'मेरे लिए पाकिस्तान जाना सबसे बड़ा गुनाह', असम सीएम हिमंता बिस्वा सरमा का गौरव गोगोई पर वार – AajTak

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असम चुनाव से पहले गुरुवार को गोवाहाटी में पंचायत आजतक असम का आयोजन हुआ. इस कार्यक्रम में असम के राजनीतिक, सामाजिक मुद्दों और चुनावी रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया गया. कार्यक्रम के आखिरी सत्र ‘अबकी बार हिमंता सरकार’  में असम सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने शिरकत की. 
‘कुछ बातें जनता जनार्दन पर छोड़नी बेहतर’
इस दौरान उन्होंने असम चुनाव से जुड़े कई मुद्दों पर बात की. अपनी बात शुरू करते हुए असम सीएम ने कहा कि जब तक चुनाव में आखिरी वोट न पड़ जाए तब तक फाइनल बात नहीं बोलना चाहिए, क्योंकि कुछ फैसला जनता जनार्दन के हाथ में छोड़ देना चाहिए.  हमारे हाथ में हैं कि हमें हर काम में 100 प्रतिशत देना चाहिए, वही मैं कर रहा हूं. हालांकि इससे पहले उन्होंने आत्मविश्वास से कहा कि जीत हमारी हो रही है. 
गौरव गोगोई पर क्या बोले असम सीएम?
गौरव गोगोई पर केस को लेकर उन्होंने कहा, हमने कोई जबरन नहीं किया. जो भी हमने सामने रखा है वह सब 100 प्रतिशत फैक्ट पर आधारित है. अगर हम कहीं गलत होते तो क्या वह हमारे ऊपर मानहानि नहीं लगाते. अगर कुछ भी मैं गलत बोलता तो या किसी को मैं पाकिस्तान का एजेंट बोलूंगा तो क्या वह मुझे कोर्ट लेकर नहीं जाएगा. इस पर जब उनसे पूछा गया कि क्या पाकिस्तान जाना गुनाह है तो असम सीएम ने कहा कि मेरे लिए तो बहुत बड़ा गुनाह है. अगर पाकिस्तान जाना गुनाह नहीं है तो कहां जाना गुनाह है. जिस पाकिस्तान के साथ 3 लड़ाई देश लड़ चुका है, देश के सैनिक बलिदान दे चुके हैं. आप उसी सेना के बलिदान को इग्नोर करते हैं. आप बिना वीजा जहां पाकिस्तान सेना का मुख्यालय है, उस जिले में भी जाते हैं तो आप पर सवाल उठेंगे ही.
Himanta Biswa Sarma
इस पर उनसे पूछा गया कि आपने कहा कि गौरव गोगोई राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हैं और आपने उन्हें पाकिस्तानी एजेंट तक कहा. एसआईटी की रिपोर्ट सितंबर में आपके पास आ गई थी, फिर आपने इतने दिन तक इंतजार क्यों किया? उन्हें गिरफ्तार क्यों नहीं किया? इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि चुनाव से ठीक पहले किसी को गिरफ्तार करना मुझे सही नहीं लगा. 10 सितंबर को मेरे पास रिपोर्ट आई थी, लेकिन उस समय असम की परिस्थितियां भी आप जानते हैं.
उस दौरान राज्य में जो घटनाएं हुईं, वे बेहद संवेदनशील थीं. अगर उसी समय मैं इस मुद्दे को उठाता, तो लोग कहते कि मैं बड़े मुद्दे से ध्यान हटाने की कोशिश कर रहा हूं. उस समय असम के लोग भावनात्मक दौर से गुजर रहे थे, इसलिए उस समय यह मुद्दा उठाना ठीक नहीं था. लेकिन इससे तथ्य नहीं बदलते. जो मुद्दा हम उठा रहे हैं, वह 2016 से पहले का है और उसमें सबूत मिटाने का उनके पास कोई रास्ता नहीं है.
