राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने गुरुवार (28 अगस्त, 2025) को कहा कि संघ सरकार को यह नहीं बताएगा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से कैसे निपटा जाए और वह उसके (सरकार के) निर्णय का समर्थन करेगा. उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी मित्रता पर दबाव नहीं होना चाहिए.
उन्होंने तीन दिवसीय व्याख्यान श्रृंखला के दौरान अंतरराष्ट्रीय व्यापार और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से भारत पर लगाए गए शुल्कों के बारे में पूछे गए प्रश्न का उत्तर देते हुए यह टिप्पणी की.
अंतरराष्ट्रीय व्यापार देशों के बीच बनाए रखता है संबंध- भागवत
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा, ‘अंतरराष्ट्रीय व्यापार आवश्यक है और होना ही चाहिए, क्योंकि यह देशों के बीच संबंधों को भी बनाए रखता है. लेकिन यह किसी भी तरह के दबाव में नहीं होना चाहिए; दोस्ती दबाव में नहीं पनप सकती है.’ उन्होंने कहा, ‘दो देशों के बीच दोस्ती का रिश्ता पूरी तरह से मुक्त होना चाहिए और आपसी सहमति पर आधारित होना चाहिए. इसके अलावा, हमारा लक्ष्य आत्मनिर्भर होना चाहिए. साथ ही यह भी समझना चाहिए कि दुनिया परस्पर निर्भरता पर चलती है और उसी के अनुसार कार्य भी करने चाहिए.’
संघ प्रमुख ने कहा, ‘हम सरकार को यह नहीं बताते कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से कैसे निपटना है; उन्हें यह बेहतर तरीके से पता है कि उन्हें आखिर क्या करना है और हम पूरी तरह से उसका समर्थन करेंगे.’
US के अतिरिक्त 25 परसेंट टैरिफ लागू होने के बाद आई भागवत की टिप्पणी
आरएसएस के सरसंघचालक की यह टिप्पणी ट्रंप की ओर से रूसी तेल की खरीद पर भारत पर पहले से लगाए 25 परसेंट टैरिफ के बाद अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ के लागू होने के एक दिन बाद (28 अगस्त, 2025 को) आई है. इस तरह भारत पर अब अमेरिका से कुल 50 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाया गया है.
संघ प्रमुख ने भारतीयों से स्वदेशी वस्तुओं अपनाने की अपील
मोहन भागवत ने व्याख्यान माला के दूसरे दिन बुधवार (27 अगस्त, 2025) को कहा था कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार स्वेच्छा से होना चाहिए, किसी दबाव में आकर नहीं होना चाहिए. इसके अलावा, उन्होंने भारत के सभी नागरिकों से स्वदेशी उत्पादों को अपनाने की अपील की थी.
Source: IOCL
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