'महिलाओं के बजट में भारी कटौती, सुरक्षा सिर्फ कागजों पर', मोदी सरकार पर बरसे राहुल गांधी – AajTak

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महिला सुरक्षा को लेकर देश में बहस तो बहुत होती है, लेकिन क्या जमीन पर हालात वाकई बदले हैं? कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इसी मुद्दे पर मोदी सरकार को आड़े हाथों लिया है. राहुल का कहना है कि सरकार के लिए महिला सुरक्षा सिर्फ एक ‘सरकारी स्कीम’ बनकर रह गई है, जबकि असल में यह उसकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी होनी चाहिए. उन्होंने सीधे-सीधे आरोप लगाया कि सरकार किसी की बात सुनने को तैयार नहीं है और महिलाओं की मदद के लिए बनाए गए ‘वन स्टॉप सेंटर’ (OSC) आज खुद लाचार नजर आ रहे हैं. उनके मुताबिक, जो महिलाएं मुसीबत के वक्त मदद की उम्मीद में इन सेंटर्स तक पहुंचती हैं, तो उसे मदद मिलने के बजाय वहां दिक्कतें क्यों झेलनी पड़ती हैं?
न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक. राहुल गांधी ने ये सारी बातें अपने व्हाट्सएप चैनल पर एक पोस्ट के जरिए साझा की हैं. दरअसल, उन्होंने 27 मार्च को लोकसभा में इन सेंटर्स की हालत पर कुछ तीखे सवाल पूछे थे. उन्होंने पूछा था कि क्या देश में कई ‘वन स्टॉप सेंटर’ बंद पड़े हैं? क्या वहां स्टाफ की कमी है? और क्या वहां 24 घंटे काम हो रहा है, जैसा कि नियम कहते हैं? उनके इन सवालों के जवाब में सरकार ने कहा कि सब कुछ संतोषजनक है. बस इसी बात पर राहुल भड़क गए और उन्होंने पूछा कि अगर सब कुछ इतना ही अच्छा चल रहा है, तो फिर जमीन पर इतनी समस्याएं क्यों दिख रही हैं?
राहुल का सबसे बड़ा वार बजट को लेकर था. उन्होंने एक बहुत ही चौंकाने वाला आंकड़ा पेश किया. उनके मुताबिक, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को मिलने वाले हर 100 रुपये में से सिर्फ 60 पैसे ही इन ‘वन स्टॉप सेंटर्स’ पर खर्च किए जा रहे हैं. उनका सीधा सवाल है कि अगर महिलाओं की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है, तो फिर 5 में से 3 महिलाओं तक मदद क्यों नहीं पहुंच पा रही है? उनके हिसाब से सुरक्षा के नाम पर सिर्फ बातें हो रही हैं, लेकिन काम के नाम पर दरवाजे बंद हैं.
क्या है ‘वन स्टॉप सेंटर’ और सरकार का इस पर क्या कहना है?
अब सवाल उठता है कि ये ‘वन स्टॉप सेंटर’ आखिर बला क्या है? आसान भाषा में कहें तो ये एक ऐसी जगह है जहां हिंसा का शिकार हुई किसी भी महिला को एक ही छत के नीचे सारी मदद मिलनी चाहिए. चाहे उसे डॉक्टर की जरूरत हो, वकील की सलाह चाहिए हो, पुलिस की मदद लेनी हो या फिर सिर छुपाने के लिए कुछ दिनों का सहारा, ये सेंटर इसीलिए बनाए गए थे. सरकार के मुताबिक, 2015 से लेकर अब तक लगभग 13.37 लाख महिलाओं को इन सेंटर्स के जरिए मदद दी जा चुकी है.
संसद में राहुल के सवालों का लिखित जवाब देते हुए राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने बताया कि ये सेंटर मिशन शक्ति का हिस्सा हैं. सरकार का कहना है कि इन सेंटर्स को चलाने की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की होती है. इतना ही नहीं, सरकार ने यह भी दावा किया कि नीति आयोग ने 2020 और 2025 में इन योजनाओं की जांच की थी और उस जांच में इन सेंटर्स का काम संतोषजनक पाया गया. सरकार का कहना है कि वे लगातार नए सेंटर खोल रहे हैं और महिलाओं को कानूनी और मेडिकल मदद दे रहे हैं.
लेकिन राहुल गांधी सरकार के इन दावों से बिल्कुल भी सहमत नहीं हैं. उनका कहना है कि सरकार का सब संतोषजनक है कह देना ही यह बताता है कि वे जनता की समस्याओं से आंखें मूंद चुके हैं. राहुल का तर्क है कि जब देश भर से शिकायतों के अंबार लग रहे हैं और स्टाफ की भारी कमी है, तो सरकार उसे अनदेखा कैसे कर सकती है? कुल मिलाकर, राहुल गांधी ने साफ कर दिया है कि वह महिला सुरक्षा के मुद्दे पर सरकार को चैन से बैठने नहीं देंगे. अब देखना यह है कि राहुल के इन आंकड़ों और आरोपों पर सरकार आने वाले दिनों में क्या सफाई देती है.
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