UP Bulldozer Action on Masjid Madarsa: संभल में लगातार समुदाय विशेष की आबादी वाले इलाकों में कथित अवैध निर्माण के नाम पर बुलडोजर कार्रवाई की जा रही है. इसी कड़ी में इतवार को भी जिले के मुबारकपुर बंद गांव में भी बुलडोजर कार्रवाई की गई. इस दौरान मस्जिद, मदरसा और दुकानों को आंशिक रूप से गिराया गया.
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Sambhal Masjid Madarsa Demolition Case: उत्तर प्रदेश में बुलडोजर कार्रवाई को लेकर बहस थमने का नाम नहीं ले रही है. वजह है एक समुदाय विशेष को टार्गेट में रखकर की गई कार्रवाई. हालिया कुछ सालों में मस्जिदों, मदरसों, कब्रिस्तानों और दरगाहों पर लगातार हो रही कार्रवाइयों को लेकर योगी सरकार पर सवाल उठ रहे हैं. इसी कड़ी में अब संभल जिले के एक गांव से ऐसी ही कार्रवाई सामने आई है, जिसके बाद एक बार फिर बुलडोजर कार्रवाई का मुद्दा तूल पकड़ने लगा है.
संभल के मुबारकपुर बंद गांव में इतवार (5 अप्रैल) को प्रशासन ने सार्वजनिक जमीन पर बने होने और कथित अवैध निर्माणों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की गई. जिलाधिकारी के निर्देश पर राजस्व विभाग की टीम ने गांव में बने मदरसे, मस्जिद और दुकानों को हटाने के लिए अभियान चलाया गया. प्रशासन ने दावा किया कि यह निर्माण कार्य खेल मैदान और खाद के गड्ढों की जमीन पर बने हैं.
हिंदुस्तान में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, देर शाम तक जेसीबी मशीनों की मदद से मस्जिद की दीवार और दुकानों के बड़े हिस्से को गिरा दिया गया. दरअसल, गांव के कुछ लोगों ने फरवरी महीने में जिलाधिकारी डॉ. राजेंद्र पैंसिया से शिकायत की थी. उन्होंने बताया था कि खेल के मैदान और खाद के गड्ढों के लिए दर्ज जमीन पर अवैध तरीके से मदरसा, मस्जिद और दुकानें बना दी गई हैं. इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए डीएम ने राजस्व विभाग को जांच के निर्देश दिए थे.
इसके बाद तहसीलदार धीरेंद्र सिंह के नेतृत्व में टीम बनाई गई, जिसने 28 मार्च को गाटा संख्या 630 (0.126 हेक्टेयर) और 623 (0.112 हेक्टेयर) की पैमाइश की. जांच में यह साफ हुआ कि यह जमीन राजस्व रिकॉर्ड में खेल मैदान और खाद के गड्ढों के रूप में दर्ज है, लेकिन मौके पर धार्मिक और व्यावसायिक निर्माण खड़े मिले.
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शनिवार (4 अप्रैल) को तहसीलदार ने मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों से बातचीत की. इस दौरान कुछ लोगों ने खुद ही अवैध निर्माण हटाना शुरू कर दिया था. इसके बाद इतवार को प्रशासन की टीम बुलडोजर लेकर मौके पर पहुंची और बाकी निर्माणों को गिराने का काम शुरू हुआ. शाम तक दुकानों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया, जबकि मस्जिद की दीवार और कुछ हिस्से को भी गिरा दिया गया.
बताया जा रहा है कि गांव में ग्राम समाज की करीब साढ़े तीन बीघा जमीन मौजूद निर्माण को हटाने का नोटिस मिलने के बाद इंतजामिया कमेटी ने खुद आगे आकर निर्माण हटाने का फैसला लिया. पिछले कई दिनों से कमेटी मजदूरों और स्थानीय ग्रामीणों की मदद से इन निर्माणों को धीरे-धीरे ध्वस्त कर रही थी. इसी बीच कमेटी के मुतवल्ली ने प्रशासन से बुलडोजर (जेसीबी) उपलब्ध कराने की मांग की, ताकि काम को तेजी से पूरा किया जा सके.
प्रशासन की ओर से जेसीबी भेजे जाने के बाद अवैध निर्माण को गिराने की प्रक्रिया तेज हो गई. मशीन की मदद से मस्जिद और मदरसे के ढांचे को तेजी से हटाया गया. हालांकि, इस कार्रवाई के लिए प्रशासन इंतजामिया कमेटी से जेसीबी का किराया भी वसूल करेगा, जो करीब 1000 रुपये प्रति घंटे तय किया गया है. इस पूरे घटनाक्रम में खास बात यह रही कि जहां आमतौर पर बुलडोजर कार्रवाई को लेकर विवाद खड़ा हो जाता है, वहीं यहां इंतजामिया कमेटी ने खुद पहल करते हुए निर्माण हटाने में मदद की. इससे प्रशासनिक कार्रवाई बिना किसी बड़े टकराव के आगे बढ़ सकी.
ग्रामीणों का कहना है कि सोमवार शाम तक पूरा अवैध निर्माण हटा दिया जाएगा. कार्रवाई के दौरान किसी तरह की अप्रिय घटना न हो, इसके लिए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे. मौके पर भारी पुलिस बल तैनात रहा और लोगों को ध्वस्तीकरण स्थल से दूर रखा गया. पूरी कार्रवाई प्रशासन की निगरानी में शांतिपूर्वक ढंग से पूरी हो गई.
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रैहान शाहिद का ताल्लुक उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर ज़िले से हैं. वह पिछले पांच सालों से दिल्ली में सक्रिय रूप से पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्यरत हैं. Zee न्यूज़ से पहले उन्होंने ABP न्यूज़ और दू…और पढ़ें
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