15 साल में हो सकती है मुस्लिम लड़की की शादी? फैसले को चुनौती देने वाली याचिका को SC ने क्यों किया खारिज? – Zee News

Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम शादी की न्यूनतम से जुड़े मसले पर राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की याचिका पर सुनवाई से इनकार किया. NCPCR ने 2022 में  दिए पंजाब हरियाणा हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी जिसमें हाई कोर्ट ने एक 15 साल की मुस्लिम लड़की की शादी को वैध करार दिया था.
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Supreme Court News: ‘सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम लड़की की शादी की न्यूनतम उम्र से जुड़े मसले पर राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की याचिका पर सुनवाई से इनकार किया है. NCPCR ने 2022 में  दिए पंजाब हरियाणा हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी जिसमें हाई कोर्ट ने एक 15 साल की मुस्लिम लड़की की शादी को वैध करार दिया था. हाई कोर्ट ने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ के हिसाब से यौन परिपक्वता ( puberty) की अवस्था में एक लड़की को अपनी मर्जी से शादी का अधिकार है. पंजाब हरियाणा हाई कोर्ट ने शादीशुदा जोड़े को सुरक्षा भी प्रदान करने का निर्देश दिया था. 

HC का क्या था आदेश
पंजाब हरियाणा हाई कोर्ट का आदेश जून 2022 में 21 साल के लड़के और 16 साल की लड़की की याचिका पर आया था. दोनों का कहना था कि 8 जून 2022 को उन्होंने मुस्लिम परंपराओं के हिसाब से शादी कर ली है लेकिन उनके परिवार वाले इस शादी के खिलाफ है. उन्होंने परिजनों से सुरक्षा की मांग के साथ हाई कोर्ट का रुख लिया था.

हाई कोर्ट ने कहा था कि मुस्लिम पर्सनल लॉ के मुताबिक मुस्लिम लड़की या लड़का यौन परिपक्वता की अवस्था में शादी कर सकते है. मुस्लिम कानून के मुताबिक इसकी उम्र 15 साल रखी गई है. ऐसे में इस केस में दोनों की उम्र शादी की उम्र है.हाई कोर्ट ने कहा था कि कोर्ट इस केस में याचिकाकर्ताओं की आशंकाओं से आंखे बंद नहीं कर सकता चूंकि दोनों ने घरवालों की मर्जी के खिलाफ शादी की है, इसलिए उन्होंने सुरक्षा के लिए गुहार लगाई है. कोर्ट ने एसएसपी पठानकोट को उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ज़रूरी कदम उठाने को कहा था.

NCPCR को क्या एतराज है!
राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग(NCPCR) ने पंजाब हरियाणा हाई कोर्ट के  फैसले को सुप्रीम कोर्ट में  चुनौती दी थी. NCPCR ने याचिका दायर कर कहा था कि भारत मे 18 साल तक की उम्र के बच्चों का नाबालिग माना जाता है, वहीं भारत में कानून के मुताबिक पुरुषों के लिए शादी की न्यूनतम उम्र 21 साल, वहीं महिलाओं के लिए शादी की न्यूनतम उम्र 18 साल है. इस लिहाज से प्रोबेशन ऑफ चाइल्ड मैरिज एक्ट और पॉक्सो क़ानून के तहत 18 साल से कम उम्र में लड़की की शादी गैरकानूनी और अपराध है. पॉक्सो एक्ट के तहत 18 साल से कम की उम्र में यौन सम्बन्धों के लिए सहमति नहीं दी जा सकती, लिहाजा इस तरह की शादी गैरकानूनी है, भारत जैसे सेकुलर देश में पर्सनल लॉ के बजाए सेकुलर लॉ को तरजीह दी जानी चाहिए.
SC के सामने सवाल क्या था
पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने  कहा था कि वो उस मामले में शादीशुदा जोड़े को हाई कोर्ट से मिली राहत में कोई दखल देने के बजाए इससे जुड़े बड़े क़ानूनी पहलू ( यानि शादी की न्यूनतम उम्र) पर विचार करेगा. कोर्ट ने इसके साथ ही  यह भी कहा था कि पंजाब हरियाणा हाई कोर्ट का फैसला किसी दूसरे मामले में नज़ीर नहीं बनेगा. सुप्रीम कोर्ट को तय करनाथा कि क्या मुस्लिम पर्सनल लॉ के मुताबिक 15 साल जैसी उम्र की नाबालिग मुस्लिम लड़की को भी शादी की इजाजत दी जा सकती है जबकि देश के सेकुलर क़ानून के मुताबिक ऐसी शादी अपराध है.
आज कोर्ट में क्या हुआ
आज मामला जस्टिस नागरत्ना और जस्टिस आर महादेवन की बेंच के सामने आया. जस्टिस नागरत्ना ने सुनवाई शुरु होते ही NCPCR की याचिका के औचित्य पर सवाल खड़ा किया. जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि  NCPCR का इस मामले से क्या संबंध है? आयोग इस मामले में पक्षकार नहीं था तो उसका अपील दायर करने का क्या औचित्य है जबकि शादी दोनों की मर्ज़ी से हुई थी. अगर हाई कोर्ट आर्टिकल 226 के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए दो नाबालिग बच्चों को हाईकोर्ट संरक्षण देता है, तो NCPCR ऐसे आदेश को कैसे चुनौती दे सकता है?
टीनएजर के प्रेम को भी समझिए
कोर्ट ने कहा कि पॉक्सो एक्ट के तहत नाबालिग से अपराध से निपटने के लिए सख्त प्रावधान है पर कई ऐसे मामले ऐसे भी सकते है जहां किशोर वाकई प्रेम में हो, जो वाकई शादी करना चाहते है. उन्हें अपराध के दायरे में नहीं रखा जा सकता. जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि उस लड़की के दर्द को समझना चाहिए जो किसी लड़के से प्रेम करती हो लेकिन उसके घरवाले  लड़के के खिलाफ पॉक्सो का केस दर्ज कराके उसे जेल भेज देते है. बेंच ने इस मसले में कोई कानूनी सवाल शेष न रहने का हवाला देते हुए सुनवाई से इंकार कर दिया.
 
 
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अरविन्द सिंह ज़ी न्यूज़ में सीनियर जर्नलिस्ट हैं. पत्रकारिता में करीब दो दशक का अनुभव है. वह मुख्यत: सुप्रीम कोर्ट की रिपोर्टिंग करते हैं. इसके अलावा देशभर में कोर्ट से आने वाली बड़ी ख़बरों पर भी उनकी …और पढ़ें
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