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मुंबई सेशन्स कोर्ट ने शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत को प्रोफेसर मेधा सोमैया द्वारा दायर मानहानि मामले में गुरुवार को बरी कर दिया. इससे पहले मज़गांव स्थित मजिस्ट्रेट कोर्ट ने राउत को भारतीय दंड संहिता की धारा 500 के तहत दोषी ठहराते हुए 15 दिन की जेल और 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी. संजय राउत ने अपने वकील मनोज पिंगले के माध्यम से इस फैसले को सेशन्स कोर्ट में चुनौती दी थी.
रुइया कॉलेज में ऑर्गेनिक केमिस्ट्री की प्रोफेसर मेधा सोमैया ने आरोप लगाया था कि राउत ने उन पर और उनके एनजीओ ‘युवा प्रतिष्ठान’ पर 100 करोड़ रुपये के शौचालय घोटाले का झूठा आरोप लगाकर उनकी छवि खराब की है.
कोर्ट के बाहर राउत ने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था.
क्या है पूरा मामला?
मेधा सोमैया की शिकायत के मुताबिक, 15 अप्रैल 2022 के आस-पास संजय राउत ने मीडिया में उनके खिलाफ नफरत और शरारत भरे बयान दिए थे. वकील विवेकानंद गुप्ता के जरिए दायर शिकायत में कहा गया कि ये बयान प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया पर वायरल हुए, जिससे उनकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची. राउत ने कथित तौर पर मेधा और उनके एनजीओ को शौचालय निर्माण से जुड़े घोटाले में घसीटा था.
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हाई कोर्ट जाएगा सोमैया परिवार
मजिस्ट्रेट कोर्ट के फैसले के उलट सेशन्स कोर्ट से मिली इस राहत के बाद किरीट सोमैया और मेधा सोमैया ने प्रतिक्रिया दी है. कोर्ट में मौजूद सोमैया दंपत्ति ने कहा कि वे संजय राउत के बरी होने के इस फैसले को बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती देंगे. फिलहाल सेशन्स कोर्ट के विस्तृत फैसले का इंतजार किया जा रहा है, जिससे बरी किए जाने के कानूनी आधारों को समझा जा सके.
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