हापुड़ में हिंदी साहित्य परिषद ने श्रीनगर स्थित लक्ष्मी नर्सरी में काव्य संध्या का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का संयोजन कवि एवं साहित्यकार प्रेम निर्मल ने किया। इसमें कवियों और शायरों ने समाज, प्रकृति, राष्ट्र, संघर्ष और मातृत्व जैसे विषयों पर अपनी रचनाएं प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया।
सुप्रसिद्ध कवि ने किया संचालन
कार्यक्रम का संचालन सुप्रसिद्ध कवि डॉ. अनिल बाजपेयी और कवयित्री सुनीता स्वामी ने संयुक्त रूप से किया। वरिष्ठ गीतकार महावीर वर्मा ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की, जबकि अजय बंसल मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे।
श्रोताओं ने प्रस्तुति को खूब सराहा
काव्य संध्या में कवि प्रेम निर्मल ने महंगाई पर व्यंग्य करते हुए अपनी रचना सुनाई। “महंगाई डायन हुई, रोज-रोज विकराल, प्रभुवर! अपने हैं कहाँ, जीना हुआ मुहाल।” श्रोताओं ने उनकी प्रस्तुति को खूब सराहा।
सकारात्मक सोच पर प्रस्तुत रचना
कवयित्री सुनीता स्वामी ने प्रेम और सकारात्मक सोच पर रचना प्रस्तुत की, जबकि डॉ. अनिल बाजपेयी ने प्रकृति की पीड़ा को स्वर देते हुए कहा: “सूखी सरिता देखकर, आए बदरा याद, मां धरती जल्दी करो, मेघों से संवाद।”
भीषण गर्मी का किया चित्रण
गीतकार महावीर वर्मा ने भीषण गर्मी का चित्रण किया। कवि मोहनलाल तेजियान ने सामाजिक विघटन और जातिगत विभाजन पर चिंता व्यक्त की। पंडित शिवप्रकाश शर्मा ने मां के वियोग पर भावुक रचना सुनाई।
शायरा शहवार नावेद ने संघर्ष, लक्ष्य और सत्य की साधना पर आधारित रचना प्रस्तुत की, और कवयित्री वर्षा जैन ने मातृभक्ति का संदेश दिया।
साहित्यकारों को मंच प्रदान
मुख्य अतिथि अजय बंसल ने अपने संबोधन में हिंदी साहित्य और काव्य परंपरा के संरक्षण में ऐसे आयोजनों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि ये आयोजन साहित्यकारों को मंच प्रदान करते हैं और नई पीढ़ी को साहित्य से जोड़ते हैं।
इस अवसर पर परिषद ने कवि एवं ग़ज़लकार प्रेम निर्मल को शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया। अंत में संयोजक अजय मंगल ने सभी अतिथियों, कवियों और श्रोताओं का आभार व्यक्त किया।
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