कृपया धैर्य रखें।
मैनपुरी में झलकारी नगर के रामलड़ैते ने घिरोर पुल से नहर में छलांग लगा दी। उनकी पत्नी श्रीदेवी ने उन्हें बचाने के लिए तुरंत छलांग लगा दी हालांकि उन्हें तैरना नहीं आता था। आठ किलोमीटर तक बहने के बाद ग्रामीणों ने उन्हें बचाया लेकिन रामलड़ैते की मृत्यु हो गई। श्रीदेवी के साहस की हर कोई प्रशंसा कर रहा है।
जागरण संवाददाता, फिरोजाबाद। मैनपुरी के गांव जवापुर के ग्रामीण इसे चमत्कार मान रहे हैं। आठ किमी दूर घिरोर पुल से कूदे वृद्ध के साथ बहकर आई उनकी पत्नी सकुशल बच गईं। नहर में कूदे पति को बचाने के लिए उन्होंने अपनी जिंदगी दांव पर लगा दी।
तैरना न आने के बाद भी उनके साथ कूद गईं। इसके बाद मदद की उम्मीद में बहती चलीं आईं। जवापुर पुल के पास कुछ ग्रामीण दिखे तो शोर मचाना शुरू कर दिया। ग्रामीणों ने दोनों को बाहर निकाला लेकिन तब तक वृद्ध की मृत्यु हो चुकी थी।
ये घटना उत्तर क्षेत्र के जलेसर रोड स्थित झलकारी नगर की गली नंबर तीन में रहने वाली 72 वर्ष की श्रीदेवी और उनके 75 वर्ष के पति रामलड़ैते के साथ शुक्रवार सुबह हुई। बेटों और बहू से कहासुनी होने के बाद साढ़े पांच बजे रामलड़ैते थैला लेकर घर से निकले तो श्रीदेवी भी उनके साथ चल दीं। छिबरामई कन्नौज जाने के लिए पहले दोनों रेलवे स्टेशन पहुंचे, लेकिन ट्रेन छूटने के कारण ऑटो से गए।
घिरोर पुल के पास वृद्ध शौच जाने की कहकर ऑटो से उतर गए तो श्रीदेवी काे भी उतरना पड़ा। इसके बाद वृद्ध ने पुल से इटावा ब्रांच नहर में छलांग लगा दी। श्री देवी ने उन्हें हाथ पकड़ कर रोकने का प्रयास किया तो वे भी उनके साथ नहर में गिर गईं। इसके बाद आठ किलोमीटर तक बहती चली गईं, लेकिन उन्होंने पति का हाथ नहीं छोड़ा।
जवापुर पुल के पास उन्हें कुछ लोग दिखाई दिए तो चिल्लाना शुरू किया। इसके बाद ग्रामीणों ने दोनों को बाहर निकाला। तब तक पति की मृत्यु हो चुकी थी, लेकिन श्रीदेवी का साहस हर किसी के लिए चर्चा का विषय बन गया। वृद्ध का शनिवार दोपहर अंतिम संस्कार हो गया। स्थानीय लोग भी पति के प्रति उनके समर्पण और साहस की प्रशंसा करते दिखे।
बुजुर्ग महिला ने बताया कि वे पति के साथ अपने मायके छिबरामऊ, जा रही थीं। इसी बीच पति शौच के बहाने ऑटो से उतरे और नहर में कूद गए। तैरना न आने पर भी उन्होंने बचाने का भरसक प्रयास किया, लेकिन सफल नहीं हो पाईं। ये कहते हुए वह फिर से रोने लगीं। जवापुर के ये विपिन प्रताप सिंह ने बताया कि ये घटना किसी चमत्कार से कम नहीं है। बुजुर्ग दंपती आठ किमी दूर बहकर आए। इस समय नहर में पानी काफी है और बहाव भी तेज है। इसके बाद भी महिला की जान बचना बड़ी बात है।
रामलड़ैते के चार बेटे हैं। चारों मजदूरी करते हैं। सबसे छोटे सीतराम ने बताया कि पापा के कूल्हे में समस्या थी। इसलिए वह बैशाखी के सहारे चलती थी। मां भी बुजुर्ग होने के कारण लाठी के सहारे चलती थीं। बुजुर्ग महिला और उनके बेटों ने अब विवाद की बात होने से मना किया है। उनका कहना है कि कन्नौज सबसे कहकर गए थे।
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