बंगाल के दीघा स्थित जगन्नाथ मंदिर से 'धाम' शब्द हटा दिया गया है, जिससे इस पर चल रहा विवाद समाप्त हो गया है। ओडिशा के मुख्यमंत्री के प्रस्ताव को बंगाल …और पढ़ें
बंगाल के दीघा स्थित जगन्नाथ मंदिर। (फोटो-एक्स)
दीघा जगन्नाथ मंदिर से ‘धाम’ शब्द हटाया गया।
बंगाल सरकार ने ओडिशा के प्रस्ताव को स्वीकार किया।
परिसर अब ‘श्री श्री जगन्नाथ सांस्कृतिक केंद्र’ कहलाएगा।
राज्य ब्यूरो, जागरण, कोलकाता। बंगाल के दीघा में नवनिर्मित जगन्नाथ मंदिर को धाम के जाने को लेकर चल रहे विवाद पर आखिरकार विराम लग गया। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने मंगलवार को एक बड़ा फैसला लेते हुए घोषणा की कि अब दीघा के मंदिर परिसर के नाम से ‘धाम’ शब्द को पूरी तरह हटा दिया जाएगा।
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के इस संबंध में भेजे गए आधिकारिक प्रस्ताव को बंगाल सरकार ने सहर्ष स्वीकार कर लिया है। अब इस पूरे परिसर को ‘श्री श्री जगन्नाथ सांस्कृतिक केंद्र’ और मुख्य मंदिर को‘श्री जगन्नाथ देव मंदिर’ के नाम से जाना जाएगा।
दरअसल, ओडिशा के मुख्यमंत्री का पत्र लेकर पुरी के भाजपा सांसद संबित पात्रा विशेष दूत बनकर कोलकाता पहुंचे थे। उन्होंने नवान्न (राज्य सचिवालय) में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात कर इस नाम पर ओडिशा और देश के सनातनियों की आपत्ति दर्ज कराई।
प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए शुभेंदु अधिकारी ने पूर्ववर्ती तृणमूल सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार ने शास्त्रों और सनातन संस्कृति की अनदेखी कर इसे ‘धाम’ घोषित किया था, जिससे लोगों की भावनाएं आहत हुईं। हम वह भूल सुधार रहे हैं। इस परिसर का निर्माण हिडको के टेंडर और कैबिनेट की मंजूरी से एक सांस्कृतिक केंद्र के रूप में ही हुआ था, जिसे अब उसका वास्तविक नाम दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया कि इस मंदिर में पूजा-पाठ की पूरी पद्धति पुरी के जगन्नाथ मंदिर के नियमों, शास्त्रों और पूर्ण सात्विकता के अनुसार ही संपन्न होगी। इस मंदिर के संचालन की जिम्मेदारी संभाल रहे मायापुर इस्कान मंदिर के प्रधान पुजारी राधारमण दास ने भी सरकार के इस निर्णय का हार्दिक स्वागत किया है।
सनातन परंपरा के अनुसार, आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित देश में केवल चार ही ‘धाम’ हैं, जिनमें से एक ओडिशा का पुरी जगन्नाथ धाम है। साल 2025 में तत्कालीन ममता सरकार द्वारा दीघा में इस भव्य मंदिर का उद्घाटन कर इसे ‘जगन्नाथ धाम’ का नाम देने पर भारी विवाद खड़ा हो गया था।
ओडिशा सरकार ने इसे सनातन परंपरा का अपमान माना था। यहां तक कि उद्घाटन में शामिल पुरी के सेवादारों को ओडिशा सरकार ने ‘कारण बताओ’ नोटिस जारी किया था और विग्रह के लिए इस्तेमाल की गई पवित्र नीम की लकड़ी को लेकर भी भारी राजनीतिक विवाद हुआ था। अब नए फैसले के बाद ‘धाम’ शब्द हटने से पड़ोसी राज्यों के बीच का यह भाषाई और सांस्कृतिक गतिरोध हमेशा के लिए समाप्त हो गया है।
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