Social awareness: सड़क पर सुरक्षित चलना हर नागरिक का मौलिक अधिकार है. लेकिन ये अधिकार आज छीना जा रहा है. शहरों में पैदल यात्रियों के सुरक्षित चलने के लिए बने फुटपाथ गायब हो रहे हैं. कुछ लोग फुटपाथ गायब करके कैसे आपकी जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं. ज़ी मीडिया की खास मुहिम आपके ‘हक की बात’ में आपको बताते हैं.
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Zee Media Social Awareness Programme: एक सड़क हादसा किसी इंसान की जिंदगी कैसेबदल देता है, यह बात सोशल एक्टिविस्ट हरमन सिंह सिद्धू से बेहतर कौन जानता होगा. हरमन अपनी बाकी की जिंदगी व्हीलचेयर पर ही बिता रहे हैं. कैसे खुद के साथ हुए एक हादसे के बाद सामाजिक कार्यकर्ता हरमन सिंह ने बाकी लोगों की जिंदगी बचाने की मुहिम शुरू की. ज़ी न्यूज़ से बात करते हुए उन्होंने बताया कि देश में फुटपाथ पर कब्जा भी हादसे की बड़ी वजह है.
क्या आपके शहर में भी फुटपाथ गायब हो रहे हैं?
ये सच है कि महानगरों में सड़कें सिकुड़ रही हैं. शहरों से फुटपाथ गायब हैं और पैदल चलने वाले हादसे का शिकार हो रहे हैं. स्कूली बच्चों के लिए फुटपाथ बचे नहीं हैं. बुजुर्गों के लिए सुबह की सैर मुश्किल हो गई है. हिंदुस्तान के लगभग हर शहर की यही कहानी है. यहीं दास्तां हैं. नियमों को ताक पर रखकर धडल्ले से सार्वजनिक फुटपाथ अब प्राइवेट स्पेस बना दिए गए हैं. यानी पब्लिक के चलने का अधिकार भी छीन लिया गया.
Zee मीडिया की पड़ताल
सवाल आपके हक का था. लिहाजा हमने ऑल इंडिया लेवल पर फुटपाथों की पड़ताल शुरू की. हम देखना चाहते थे कि आपके लिए जो फुटपाथ बने हैं, उनके क्या हालात हैं? लेकिन हमें निराशा के साथ कहना पड़ रहा है कि जहां-जहां हमारी टीम गई. वहां कहीं फुटपाथ टूटा हुआ था, कहीं फुटपाथ पर कब्जा किया हुआ था. कहीं पार्किंग बना रखी थी, तो कहीं रेहड़ी पटरी वाले अवैध दुकान लगाए बैठे थे.
देश के एक और सामाजिक कार्यकर्ता मधुकर कुकड़े ने हालात बताते हुए अपनी चिंता जताई. कुछ जगह जहां चलने के लिए फुटपाथ बचे भी हैं, तो रास्ता इतना संकरा है कि पैर रखने की जगह नहीं मिल पाती. पटना, नोएडा समेत कई शहरों के हालात बेहद चिंताजनक है. एक बुजुर्ग के लिए, एक महिला के लिए, एक दिव्यांग के लिए फुटपाथ सुविधा नहीं बल्कि जरूरत है. लेकिन अफसोस है कि लोगों के इस अधिकार पर भी कब्जा किया जा रहा है.
देश में 75% से ज्यादा फुटपाथ पर स्थायी अतिक्रमण
एक आंकड़े के मुताबिक दिल्ली में 44% सड़कों पर फुटपाथ नहीं है, जो हैं उनमें से सिर्फ 25 फीसदी ही सुरक्षित हैं. देश में 30 से 60 फीसदी तक फुटपाथ कब्जे में हैं या बदहाल स्थिति में हैं. देश में 75% से ज्यादा फुटपाथ पर स्थायी अतिक्रमण है, यानी लोगों ने निर्माण किया हुआ है. वहीं 68% जगहों पर अस्थायी अतिक्रमण रेहड़ी, ठेले-पटरी वालों का कब्जा है. आंकड़े बताते हैं कि भारत में सड़क दुर्घटनाओं में लगभग 40 फीसदी से ज्यादा मौतें पैदल चलने वालों की होती हैं.
दिल्ली की सड़कों से भी फुटपाथ गायब होते जा रहे हैं या यूं कहे कि कुछ लोगों ने अपने फायदे के लिए फुटपाथ को गायब कर दिया, जिसका खामियाजा पब्लिक को उठाना पड़ रहा है.
हक से बोलो..फुटपाथ हमारा है !
#HaqKiBaat #GharKiBaat #ZeeNews #ZeeLive | @RajLaveena https://t.co/DlG3P9spur— Zee News (@ZeeNews) April 5, 2026
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बेंगलुरु में 45% हादसे फुटपाथ की कमी के चलते हुए.
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नागपुर में 30 फीसदी मौतें पैदल यात्रियों की हुई हैं.
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हैदराबाद में हर दिन 4 पैदल यात्री मौत का शिकार हो रहे हैं.
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बेंगलुरु में 45% हादसे फुटपाथ की कमी के चलते हुए.
नागपुर में 30 फीसदी मौतें पैदल यात्रियों की हुई हैं.
हैदराबाद में हर दिन 4 पैदल यात्री मौत का शिकार हो रहे हैं.
ये गंभीर मुद्दा है. प्रशासन और हम सभी को इसे गंभीरता से लेना होगा. जो फुटपाथ को अपने घर की संपत्ति समझ रहे हैं, उन पर कार्रवाई जरूरी है. ऐसे लोगों के खिलाफ प्रशासन को सख्ती दिखानी होगी. साथ ही पब्लिक को भी जागरूक होना होगा, ताकि वो अपने हक की आवाज उठा सके. क्योंकि ये आपकी और हमारी जिंदगी का सवाल है.
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श्वेतांक रत्नाम्बर पत्रकारिता जगत में 21 साल से ज्यादा का अनुभव रखते हैं. देश-दुनिया की ख़बरों को आसान भाषा में बताने में महारत रखने वाले श्वेतांक को राजनीतिक और अंतर्राष्ट्रीय खबरों की गहरी समझ है…और पढ़ें
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