‘किडनी दे देंगे, वोट नहीं देंगे’
इसके बाद बातचीत मिया मुसलमानों को लेकर उनके बयान पर पहुंची. उनसे कहा गया कि दिल्ली में दिए गए आपके एक इंटरव्यू का बयान वायरल हुआ था, जिसमें आपने कहा था कि मिया मुसलमान आपको बहुत प्यार करते हैं. वे कहते हैं कि अगर किडनी चाहिए तो बता देना, लेकिन वोट नहीं देंगे. इस पर सीएम हिमंता ने कहा कि हां, वोट अभी भी शायद नहीं देंगे. मैंने 400-400 किलोमीटर की जन आशीर्वाद यात्रा की है. असम की स्थिति थोड़ी अलग है. कई जगहों पर बूथ पूरी तरह एक ही समुदाय के लोगों के होते हैं. अगर कोई मां या बहन मुझे वोट देना भी चाहे, तो उन्हें वह माहौल नहीं मिलेगा.
लोगों को समझाना आसान नहीं- सीएम हिमंता
उन्होंने कहा कि असम के करीब 12 जिलों में ऐसी जगहें हैं जहां हम और आप भी आसानी से नहीं जा सकते. वहां की डेमोग्राफी बहुत बदल चुकी है. अगर कोई टूरिज्म के लिए जाना चाहे तो जा सकता है, लेकिन वहां की दुनिया अलग है. वहां के कई लोग बांग्लादेश से आए हुए हैं, इसलिए वहां की संस्कृति में बांग्लादेश और भारत दोनों का मिश्रण दिखाई देता है. वहां जाकर चुनाव प्रचार करना या लोगों को समझाना भी आसान नहीं होता.
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि व्यक्तिगत स्तर पर मिया मुसलमान समाज की माताएं और बहनें मुझे बहुत प्यार करती हैं. वे मुझे “मामा” कहकर बुलाती हैं. जब उनसे पूछा गया कि आजकल सब आपको मामा क्यों कह रहे हैं, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि अब मेरी उम्र 56 साल हो गई है. जब मैं 27 साल की उम्र में राजनीति में आया था तो लोग मुझे भैया या दादा कहते थे. अब मामा कहते हैं और शायद दस साल बाद काका भी कहने लगेंगे. यह दुनिया का दस्तूर है.
उन्होंने कहा कि अगर बूथों में महिलाओं का प्रभाव बढ़ेगा तो बीजेपी को वोट भी मिलेगा. अभी शायद वह स्थिति नहीं आई है. लेकिन आप मेरे इस इंटरव्यू को लिखकर रख लीजिए, दस साल बाद जब माहौल बदलेगा तो मिया मुसलमान समाज की माताएं और बहनें भी बीजेपी को वोट देंगी.
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पांच साल में सुधारी बहुत सी पुरानी गलतियां
असम सीएम ने इस दौरान ये भी कहा कि पांच साल में जो भी पुरानी गलती सुधारी जा सकती थी, वो मैंने की. पांच साल में बहुत से बदलाव हुए और इन चैलेंज के लिए हमने खुद को और असम को तैयार किया.मुझे माहौल बनाना पड़ेगा कि ये लोग खुद ब खुद चले जाएं. 
अभी मेरा स्पीच सुनिए मैं ये सब नहीं बोलता हूं. मैं न मियां बोलता हूं, न राहुल गांधी का नाम लेता हूं न गौरव गोगोई का नाम लेता हूं, क्योंकि मैं इलेक्शन कैंपेन को इमोशन कैंपेन में नहीं बदलना चाहता हूं. जहां तक पैसे देने की बात है तो मैं कुछ अलग से नहीं दे रहा हूं. ये तो हमारी योजना का हिस्सा है, इसे हम 2020 से दे रहा हैं. चुनाव आयोग आगे दो महीने ये पैसे मुझे नहीं देने देगा तो मैंने वही पैसे बढ़ाकर दिए हैं, कुछ अलग से नहीं दिया है.
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