हिन्दी साहित्य के हर काल खंड में चंपारण का अवदान है ऐतिहासिक – Dainik Bhaskar

एजुकेशन रिपोर्टर|बेतिया
एमजेके कॉलेज के सेवानिवृत्त प्राचार्य प्रो. सुरेन्द्र केसरी रचित दो पुस्तकें रविवार को लोकार्पित की गईं। शहर के बाबा हरिदास नागा सरस्वती शिशु बालिका विद्या मंदिर सभागार में हुए समारोह में कहानी संग्रह ‘गुनाहों की देवी’ व उनके द्वारा संपादित काव्य-संग्रह ‘चंपारण की रम्य रसा’ का विमोचन किया गया। साहित्यिक-सांस्कृतिक संस्था ‘अनुराग’, बाबा हरिदास नागा सरस्वती शिशु-बालिका विद्या मंदिर व शुभ कंप्यूटर सर्विसेज द्वारा विद्यालय के सभागार में दो सत्रों में समारोह हुआ। उद्घाटन मुख्य अतिथि बीआरए बिहार विवि के हिन्दी विभाग में वरीय प्राध्यापक प्रो. सतीश कुमार राय, प्रो सुरेन्द्र ‘केसरी’, विशिष्ट अतिथि ईश्वर शांति डिग्री कॉलेज झखरा, नौतन के अध्यक्ष ज्ञानेंद्र शरण, विद्यालय समिति अध्यक्ष डॉ पूर्णिमा बाला श्रीवास्तव, प्राचार्य विनीता ओझा व डॉ जगमोहन कुमार ने संयुक्त रुप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। कार्यक्रम के प्रथम सत्र में अतिथियों ने पुस्तकों का लोकार्पण किया। इस अवसर पर बोलते हुए मुख्य अतिथि प्रो राय ने कहा कि । हिन्दी साहित्य के प्रत्येक काल खंड को चंपारण ने बहुत कुछ दिया है। चाहे सिद्ध साहित्य हो या सरभंग संप्रदाय का संत साहित्य अथवा आधुनिक काल, हर काल खंड में चंपारण का अवदान ऐतिहासिक है।
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