हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला सहित कई जिलों में लगातार हो रही बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। शिमला की जुन्गा तहसील में बीते करीब 20 घंटों से हो रही मूसलधार वर्षा ने तबाही मचा दी है। क्षेत्र की कई सड़कों पर भूस्खलन के कारण आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई है, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बारिश और भूस्खलन के चलते हुए अलग-अलग हादसों में बाप-बेटी सहित तीन लोगों की मौत हो गई। राज्य के 10 जिलों में आज शिक्षण संस्थानों को बंद रखा गया है।
बारिश से उप तहसील जुन्गा के अंतर्गत पटवार हल्का डबलू के उप मोहल जोड़ में एक दर्दनाक हादसा सामने आया है। यहां भूस्खलन से स्थानीय निवासी वीरेंद्र कुमार (35) पुत्र स्व. जय सिंह का मकान मलबे की चपेट में आ गया। इस हादसे में वीरेंद्र कुमार और उनकी 10 वर्षीय बेटी की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि घर में मौजूद उनके मवेशी भी दबकर मर गए। इस त्रासदी के बीच बड़ी बात यह रही कि वीरेंद्र कुमार की पत्नी बाल-बाल बच गई। हादसे के समय वे घर के बाहर थीं। इस दर्दनाक हादसे से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है। स्थानीय प्रशासन ने प्रभावित परिवार को हरसंभव मदद देने का आश्वासन दिया है।
भूस्खलन की दूसरी घटना में सोमवार तड़के शिमला जिले के कोटखाई उपमंडल के गांव चोल, डाकघर आदर्श नगर में भी भारी बारिश के कारण मकान के पीछे भूस्खलन हुआ। भूस्खलन से मकान अचानक ढह गया और उसमें रहने वाली बुजुर्ग महिला कलावती पत्नी बलम सिंह मलबे में दब गईं। स्थानीय लोगों ने कड़ी मशक्कत के बाद उन्हें बाहर निकाला, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।
ग्रामीणों ने बताया कि हादसा सुबह के समय हुआ जब लोग घरों से बाहर निकलने की तैयारी कर रहे थे। अचानक गिरी मिट्टी और पत्थरों ने पूरे मकान को पलभर में ढहा दिया। हादसे की सूचना मिलते ही प्रशासन व पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और राहत कार्य शुरू किए।
भारी वर्षा के चलते प्रशासन राहत और बचाव कार्यों में जुटा हुआ है, लेकिन लगातार हो रहे भूस्खलनों से कार्य में कठिनाइयां आ रही हैं। कई संपर्क मार्गों पर यातायात पूरी तरह से बाधित हो चुका है। भारी वर्षा व भूस्खलन की वजह से लोग घरों में ही कैद होकर रह गए हैं।
मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने राज्य के कई जिलों के लिए आज भारी से बहुत भारी वर्षा का रेड अलर्ट जारी किया है। विभाग ने आने वाले 24 घंटों में और भी तेज बारिश की आशंका जताई है तथा लोगों से अनावश्यक घरों से बाहर न निकलने की अपील की है। राज्य के 10 जिलों में आज शिक्षण संस्थानों को बंद रखा गया है।
राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार प्रदेश में रविवार रात तक चार नेशनल हाईवे और 662 सड़कें बंद रहीं। अकेले चंबा में 253, मंडी में 203, कुल्लू में 175, कांगड़ा में 61, शिमला में 69, सोलन में 30 और ऊना में 22 सड़कें बंद हैं। कुल्लू के दो और मंडी व सिरमौर के एक-एक नेशनल हाईवे पूरी तरह ठप हैं।
भारी बारिश के चलते बिजली और पानी की आपूर्ति पर भी गहरा असर पड़ा है। प्रदेश में 985 ट्रांसफार्मर और 495 पेयजल योजनाएं ठप पड़ी हैं। कुल्लू में 332, चंबा में 296 और मंडी में 173 ट्रांसफार्मर बंद हैं, जबकि कांगड़ा, मंडी, शिमला और अन्य जिलों में पेयजल योजनाएं प्रभावित हुई हैं।
आपातकालीन परिचालन केंद्र की रिपोर्ट के मुताबिक इस मॉनसून सीजन में अब तक 320 लोगों की मौत हो चुकी है। मंडी में 51, कांगड़ा में 49 और चंबा में 36 लोगों की जान गई है। अब तक 4098 घर क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, जिनमें से 844 पूरी तरह ढह गए हैं। अकेले मंडी जिले में 1592 मकानों को नुकसान हुआ है। इसके अलावा 471 दुकानें और 3710 पशुशालाएं भी तबाह हो चुकी हैं। अब तक 3056 करोड़ रुपये की संपत्ति का नुकसान दर्ज किया गया है, जिसमें लोक निर्माण विभाग को 1707 करोड़, जलशक्ति विभाग को 1070 करोड़ और ऊर्जा विभाग को 139 करोड़ रुपये की क्षति उठानी पड़ी है। मॉनसून सीजन में परदेस में अब तक बादल फटने की 45, भूस्खलन की 95 और फ्लैश फ्लड की 91 घटनाएं हो चुकी हैं।
रिपोर्ट : यूके शर्मा
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