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उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में मौजूद POCSO एक्ट स्पेशल कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है. अदालत ने यौन शोषण से जुड़े गंभीर आरोपों के मामले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश पुलिस को दिया है. इस मामले में उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरि का नाम भी शामिल किया गया है. ये आदेश एडीजे (POCSO एक्ट) विनोद कुमार चौरसिया ने पारित किया है. अदालत ने साफ कहा कि आरोप बेहद गंभीर है, इसलिए पुलिस को तुरंत मामला दर्ज कर निष्पक्ष और डिटेल्ड जांच करनी चाहिए. कोर्ट के निर्देश के बाद अब ये मामला झूंसी थाना में दर्ज किया जाएगा.
ये भी पढ़ें: अयोध्या में नहीं मिलेगी अविमुक्तेश्वरानंद को एंट्री, जानें क्यों और किसने दी ऐसी चेतावनी?
शुरुआत में शकुंभरी पीठाधीश्वर आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने एक एप्लीकेशन दायर की थी. उन्होंने अदालत में धारा 173(4) के तहत याचिका दाखिल कर FIR दर्ज करने और सख्त कार्रवाई की मांग की थी. याचिका में कहा गया कि पीड़ित पक्ष को लंबे समय से न्याय नहीं मिल पा रहा है और अब कानूनी हस्तक्षेप जरूरी हो गया है. अदालत ने सभी तथ्यों और दस्तावेजों पर विचार करने के बाद पाया कि FIR का मामला बनता है. इसी आधार पर पुलिस को FIR दर्ज करने और कानून के मुताबिक जांच आगे बढ़ाने का आदेश दिया गया. कोर्ट ने ये भी निर्देश दिया कि जांच के दौरान सभी सबूतों, गवाहों और परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाए.
आशुतोष ब्रह्मचारी ने दावा किया है कि उन्होंने कथित घटनाओं से जुड़ी सीडी भी अदालत में सौंपी है. उन्होंने कहा कि उन्हें न्याय मिला है और वो प्रयागराज से विद्या मठ, वाराणसी तक पैदल सनातन यात्रा निकालेंगे ताकि लोगों के सामने सच्चाई रखी जा सके. इस मामले के सामने आने के बाद धार्मिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वो कोर्ट के आदेश का पूरी तरह पालन करेंगे और मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से की जाएगी. आने वाले दिनों में जांच की प्रोग्रेस और पुलिस की कार्रवाई पर सबकी नजर बनी रहेगी.
ये भी पढ़ें: प्रयागराज विवाद में आया नया मोड़, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को दोबारा स्नान कराने से प्रशासन का इनकार, हाई कोर्ट पहुंचा मामला
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में मौजूद POCSO एक्ट स्पेशल कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है. अदालत ने यौन शोषण से जुड़े गंभीर आरोपों के मामले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश पुलिस को दिया है. इस मामले में उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरि का नाम भी शामिल किया गया है. ये आदेश एडीजे (POCSO एक्ट) विनोद कुमार चौरसिया ने पारित किया है. अदालत ने साफ कहा कि आरोप बेहद गंभीर है, इसलिए पुलिस को तुरंत मामला दर्ज कर निष्पक्ष और डिटेल्ड जांच करनी चाहिए. कोर्ट के निर्देश के बाद अब ये मामला झूंसी थाना में दर्ज किया जाएगा.
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शुरुआत में शकुंभरी पीठाधीश्वर आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने एक एप्लीकेशन दायर की थी. उन्होंने अदालत में धारा 173(4) के तहत याचिका दाखिल कर FIR दर्ज करने और सख्त कार्रवाई की मांग की थी. याचिका में कहा गया कि पीड़ित पक्ष को लंबे समय से न्याय नहीं मिल पा रहा है और अब कानूनी हस्तक्षेप जरूरी हो गया है. अदालत ने सभी तथ्यों और दस्तावेजों पर विचार करने के बाद पाया कि FIR का मामला बनता है. इसी आधार पर पुलिस को FIR दर्ज करने और कानून के मुताबिक जांच आगे बढ़ाने का आदेश दिया गया. कोर्ट ने ये भी निर्देश दिया कि जांच के दौरान सभी सबूतों, गवाहों और परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाए.
आशुतोष ब्रह्मचारी ने दावा किया है कि उन्होंने कथित घटनाओं से जुड़ी सीडी भी अदालत में सौंपी है. उन्होंने कहा कि उन्हें न्याय मिला है और वो प्रयागराज से विद्या मठ, वाराणसी तक पैदल सनातन यात्रा निकालेंगे ताकि लोगों के सामने सच्चाई रखी जा सके. इस मामले के सामने आने के बाद धार्मिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वो कोर्ट के आदेश का पूरी तरह पालन करेंगे और मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से की जाएगी. आने वाले दिनों में जांच की प्रोग्रेस और पुलिस की कार्रवाई पर सबकी नजर बनी रहेगी.
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