भास्कर न्यूज | बालोद
शनिवार को नेशनल लोक अदालत मंे कुटुम्ब न्यायालय खण्डपीठ 2 में 17 सहित अन्य न्यायालयों की खंडपीठ में 62 हजार 524 में से 61 हजार 47 प्रकरणों का निराकरण किया गया। इसके अलावा कुल 7 करोड़ 30 लाख 72 हजार 356 रुपए राशि का अवार्ड पारित किया गया। पारिवारिक से लेकर अन्य मामले सुलझाए गए। कुटुम्ब न्यायालय के एक प्रकरण में तीन साल से अलग रहने वाले दंपती जज की समझाइश के बाद एक साथ रहने सहमति दी।
न्यायालय की सुलह व समझाइश के बाद पति-पत्नी के बीच समझौता हो गया और दोनों ने तीन साल बाद दोबारा साथ रहने का निर्णय लिया। न्यायालय अर्जुन्दा थाना क्षेत्र के एक गांव में रहने वाले युवक का विवाह तीन साल पूर्व कांकेर जिले के ग्राम कोरर निवासी युवती से सामाजिक रीति-रिवाजों के साथ गांव के मंदिर में हुआ था। शादी के करीब दो वर्ष बाद पत्नी बिना किसी को बताए अपने मायके चली गई थी। वह अपने पति से बातचीत नहीं करना चाहती थी। मोबाइल में कॉल करके उसने पति के साथ रहने से भी इंकार कर दिया था।
दंपती विवाद मामले में महिला सेल में शिकायत किए जाने पर भी पत्नी ने पति के साथ जाने से मना कर दिया। पति ने सितंबर माह में कुटुम्ब न्यायालय बालोद में दाम्पत्य संबंधों की पुनर्स्थापना के लिए आवेदन प्रस्तुत किया। नोटिस पर पत्नी ने अपनी आर्थिक स्थिति कमजोर होने की बात कहते हुए निजी अधिवक्ता रखने में असमर्थता जताई। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बालोद भेजा गया। जहां निशुल्क अधिवक्ता उपलब्ध कराया गया। न्यायाधीश शैलेश कुमार तिवारी ने दोनों के बीच सुलह-समझौते का प्रयास किया।
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय बिलासपुर के न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से मामलों का निराकरण करने प्रेरित किया। न्यायाधीश नरेश कुमार चंद्रवंशी ने जिला न्यायालय का निरीक्षण कर लोक अदालत की कार्यवाही का अवलोकन किया। न्यायमूर्ति ने न्यायिक अधिकारी, अधिवक्ताओं तथा पक्षकारों से चर्चा कर विवादों को सहमति से सुलझाने प्रेरित किया। ट्राईसिकल, श्रवणयंत्र वितरित किए। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्याम लाल नवरत्न के निर्देश पर जिले में कुल 23 खंडपीठ का गठन हुआ था।
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