'हमलावरों के खिलाफ दर्ज करें FIR, पीड़ित को दें सुरक्षा', आसिफ शेख मामले में बॉम्बे HC का निर्देश – Aaj Tak

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आसिफ शेख पर हुए हमले के मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने बुधवार को निर्देश दिया कि तुरंत शेख को पुलिस सुरक्षा दी जाए और हमलावरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया जाए. कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि अदालत के आदेशों के बावजूद मुंबई पुलिस द्वारा पुलिस सुरक्षा नहीं देना बहुत परेशान करने वाली बात है.
न्यायमूर्ति रेवती मोहिते डेरे की अध्यक्षता वाली पीठ ने पिछले साल 6 मई को निर्देश दिया था कि आसिफ शेख की सुरक्षा के लिए दो पालियों में चौबीसों घंटे एक-एक पुलिसकर्मी तैनात किया जाए. हालांकि कोर्ट के आदेश के बावजूद भी उन्हें सुरक्षा नहीं दी गई और उन पर मुंबई में हमला किया गया.
‘पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं किया’
मामले की सुनवाई दौरान जस्टिस रेवती मोहिते डेरे और श्याम चांडक की पीठ ने बुधवार को पूछा कि जब हमने सुरक्षा देने का आदेश दिया था, तो आसिफ शेख को सुरक्षा क्यों नहीं दी गई. अदालात में शेख की ओर से पेश वकील गौतम कंचनपुरकर ने बताया कि उन्हें सूचित किया गया था कि सभी पुलिसकर्मी चुनाव में व्यस्त थे और 25 मई से पुलिस सुरक्षा दी जाएगी. कंचनपुरकर ने कहा कि 6 मई के आदेश के तुरंत बाद 8 मई को यह तोड़फोड़ हुई और शिकायत देने के बावजूद मुंबई पुलिस ने कोई एफआईआर दर्ज नहीं की.
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‘परिवार के साथ मारपीट की’
आसिफ शेख द्वारा दायर याचिका के मुताबिक, शेख पर हमला तब शुरू हुआ जब वह पिछले साल 19 जनवरी को अपने परिवार के साथ रत्नागिरी जिले के कांकावली स्थित अपने गांव से ट्रेन से लौट रहे थे. याचिका के अनुसार ट्रेन में कुछ कॉलेज के लड़के थे. जो शोर कर रहे थे, इसलिए शेख ने उन्हें शांत रहने के लिए कहा, जिसके बाद छात्रों ने शेख से नाम, जाति और धर्म के बारे में पूछा और यह जानने के तुरंत बाद कि वह एक मुस्लिम हैं, जोर देकर कहा कि वह ‘जय श्री राम’ कहे. 
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जब शेख और उनकी पत्नी ने यह कहने से इनकार कर दिया तो छात्रों ने कथित तौर पर उनके और उनके परिवार के साथ मारपीट करना शुरू कर दिया. एक छात्र ने कथित तौर पर उनकी नाबालिग बेटी पर चाय का कप फेंक दिया और दूसरी नाबालिग बेटी को पीटने की कोशिश करने लगा.
अज्ञात के खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज किया
याचिका के अनुसार उस समय ट्रेन चिपलून रेलवे स्टेशन को पार कर रही थी, इसलिए उन्होंने हेल्पलाइन पर कॉल किया, जिसके बाद पुलिस की तरफ से उन्हें पनवेल रेलवे स्टेशन पर मदद का आश्वासन दिया गया. शिकायत के बाद पनवेल में रेलवे सुरक्षा बल के पुलिसकर्मी आए और छह लड़कों और एक लड़की को पुलिस स्टेशन ले गए, लेकिन पनवेल पुलिस स्टेशन में केवल एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई.
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इसके अलावा, याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि बीजेपी विधायक नितेश राणे के कहने पर खुद शेख के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई और दोनों एफआईआर को मनमाने ढंग से कांकावली में स्थानांतरित कर दिया गया.
‘कुछ लोगों ने शेख को धमकी दी’
23 जनवरी को कांकावली पुलिस ने उन्हें बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया था. शेख ने पुलिस को सूचित किया कि उसे जान का खतरा है और उसने पुलिस सुरक्षा देने का आग्रह किया.  जिसके बाद पुलिस ने शेख को सुरक्षा देने का आश्वासन भी दिया. हालांकि जब वह कांकावली पहुंचे, तो कोई पुलिस सुरक्षा मिली नहीं की गई. वहीं कथित तौर पर राणे के कुछ लोगों ने उन्हें धमकी दी और अपनी शिकायत वापस लेने के लिए कहा.
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‘शिकायत वापस लेने की धमकी’
शेख ने जब सहायता के लिए 100 नंबर डायल किया और पुलिस को सूचित किया, तो उन्हें एक पुलिस स्टेशन ले जाया गया, जहां 300 लोगों थे और वो ‘जय श्री राम’ के नारे लगा रहे थे.  वहीं राणे भी कथित तौर पर पुलिस स्टेशन पहुंच गए और पुलिसकर्मियों के सामने शेख को अपनी शिकायत वापस लेने की धमकी दी, जिन्होंने उन्हें कुछ नहीं कहा. शेख के मुताबिक, ये सब पुलिस स्टेशन के सीसीटीवी फुटेज में कैद हो गया, जिसे हाई कोर्ट ने सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है.
लोगों ने शेख की पिटाई की
पुलिस स्टेशन से बाहर निकलने के बाद शेख ने जब सुरक्षा की मांग की, तो शेख को सुरक्षा देने से इनकार कर दिया गया. वहीं जब वो अपने घर पर पहुंचे तो लोगों के एक समूह ने शेख की पिटाई की. जिसका वीडियो फुटेज अदालत को उपलब्ध कराया गया. घटना में घायल शेख को इलाज के लिए अस्पताल लेकर जाया गाया. हालांकि शेख ने आरोप लगाया कि उसे सरकारी अस्पताल में सही इलाज नहीं दिया गया और जिस वजह से उसे एक निजी अस्पताल में जाना पड़ा.
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पुलिसकर्मियों पर उठ रहा सवाल
शेख की याचिका पुलिसकर्मियों पर सवाल उठाती है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कणकवली में उनके खिलाफ एक और झूठी प्राथमिकी दर्ज की गई. शेख की याचिका में मांग की गई है कि अब तक दर्ज की गई सभी एफआईआर को पड़ोसी जिले में स्थानांतरित कर दिया जाए और उसे पुलिस सुरक्षा प्रदान की जाए.
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