भारत को कैसे मिला 'सपनों का शहर' मुंबई? जानिए टापुओं से देश के 'मैनहटन' बनने की पूरी कहानी – India.Com

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Published date india.com Last updated on – April 3, 2026 7:52 PM IST
email india.com By Arun Kumar email india.com twitter india.com
सपनों का शहर मुंबई पहली बार सपनों में ही बसाया गया था. यह शहर जैसे आज दिखता है 19वीं सदी की शुरुआत तक यह ऐसा नहीं था. तब अरब सागर में 7 टापुओं का एक समहू था, जो चारों ओर समुद्र से घिरे पड़े थे. अंग्रेजों को ये सभी टापू दहेज में मिले थे और फिर उन्होंने सभी टापुओं को एक-दूसरे से जोड़ने के लिए आसपास के पानी से भरे क्षेत्र को रेत और मिट्टी से भरना शुरू कर दिया और 1838 में जाकर का आज का मुंबई बना दिया. (तस्वीर: unsplash.com)
यूरोपीय लोग जब भारत आने लगे तो मुंबई के इन 7 टापुओं पर पुर्तगालियों ने कब्जा किया था. 1661 ई. में इंग्लैंड के राजा चार्ल्स द्वितीय की पुर्तगाल की राजकुमारी से शादी हो गई और तब पुर्तगाल ने इन टापुओं को इंग्लैंड के राजा को दहेज में दे दिया. राजा चार्ल्स ने कुछ साल यह इलाका अपने पास रखने के बाद 1668 ई. में ईस्ट इंडिया कंपनी को किराये पर दे दिया. (तस्वीर: unsplash.com)
ईस्ट इंडिया कंपनी इस क्षेत्र का अपने बिजनेस के लिहाज से महत्व समझ रही थी. कंपनी ने यह प्लान पहले ही बना लिया था कि अगर यह इलाका उसे मिल जाता है तो वह टापुओं के बीच की जमीन को रेत और मिट्टी से भरकर आपस में जोड़कर एक बड़ा शहर बना लेगी, जिससे वह कपास, अफीम, मसालों और अन्य चीजों का व्यापार तेजी से कर पाएगी. (तस्वीर: AI)
कंपनी ने इन टापुओं को आपस में मिलाने के बाद रेलवे, मिल्स और डॉकयार्ड बनाए और तब से ही यह देश की वाणिज्यक राजधानी (कमर्शियल कैपिटल) बन गई. मुंबई का पुराना नाम बॉम्बे या बंबई था और जिन 7 टापुओं को आपस में मिलाया गया वे थे- माहिम, वर्ली, परेल, मजगांव, बॉम्‍बे, लिटिल कोलाबा और कोलाबा. (तस्वीर: AI)
अंग्रेजों ने 1782 में इन 7 टापुओं के समूह को आपस में जमीन से जमीन जोड़ने का काम शुरू किया था. उस दौर में यह दुनिया के सबसे अनूठे और बड़े कामों में से एक था. इस प्रोजेक्ट का नाम हॉर्नबाय विलार्ड रखा गया था. यह प्रोजेक्ट 1782 में विलियम हार्बी जब गवर्नर थे, तब शुरू हुआ था, जो 1838ई, तक जाकर पूरा हुआ. यानी तब के बॉम्बे शहर को एक होने में 56 साल का समय लग गया. (तस्वीर: unsplash.com)
इस पूरे प्रॉजेक्ट में कुल 1 लाख पाउंड यानी तब भारतीय रुपये की कीमत पाउंड के मुकाबले 10 से 12 रुपये थी, तो यह प्रोजेक्ट 10 से 12 लाख रुपये की कीमत में पूरा हुआ था. अंग्रेजों का बनाया यह नया शहर जब अस्तित्व में आ गया, तब इसकी तुलना अमेरिकी शहर मैनहट्टन से होने लगी. तेजी से यह शहर घनी आबादी वाला बनता चला गया, जो देश का सबसे बड़ा आर्थिक केंद्र था. (तस्वीर: AI)
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