सैटेलाइट ने द‍िखाया चीन का नया निर्माण, क्या भारत को सतर्क रहने की जरूरत? – AajTak

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नई हाई-रिजॉल्यूशन सैटेलाइट इमेज से पता चलता है कि चीन, पंगोंग त्सो के विवादित पूर्वी लद्दाख इलाके में अपनी स्थायी सैन्य मौजूदगी को बढ़ा रहा है. चीन ने 1962 की जंग के बाद से इस क्षेत्र में सिरीजाप पोस्ट के पास नियंत्रण रखा है जबकि भारत इसे अपना हिस्सा मानता है. इमेज में साफ दिख रहा है कि झील के किनारे नई इमारतों का एक बड़ा परिसर बन रहा है. इसका मतलब है कि चीन अपनी सेना और संसाधनों को बफर जोन के पास और करीब रख सकेगा.
इलाका और पृष्ठभूमि
2013 में चीन ने इस इलाके में सड़क नेटवर्क बनाया था, जो पहले दोनों देशों के पेट्रोलिंग के लिए इस्तेमाल होता था. मई 2020 के स्टैंडऑफ के बाद, भारतीय पेट्रोलिंग को यहां प्रवेश नहीं मिला. 2020 से चीन ने अस्थायी संरचनाएँ बनाई थीं, जिनमें सैनिकों के लिए रहने की व्यवस्था, नावें और एक पियर्स शामिल थे.
हालिया निर्माण गतिविधि
दिसंबर 2025 की इमेज से पता चलता है कि निर्माण का काम तेज हो गया है. नई इमारतें स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही हैं. नावें पियर्स से हटा दी गई हैं, संभवतः झील के जमने की वजह से.
राजनीतिक और सैन्य महत्व
भारत और चीन के रिश्ते पिछले साल थोड़े बेहतर हुए. प्रधानमंत्री मोदी ने SCO समिट के लिए चीन का दौरा किया और सीधी उड़ानें फिर से शुरू हुईं. दोनों देशों ने पूर्वी लद्दाख में तनाव वाले पॉइंट्स से ‘डिसएंगेज’ किया. लेकिन चीन का असली इरादा और भविष्य की रणनीति अब भी सवालों के घेरे में है.
जियोस्पेशियल रिसर्चर डेमियन सायमन कहते हैं कि चीन का ये निर्माण दिखाता है कि वो स्थायी संरचनाएं बनाकर क्षेत्र में नियंत्रण मजबूत करना चाहता है. ये स्थल 2020 के डिसएंगेजमेंट जोन के ठीक बाहर है और चीन को साल भर ऑपरेशन करने में मदद करेगा. ये कदम भारत के दावों को कमजोर करता है और लंबे समय तक अपनी मौजूदगी जताने का संकेत देता है.
पिछले निर्माण और सुरक्षा सुविधाएं
पहले की रिपोर्ट में दिखाया गया था कि चीन ने एयर डिफेंस साइट्स बनाई हैं, जिनमें ट्रांसपोर्टर एरेक्टर लॉन्चर (TEL) वाहनों के लिए कवर और छतें हैं.
विवादित इलाके के पास एक और बड़ा निर्माण भी हो रहा है, जिसे कई लोग ड्यूल-यूज सुविधा मानते हैं.
भारत-चीन बैठकें और संपर्क
भारत और चीन ने अक्टूबर 2024 तक WMCC और SHMC मीटिंग्स के जरिए एलएसी मुद्दों को सुलझाने की कोशिश की. डिसएंगेजमेंट के बाद दोनों देशों ने कई अन्य बैठकें कीं जिसमें लोगों के लिए यात्रा, सीधी उड़ानें, नदी और 75वीं वार्षिक कूटनीतिक संबंधों की गतिविधियों पर जोर दिया गया.
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