमान है. यह विमान तेज गति, अधिक पेलोड क्षमता और लंबी दूरी तय करने में सक्षम है.
KC-390 करीब 26 टन तक भार ले जा सकता है. जबकि C-130J Super Hercules की क्षमता लगभग 20 टन है. नेटो ने दावा किया कि बेहतर प्रदर्शन और कम परिचालन लागत के कारण कम विमानों में अधिक काम संभव है. नेटो ने कहा कि यदि भारत यह सौदा एंब्रेयर को देता है. तो कंपनी भारत को अपने विमान निर्माण का मुख्य केंद्र बनाएगी. इसका उद्देश्य एशिया-प्रशांत क्षेत्र की जरूरतों को यहीं से पूरा करना होगा.
KC-390 कहां हो रहा इस्तेमाल?
कंपनी भारत में KC-390 ऑपरेटरों के लिए एक MRO (मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल) हब स्थापित करने पर भी विचार कर रही है. इससे भारत में तकनीकी विशेषज्ञता और रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं. स्वीडन, नीदरलैंड और पुर्तगाल जैसे कई NATO देशों ने केसी-390 को अपनाया है. यह विमान लंबे समय से परिवहन विमान क्षेत्र में प्रमुख रहे C-130जे के लिए उभर रहा है.
भारत में बनाने का प्रस्ताव
फ्रांसिस्को गोम्स नेटो ने आगे कहा कि KC-390 प्रोजेक्ट भारत और ब्राजील के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग के अनुरूप है. उन्होंने साझेदारी, तकनीकी सहयोग और मिलकर बनाने पर जोर दिया. एंब्रेयर केवल डिफेंस सेक्टर तक सीमित नहीं है. कंपनी नागरिक विमानन क्षेत्र में भी सक्रिय है. हाल ही में एंब्रेयर और Adani Defence & Aerospace ने भारत के RTA प्रोग्राम के तहत Embraer E175 की असेंबली लाइन भारत में स्थापित करने के लिए समझौता किया है.
दोनों कंपनियां मिलकर विमान निर्माण, सप्लाई चेन, मरम्मत सेवाएं, पायलट ट्रेनिंग और ऑर्डर बुकिंग जैसे क्षेत्रों में सहयोग करेंगी. भारत में एक मजबूत और RTA इकोसिस्टम विकसित किया जा सके.
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सचेंद्र सिंह का ताल्लुक उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ से है. इन्होंने अपनी पढ़ाई-लिखाई ‘संगम नगरी’ प्रयागराज में स्थित इलाहाबाद विश्वविद्यालय से की है. पढ़ने और लिखने में इनकी ऐसी रूचि रही कि इन्होंने पत्रकारिता जगत से जुड़कर अपना करियर बनाने की ठान ली. फिलहाल सचेंद्र ज़ी मीडिया समूह से जुड़कर ‘ज़ी भारत : ZEE Bharat’ के डिजिटल प्लेटफॉर्म में अपना योगदान दे रहे हैं. …और पढ़ें
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