लोकसभा में अमित शाह का 90 मिनट का भाषण, नक्सलवाद पर बोले- हथियार उठाए तो फोर्स चलेगी… – aajtak.in

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लोकसभा में सोमवार को गृह मंत्री अमित शाह ने करीब 90 मिनट के अपने संबोधन में नक्सलवाद के मुद्दे पर विपक्ष को जमकर घेरा. शाम 4 बजे जब अमित शाह सदन में आए, तो वो बोलने के लिए नहीं बल्कि सुनने के लिए बैठे थे. सफेद कुर्ते और तिरंगे के रंगों वाले स्टोल पहने शाह ने अगली कतार में बैठकर हर वक्ता को ध्यान से सुना.
हैरानी की बात यह थी कि जहां सत्ता पक्ष पूरी तरह सतर्क था, वहीं विपक्ष की अगली कतारें लगभग खाली थीं. राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाद्रा और डिंपल यादव जैसे बड़े चेहरे सदन में मौजूद नहीं थे. अमित शाह हर तर्क को अपनी डायरी में नोट कर रहे थे, जिससे साफ था कि वो एक-एक बिंदु का जवाब देने की तैयारी कर रहे हैं.
चर्चा की शुरुआत बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने की. उन्होंने अपने दादाजी की कहानी सुनाते हुए बताया कि 35 साल पहले नक्सलियों ने उनकी हत्या कर दी थी और परिवार को आज भी उनके अवशेषों का इंतजार है. इसके बाद सांसद कंगना रनौत ने मोर्चा संभाला.
नक्सलवाद पर लोकसभा में हंगामा 
कंगना ने सीधे तौर पर कांग्रेस नेतृत्व और सोनिया-राहुल गांधी पर निशाना साधा. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नक्सलवाद के खात्मे का श्रेय दिया. विपक्ष ने इसका कड़ा विरोध किया और नारेबाजी की. मणिक्कम टैगोर के नेतृत्व में विपक्षी सांसद विरोध में खड़े हो गए, सबूतों की मांग करने लगे और नारे लगाने लगे. ऐसे में अध्यक्ष को हस्तक्षेप करना पड़ा और उन्हें व्यवस्था बनाए रखने के लिए कहना पड़ा. 
6 बजकर 4 मिनट पर अमित शाह अपनी सीट से उठे. शाह ने इतिहास के पन्ने पलटते हुए इंदिरा गांधी पर नक्सली विचारधारा को राजनीतिक संरक्षण देने का आरोप लगाया. अमित शाह ने विपक्ष के पुराने तर्क को पलटते हुए कहा, ‘गरीबी की वजह से नक्सलवाद नहीं फैला बल्कि नक्सलवाद की वजह से गरीबी फैली.’
जब विपक्षी सांसदों ने उनके तर्क पर सवाल उठाए, तो शाह ने चेतावनी देते हुए कहा, ‘ये BJP की सरकार है… जो हथियार का इस्तेमाल करते हैं, अगर समझते हैं तो ठीक है, नहीं तो फोर्स का इस्तेमाल किया जाएगा.’
अमित शाह ने बताया कि उन्होंने पिछले छह दिनों में करीब 2,000 आर्टिकल्स पढ़ें हैं, जो नक्सलियों के लिए हमदर्दी रखते हैं लेकिन उनके पीड़ितों के लिए नहीं। उन्होंने 20 अगस्त 2019 का जिक्र किया जब गृह मंत्रालय की वो अहम बैठक हुई जहां से पुनर्वास की कोशिशें शुरू हुई थीं. फिर उन्होंने 24 अगस्त 2024 की बात की जब उन्होंने घोषणा की थी कि भारत 31 मार्च 2026 तक नक्सल मुक्त हो जाएगा.
यह भी पढ़ें: ‘नक्सलियों के साथ रहते-रहते खुद नक्सलवादी बन गए’, राहुल गांधी पर अमित शाह का वार

शाम 7:25 बजे जब शाह ने अपना भाषण खत्म किया तो पूरा सदन नारों और शोर-शराबे से गूंज रहा था. अमित शाह ने अपने 90 मिनट के संबोधन में बताया कि सरकार के पास नक्सलवाद को जड़ से मिटाने के लिए क्लियर रोडमैप है.
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