यूपी कैडर के IAS अनुराग यादव पर गिरी गाज, CEC से बहस के बाद चुनाव पर्यवेक्षक पद से हटाए गए; 15 दिन में दूसरा बड़ा एक्शन – AajTak

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भारत निर्वाचन आयोग ने यूपी कैडर के 2000 बैच के आईएएस अधिकारी अनुराग यादव को पश्चिम बंगाल के कूच बिहार में चुनाव पर्यवेक्षक के पद से हटा दिया है. यह कार्रवाई बुधवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ हुई एक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान हुई तीखी बहस के बाद की गई. 
दरअसल, समीक्षा बैठक के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ने यादव से उनके विधानसभा क्षेत्र के पोलिंग स्टेशनों की संख्या पूछी थी, जिसका जवाब देने में उन्हें देरी हुई. इस पर हुई टिप्पणी के बाद अनुराग यादव ने मुख्य चुनाव आयुक्त को जवाब देते हुए कहा कि वह भी 25 साल से सेवा में हैं और उनसे इस तरह बात नहीं की जा सकती. अनुशासनहीनता मानते हुए आयोग ने उन्हें देर रात पद से मुक्त कर दिया.
CEC के सवाल और IAS के जवाब पर मचा बवाल
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने जब अनुराग यादव से दक्षिण विधानसभा क्षेत्र के पोलिंग स्टेशनों का विवरण मांगा, तो वे तुरंत जानकारी नहीं दे पाए. चुनाव आयुक्त द्वारा इस पर अचरज और नाराजगी जताने पर आईएएस अधिकारी ने अपनी वरिष्ठता का हवाला देते हुए पलटवार कर दिया. उन्होंने दो टूक कहा कि आप इस लहजे में बात नहीं कर सकते. इस बहस के कुछ ही घंटों बाद आयोग ने कड़ा रुख अपनाते हुए उन्हें पर्यवेक्षक की जिम्मेदारी से हटा दिया.
10 दिन पहले 25 हजार करोड़ के घोटाले में उछला था नाम
अनुराग यादव पिछले 15 दिनों में दूसरी बार सुर्खियों में आए हैं. महज 10 दिन पहले ही उन्हें आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के प्रमुख सचिव पद से हटाकर समाज कल्याण विभाग भेजा गया था. उन पर आरोप था कि उन्होंने ‘AI PUCH’ नामक एक कागजी कंपनी के साथ 25,000 करोड़ रुपये का एमओयू (MoU) साइन किया था. इस मुद्दे पर विपक्ष ने सरकार को जमकर घेरा था, जिसके बाद 30 मार्च को उनका तबादला कर दिया गया था.
आजमगढ़ के रहने वाले अनुराग का ऐसा रहा सफर
मूल रूप से आजमगढ़ के रहने वाले अनुराग यादव का प्रशासनिक करियर काफी विविधतापूर्ण रहा है. जौनपुर, झांसी और लखनऊ जैसे महत्वपूर्ण जिलों के डीएम रहने के साथ-साथ उन्होंने कृषि, शहरी विकास और वित्त जैसे विभागों में सचिव के पद पर अपनी सेवाएं दी हैं. जनवरी 2025 में उन्हें आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स का प्रमुख सचिव बनाया गया था. फिलहाल वह समाज कल्याण और सैनिक कल्याण विभाग में प्रमुख सचिव के पद पर तैनात हैं, लेकिन हालिया विवादों ने उनकी कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
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