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असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा एक बार फिर विवादों में हैं. उनके खिलाफ बेंगलुरु में FIR दर्ज करवाई गई है. CM हिमंता पर सोशल मीडिया पर हेट कंटेंट फैलाने का आरोप लगा है. हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर सीधे सुनवाई से इनकार करते हुए याचिकाकर्ताओं को हाईकोर्ट जाने की सलाह दी है. पूरा मामला असम BJP के आधिकारिक एक्स हैंडल से शेयर किए गए एक वीडियो से शुरू हुआ था. आरोप है कि इस वीडियो में मुख्यमंत्री को एक राइफल से एनिमेटेड व्यक्तियों पर निशाना साधते और गोली चलाते हुए दिखाया गया था. वीडियो में ‘प्वाइंट ब्लैंक शॉट’ और ‘नो मर्सी’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया था.
यह भी पढ़ें: सुप्रीम कोर्ट में AI की मदद से याचिका लिख रहे वकील, टेंशन में आ गए CJI सूर्यकांत
भारी विरोध के बाद इस वीडियो को डिलीट कर दिया गया था, लेकिन इसके स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर वायरल हो गए. सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को लेकर कई याचिकाएं दायर की गई थीं, जिनमें मुख्यमंत्री के खिलाफ FIR दर्ज करने और SIT जांच की मांग की गई थी. सुप्रीम कोर्ट ने इन याचिकाओं पर सीधे सुनवाई करने से इनकार कर दिया.
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ ने कहा कि चुनाव के समय अदालत को “राजनीतिक अखाड़ा” नहीं बनाया जाना चाहिए. हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों को ऐसी भाषा या आचरण से बचना चाहिए जो देश के धर्मनिरपेक्ष ताने-बने को नुकसान पहुंचाए.
यह भी पढ़ें: ‘किसी पर भी इतना भरोसा ठीक नहीं’, शादी से पहले शारीरिक संबंधों पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा एक बार फिर विवादों में हैं. उनके खिलाफ बेंगलुरु में FIR दर्ज करवाई गई है. CM हिमंता पर सोशल मीडिया पर हेट कंटेंट फैलाने का आरोप लगा है. हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर सीधे सुनवाई से इनकार करते हुए याचिकाकर्ताओं को हाईकोर्ट जाने की सलाह दी है. पूरा मामला असम BJP के आधिकारिक एक्स हैंडल से शेयर किए गए एक वीडियो से शुरू हुआ था. आरोप है कि इस वीडियो में मुख्यमंत्री को एक राइफल से एनिमेटेड व्यक्तियों पर निशाना साधते और गोली चलाते हुए दिखाया गया था. वीडियो में ‘प्वाइंट ब्लैंक शॉट’ और ‘नो मर्सी’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया था.
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भारी विरोध के बाद इस वीडियो को डिलीट कर दिया गया था, लेकिन इसके स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर वायरल हो गए. सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को लेकर कई याचिकाएं दायर की गई थीं, जिनमें मुख्यमंत्री के खिलाफ FIR दर्ज करने और SIT जांच की मांग की गई थी. सुप्रीम कोर्ट ने इन याचिकाओं पर सीधे सुनवाई करने से इनकार कर दिया.
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ ने कहा कि चुनाव के समय अदालत को “राजनीतिक अखाड़ा” नहीं बनाया जाना चाहिए. हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों को ऐसी भाषा या आचरण से बचना चाहिए जो देश के धर्मनिरपेक्ष ताने-बने को नुकसान पहुंचाए.
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