मेरठ कॉलेज में गुरुवार, 12 फरवरी को साहित्य एवं सांस्कृतिक परिषद के तत्वावधान में “वैश्विक परिप्रेक्ष्य में हिन्दी भाषा एवं साहित्य की वर्तमान स्थिति” विषय पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम दोपहर डॉ. रामकुमार गुप्ता सभागार में संपन्न हु
कार्यक्रम की संयोजिका प्रो. रेखा राणा रहीं, जबकि सह-संयोजक प्रो. वाचस्पति मिश्रा ने समन्वय की जिम्मेदारी निभाई। मुख्य वक्ता के रूप में लंदन से आईं अंतरराष्ट्रीय साहित्यकार शिखा वार्ष्णेय ने अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि हिन्दी केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक चेतना और पहचान की भाषा है। उन्होंने हिन्दी को रोजगार से जोड़ने पर विशेष बल देते हुए कहा कि जब तक भाषा आजीविका का माध्यम नहीं बनेगी, तब तक उसका व्यापक विस्तार संभव नहीं। मातृभाषा में शिक्षा को उन्होंने अधिक प्रभावी और सहज बताया।
श्रीमती वार्ष्णेय ने वैश्विक स्तर पर हिन्दी की बढ़ती स्वीकार्यता पर प्रकाश डालते हुए लंदन में आयोजित हिन्दी साहित्य सम्मेलनों की जानकारी साझा की। साथ ही भारत में हिन्दी समाचार पत्रों की सीमित उपलब्धता पर चिंता व्यक्त की और हिन्दी के व्यापक प्रचार-प्रसार की आवश्यकता बताई। उन्होंने हिन्दी बोलने में हीन भावना त्यागने का आह्वान किया और अनुवाद व भाषाई समावेशन को हिन्दी के विस्तार का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों और शोधार्थियों ने प्रश्न पूछे, जिनका वक्ता ने विस्तार से उत्तर दिया। प्रो. ऊषा किरण ने काव्य पाठ से वातावरण को साहित्यिक बना दिया। अंत में डॉ. मुकेश सेमवाल ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।
Copyright © 2024-25 DB Corp ltd., All Rights Reserved
This website follows the DNPA Code of Ethics.