Russian navy in Indo Pacific: रूस का नौसैनिक बेड़ा जकार्ता पहुंचकर इंडो-पैसिफिक में अपनी रणनीतिक मौजूदगी दिखा रहा है. पनडुब्बी की एंट्री ने क्षेत्रीय देशों की चिंता बढ़ाई है. यह भले ही छोटा सैन्य अभ्यास हो, लेकिन इसके जरिए रूस ने बड़ा कूटनीतिक और सैन्य संदेश देने की कोशिश की है.
Russian navy in Indo Pacific: रूस के पैसिफिक फ्लीट (नौसैनिक बेड़े) का एक दस्ता जकार्ता पहुंचना सिर्फ एक सामान्य नौसैनिक यात्रा नहीं है, बल्कि इसका बड़ा रणनीतिक मतलब है. यह इंडो-पैसिफिक के संवेदनशील समुद्री क्षेत्र में रूस की मौजूदगी और उसकी ताकत को दिखाता है. हालांकि इसे आधिकारिक तौर पर “मेन्युवर और कम्युनिकेशन” (यानी जहाजों के संचालन और आपसी तालमेल) की संयुक्त ड्रिल बताया जा रहा है, लेकिन इसका समय और इसमें शामिल जहाज इस घटना को और महत्वपूर्ण बना देते हैं.
रशिया की इस फ्लीट में एक कॉर्वेट (छोटा युद्धपोत), एक पनडुब्बी और एक सपोर्ट जहाज शामिल हैं, जो दिखाता है कि रूस दूर-दराज के क्षेत्रों में भी अपनी नौसैनिक ताकत बनाए रखने में सक्षम है.
इंडोनेशिया के लिए यह यात्रा उसकी मल्टी-वेक्टर नीति का हिस्सा है, जिसमें वह किसी एक देश पर निर्भर हुए बिना कई बड़ी ताकतों के साथ संबंध बनाए रखता है. इससे वह अपनी रणनीतिक स्वतंत्रता बनाए रखता है. रूस और इंडोनेशिया ने इस दौरान दोस्ती, सहयोग और एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में शांति बनाए रखने की बात कही. हालांकि यह भाषा शांतिपूर्ण लगती है, लेकिन जकार्ता में रूसी पनडुब्बी की मौजूदगी को क्षेत्र के अन्य देश गंभीरता से देखेंगे.
इंडोनेशिया के साथ रूसी सेना करेगी अभ्यास
यह अभ्यास भले ही छोटा और सीमित हो, लेकिन इसका रणनीतिक महत्व बड़ा है. ऐसे अभ्यास आपसी भरोसा, काम करने की प्रक्रिया और भविष्य में सहयोग को मजबूत करते हैं. इस मिशन में शामिल जहाज हैं, Gromky-335 कॉर्वेट, Petropavlovsk-Kamchatsky पनडुब्बी और Andrey Stepanov सपोर्ट टगबोट. खास बात यह है कि पनडुब्बी की मौजूदगी इस दौरे को और ज्यादा महत्वपूर्ण बना देती है, क्योंकि पनडुब्बियां गुप्त ऑपरेशन, निगरानी और दुश्मन की रणनीति को प्रभावित करने में अहम होती हैं.
युद्धपोत और सबमरीन मैसेजिंग
इंडोनेशिया के लिए यह संतुलन बनाना जरूरी है कि वह रूस के साथ सहयोग करे, लेकिन किसी एक पक्ष के करीब जाता हुआ न दिखे. यही उसकी रणनीतिक नीति की खासियत है. रूस के लिए यह यात्रा एक संदेश है कि वह अभी भी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सक्रिय है और अपनी मौजूदगी दिखाने में सक्षम है. ऐसे दौरे रूस की छवि को मजबूत करते हैं कि वह एक वैश्विक नौसैनिक ताकत बना हुआ है.
नौसैनिक बेड़े से रणनीतिक संदेश
यह घटना कोई नया सैन्य गठबंधन नहीं बनाती, लेकिन यह दिखाती है कि आज के समय में छोटे-छोटे नौसैनिक दौरे भी बड़े रणनीतिक संदेश देते हैं. इंडोनेशिया को इससे अपनी स्वतंत्रता मजबूत करने का फायदा मिलता है, जबकि रूस को अपनी वैश्विक मौजूदगी दिखाने का मौका मिलता है. इस तरह, जकार्ता में आया यह रूसी नौसैनिक दस्ता सिर्फ जहाजों का समूह नहीं, बल्कि समुद्री कूटनीति (Maritime Diplomacy) का एक मजबूत उदाहरण है, जो आज के इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की बदलती रणनीतिक तस्वीर को दर्शाता है.
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सौरभ पाल का नाता उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले से है. इन्होंने अपनी पढ़ाई देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय- इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से की है. सौरभ को लिखने-पढ़ने का शौक है. …और पढ़ें
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