सोनल, मंजूषा, सुलक्षणा… 30 हजार का लालच देकर निकलवा लेते थे अंडाणु, फिर लाखों का होता था खेल, IVF रैकेट की पूरी कहानी – AajTak

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महाराष्ट्र के ठाणे से शुरू हुई एक जांच ने ऐसे चौंकाने वाले IVF रैकेट का पर्दाफाश किया है, जिसमें गरीब और जरूरतमंद महिलाओं को 25 से 30 हजार रुपये का लालच देकर उनके अंडाणु निकलवाए जाते थे. फर्जी आधार कार्ड, नकली दस्तावेज और अलग-अलग नामों से एक ही महिला को बार-बार डोनर दिखाया जाता था. इस पूरे खेल में सोनल, मंजूषा और सुलक्षणा जैसे नाम सामने आए हैं. पुलिस ने अब तक छह लोगों को पकड़ा है. इस रैकेट के जरिए लाखों रुपये का अवैध कारोबार किया जा रहा था.
ठाणे के उल्हासनगर और बदलापुर में पुलिस को कुछ समय पहले सूचना मिली कि कुछ लोग गरीब महिलाओं को पैसे का लालच देते हैं, उन्हें ‘एग डोनेशन’ के लिए तैयार करते हैं. शुरुआत में यह मामला सामान्य मेडिकल प्रक्रिया जैसा लगा, लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, परत दर परत एक बड़े रैकेट का खुलासा होने लगा.
पुलिस का कहना है कि महिलाओं को 25 से 30 हजार रुपये देने का वादा किया जाता था. आर्थिक तंगी से जूझ रहीं कई महिलाएं इस लालच में आ जाती थीं. उन्हें बताया जाता था कि यह एक सामान्य मेडिकल प्रक्रिया है और इससे उन्हें जल्दी पैसा मिल जाएगा. लेकिन असलियत कुछ और ही होती थी.
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एक महिला, कई नाम… फर्जी दस्तावेजों का खेल
जांच में सामने आया कि इस रैकेट का सबसे बड़ा हथियार था फर्जी दस्तावेज. गिरोह एक ही महिला को कई अलग-अलग नामों से डोनर दिखाता था. इसके लिए नकली आधार कार्ड और फर्जी शपथपत्र तैयार किए जाते थे.
इस रैकेट ने कानून को दरकिनार कर महिलाओं की फर्जी पहचान का सहारा लिया. एक महिला का फोटो लेकर उसके नाम पर कई अलग-अलग पहचान पत्र बनाए जाते थे. फिर उसे अलग-अलग नामों से IVF सेंटर में डोनर के तौर पर पेश किया जाता था. 
डॉक्टर की एंट्री से खुला बड़ा राज
इस मामले में पुलिस ने नासिक के एक डेंटिस्ट डॉ. अमोल पाटिल को भी अरेस्ट किया है. जांच में पता चला कि नासिक के मुंबई नाका इलाके में ‘मालती IVF सेंटर नाम का एक केंद्र उनकी पत्नी के नाम पर रजिस्टर्ड है.
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पुलिस के अनुसार, इसी सेंटर का इस्तेमाल अवैध सरोगेसी कॉन्ट्रैक्ट और अंडाणु तस्करी के लिए किया जा रहा था. डॉ. अमोल पाटिल पर आरोप है कि वह इस पूरे नेटवर्क को मेडिकल हेल्प मुहैया कराते थे. यानी महिलाओं से अंडाणु निकालने की प्रक्रिया यहीं पूरी की जाती थी. कोर्ट में पेश किए जाने के बाद उन्हें 9 मार्च तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है.
500 से ज्यादा महिलाओं के शोषण की आशंका
जांच के दौरान पुलिस को कई चौंकाने वाले सबूत मिले हैं. आरोपियों के मोबाइल फोन से सैकड़ों महिलाओं की तस्वीरें, फर्जी शपथपत्र और सोनोग्राफी रिपोर्ट बरामद हुई हैं. पुलिस को शक है कि इस रैकेट के जरिए 500 से ज्यादा महिलाओं का शोषण किया गया हो सकता है.
महिलाओं को सिर्फ 25 से 30 हजार रुपये दिए जाते थे, जबकि इन अंडाणुओं को लाखों रुपये में बेचा जाता था. यानी इस पूरे खेल में भारी मुनाफा कमाया जा रहा था.
सोनल, मंजूषा और सुलक्षणा की भूमिका
इस मामले में जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया है, उनमें सोनल गरेवाल, मंजूषा वानखेड़े और सुलक्षणा गाडेकर जैसे नाम शामिल हैं.
पुलिस के अनुसार, ये लोग महिलाओं को ढूंढने और उन्हें इस प्रक्रिया के लिए तैयार करने का काम करते थे. जरूरतमंद महिलाओं को समझाया जाता था कि इससे उन्हें जल्दी पैसे मिल जाएंगे और कोई खतरा नहीं होगा. इसके बाद उन्हें अलग-अलग जगहों पर ले जाकर मेडिकल टेस्ट करवाए जाते थे और फिर अंडाणु निकालने की प्रक्रिया पूरी की जाती थी. 
पुलिस के हाथ लगे लाखों के इंजेक्शन और दवाइयां
छापेमारी के दौरान पुलिस ने 15 लाख रुपये से ज्यादा कीमत की दवाइयां और इंजेक्शन भी जब्त किए हैं. ये वही दवाइयां हैं जो अंडाणु निकालने की प्रक्रिया में इस्तेमाल होती हैं. इससे साफ हो गया कि यह कोई छोटा-मोटा खेल नहीं था, बल्कि संगठित तरीके से चलाया जा रहा एक बड़ा नेटवर्क था.
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पुलिस के मुताबिक, यह रैकेट केवल एक शहर तक सीमित नहीं था. इसकी गतिविधियां बदलापुर, उल्हासनगर, ठाणे और नासिक तक फैली हुई थीं. अलग-अलग जगहों पर महिलाएं ढूंढी जाती थीं और फिर उन्हें IVF सेंटर तक लाया जाता था. इस तरह यह पूरा नेटवर्क कई जिलों में सक्रिय था.
हालांकि इस मामले में छह लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, लेकिन पुलिस का मानना है कि इसके पीछे कोई बड़ा मास्टरमाइंड हो सकता है. उल्हासनगर के डीसीपी सचिन गोरे के मुताबिक, तीन पुलिस टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं और इस पूरे नेटवर्क के मुख्य आरोपी की तलाश की जा रही है. साथ ही ठाणे और आसपास के जिलों के कई IVF और सोनोग्राफी सेंटरों की भी जांच की जा रही है.
मेडिकल सिस्टम में कैसे चल रहा था यह खेल?
इस मामले ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर इतने बड़े स्तर पर यह रैकेट कैसे चल रहा था. फर्जी दस्तावेजों के जरिए एक ही महिला को बार-बार डोनर दिखाया जाना और अलग-अलग सेंटरों में प्रक्रिया होना मेडिकल निगरानी प्रणाली पर भी सवाल उठाता है. फिलहाल पुलिस इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है. अधिकारियों का मानना है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, इस रैकेट से जुड़े और नाम सामने आ सकते हैं. संभव है कि इसमें कुछ और मेडिकल सेंटर या बिचौलिए भी शामिल हों.
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