राजस्थान की राजनीति से जुड़ा एक बड़ा चुनावी प्लान सामने आया है, जिसमें प्रदेश के करीब 100 भाजपा पदाधिकारी, विधायक और कार्यकर्ता देश के चार प्रमुख राज्यों पश्चिम बंगाल, असम, केरल और तमिलनाडु के विधानसभा चुनावों में पार्टी का प्रचार संभालेंगे। भाजपा ने इन राज्यों में प्रवासी राजस्थानियों की बड़ी आबादी को साधने के लिए यह रणनीति तैयार की है।
भाजपा नेतृत्व का मानना है कि इन राज्यों में मारवाड़, शेखावाटी, ढूंढाड़ और हाड़ौती क्षेत्र से जुड़े लाखों प्रवासी राजस्थानी रहते हैं, जिनका स्थानीय राजनीति में प्रभाव भी है। खासतौर पर पश्चिम बंगाल और असम में प्रवासी राजस्थानियों की संख्या करीब 25 लाख के आसपास आंकी जा रही है। यही कारण है कि पार्टी ने इन इलाकों में राजस्थान के नेताओं को उतारकर सीधे इस वर्ग से संपर्क साधने की रणनीति बनाई है
पार्टी की ओर से पश्चिम बंगाल में 16 नेताओं की पहली टीम भेजी जा चुकी है। इन नेताओं को अलग-अलग विधानसभा सीटों और जोन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। किसान मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी को सिलीगुड़ी जोन का प्रभारी बनाया गया है, जहां 26 सीटों पर चुनावी रणनीति तैयार की जाएगी।
इसके अलावा विधायक जितेंद्र गोठवाल को आसनसोल क्षेत्र की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि जोधपुर शहर से विधायक अतुल भंसाली को नॉर्थ कोलकाता का प्रभार सौंपा गया है। पूर्व सांसद मनोज राजोरिया को बेहाला विधानसभा सीट का इंचार्ज बनाया गया है।
प्रदेश भाजपा कार्यालय की ओर से चुनाव प्रबंधन, सोशल मीडिया और आईटी सेल के विशेषज्ञ नेताओं की अलग सूची तैयार की जा रही है। इन टीमों का काम स्थानीय स्तर पर प्रचार को डिजिटल और रणनीतिक रूप से मजबूत करना होगा।
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी इस चुनावी अभियान में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। हाल ही में वे केरल में भाजपा प्रत्याशियों की नामांकन रैलियों में शामिल हुए थे। आगामी दिनों में वे अन्य राज्यों में भी सभाएं कर सकते हैं, जहां प्रवासी राजस्थानियों के साथ-साथ स्थानीय मतदाताओं को भी साधने की कोशिश होगी।
पश्चिम बंगाल चुनाव में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव को चुनाव प्रभारी बनाया गया है, जबकि संगठन स्तर पर जिम्मेदारी सुनील बंसल को दी गई है। दोनों नेताओं को चुनावी मैनेजमेंट और ग्राउंड फीडबैक लेने में माहिर माना जाता है, जिससे पार्टी को रणनीतिक बढ़त मिलने की उम्मीद है।
राजस्थान के जयपुर, जोधपुर और कोटा जैसे बड़े शहरों में बड़ी संख्या में बंगाल के मजदूर और कामगार रहते हैं। भाजपा इन शहरों में बंगाली समाज और अन्य संगठनों के साथ बैठकें करने की योजना बना रही है, ताकि चुनाव के दौरान उन्हें पार्टी के पक्ष में जोड़ा जा सके। माना जा रहा है कि चुनाव के समय बड़ी संख्या में ये लोग अपने गृह राज्यों में मतदान करने जाएंगे, जिससे असर पड़ सकता है।
भाजपा प्रदेश महामंत्री श्रवण सिंह बगड़ी के अनुसार, जिन राज्यों में प्रवासी राजस्थानियों की अधिक संख्या है, वहां चुनाव प्रभारी की मांग के अनुसार राजस्थान से टीम भेजी जा रही है। फिलहाल पश्चिम बंगाल में 16 नेताओं की टीम काम कर रही है, जबकि असम, केरल और तमिलनाडु के लिए भी जल्द ही सूची तैयार कर टीम रवाना की जाएगी।
इस पूरे अभियान को भाजपा की उस बड़ी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है, जिसके जरिए राजस्थान के नेताओं को राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय किया जा रहा है। साथ ही, प्रवासी राजस्थानियों के प्रभाव का उपयोग कर अन्य राज्यों में चुनावी लाभ लेने की कोशिश की जा रही है।
कुल मिलाकर, राजस्थान भाजपा का यह कदम न सिर्फ चार राज्यों के चुनावों को प्रभावित करने की दिशा में अहम माना जा रहा है, बल्कि इससे प्रदेश के नेताओं की राष्ट्रीय राजनीति में भूमिका भी और मजबूत हो सकती है।
सचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)
सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।
सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।
शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।
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