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नई दिल्ली, 6 अगस्त 2025 — अमेरिका ने हाल ही में भारत के 85 अरब डॉलर से अधिक के निर्यात पर 50% शुल्क लगा दिया है। इससे भारतीय उद्योग, निर्यातक और छोटे कारोबारी वर्ग (MSME) बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। हज़ारों नौकरियों पर संकट मंडरा रहा है और भारत की आर्थिक रफ़्तार पर सीधा असर पड़ा है।
लेकिन दूसरी तरफ़, भारतीय नागरिकों को अब भी अमेरिकी वीज़ा के लिए ऊँची फ़ीस चुकानी पड़ रही है। यह पैसा सीधे उन विदेशी कंपनियों और निवेशकों के पास जाता है जो अमेरिकी हितों से जुड़े हैं। यानी एक ओर अमेरिका भारतीय माल पर टैक्स लगाकर भारत को नुक़सान पहुँचा रहा है, और दूसरी ओर भारतीय नागरिकों की जेब से पैसा कमा रहा है।
वीज़ा प्रक्रिया बनी महँगी और मुश्किल
भारतीय छात्रों और पेशेवरों के लिए अमेरिका हमेशा पहली पसंद रहा है। लेकिन अब वीज़ा प्रक्रिया न सिर्फ़ सख़्त हुई है बल्कि महँगी भी। अपॉइंटमेंट की तारीख़ पाने के लिए महीनों इंतज़ार करना पड़ता है। कई बार “प्रीमियम सेवाओं” के नाम पर हज़ारों रुपये लिए जाते हैं, लेकिन अपॉइंटमेंट बार-बार कैंसल हो जाते हैं। हैदराबाद के एक छात्र ने बताया कि उसने 20,000 रुपये से ज़्यादा चुकाए, फिर भी समय पर इंटरव्यू नहीं हो पाया।
यही नहीं, वीज़ा आवेदन और बायोमेट्रिक प्रक्रिया को VFS Global जैसी विदेशी कंपनियाँ संभालती हैं, जो अब अमेरिकी निवेशकों के नियंत्रण में हैं। हर दिन हज़ारों भारतीय अपनी उंगलियों के निशान, चेहरे के स्कैन और निजी दस्तावेज़ इन्हें सौंपते हैं। इससे एक तरफ़ तो नागरिकों पर महँगी फ़ीस का बोझ पड़ता है, दूसरी तरफ़ उनकी संवेदनशील जानकारी विदेशी सर्वरों पर पहुँच जाती है। यह न सिर्फ़ आर्थिक बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का भी गंभीर सवाल है।
मुख्य चिंताएँ
जनता की नाराज़गी
सोशल मीडिया पर कई लोग लगातार शिकायत कर रहे हैं। कोई कहता है कि “सेवा तीसरी दुनिया जैसी है, लेकिन पैसे इंटरनेशनल एयरलाइन जैसे लिए जाते हैं।” आम जनता अब पारदर्शिता और डेटा सुरक्षा की मांग कर रही है।
आगे की राह
विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत सरकार को तुरंत कदम उठाने चाहिए:
VFS Global जैसी कंपनियों की ऑडिट हो।
बायोमेट्रिक और निजी डेटा को केवल भारत में ही संग्रहीत किया जाए।
भारत को अपनी घरेलू वीज़ा सेवा व्यवस्था खड़ी करनी चाहिए।
और कूटनीति में यह स्पष्ट संदेश देना होगा कि जब भारत के निर्यात पर टैक्स लगाया जा रहा है, तो भारतीय नागरिकों से वसूले गए पैसे से अमेरिका को लाभ नहीं होना चाहिए।
निष्कर्ष
यह स्थिति केवल व्यापार नहीं, बल्कि आम नागरिकों के अधिकार और सुरक्षा से जुड़ा सवाल है। जब भारत को आर्थिक दंड दिया जा रहा है, तो भारतीय नागरिकों से वीज़ा के नाम पर लगातार कमाई क्यों हो?
अब इस पर जवाबदेही तय करने का समय है।
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