प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की सफल बैठक के बाद देश में और दुनिया से अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। बैठक के बाद भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्य सभा बिनाय विश्वोम ने चीन के साथ बेहतर संबंध बनाने की वकालत करते हुए कहा कि जब यही बात मैं और हमारे वामपंथी साथी संसद में उठाते थे, तो भारतीय जनता पार्टी हम पर हमला बोलती थी। उन्होंने कहा कि यह केवल विरोध तक सीमित नहीं था। हमारे सांसदों को यह रुख अपनाने के लिए अपमानित तक किया जाता था।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की केरल इकाई के राज्य सचिव ने चीन और रूस के राष्ट्राध्यक्षों के पीएम मोदी की मुलाकात को लेकर सोशल मीडिया साइट एक्स पर यह बात कही। उन्होंने दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने उन्हें और उनके साथी वामपंथी सांसदों को चीन और रूस का एजेंट बताया था। उन्होंने कहा कि वामपंथी सांसदों को संसद में चीन और रूस के संबंध में दलील देने को लेकर अपमानित किया गया। उन्होंने कहा, “हमारा एकमात्र अपराध शांति और वार्ता की अपील करना था।”
विश्वोम ने आरोप लगाया कि पूरी वामपंथी पार्टियों को केवल चीन के साथ शांति और संवाद की वकालत करने के लिए निशाना बनाया गया था। उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि केंद्र की सत्ता धारी पार्टी ने भारत देश के प्रति उनके (वामपंथी सांसदों) के समर्पण की अनदेखी की, जबकि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर अधिक विश्वास जताया।
विश्वोम ने लिखा, “उम्मीद है कि आपको वे मौके याद होंगे जब भाजपा ने संसद में मुझ पर और वामपंथी सांसदों पर हमला किया था। हमारा अपराध सिर्फ इतना था कि हमने भारत-चीन संबंधों में ‘सकारात्मक प्रगति’ की वकालत की थी। आपके साथियों ने हमें चीन और रूस का एजेंट तक कह दिया! आपने हमारे भारत के प्रति समर्पण को भुला दिया। आप यह मानकर चल रहे थे कि डोनाल्ड ट्रंप हमारा उद्धार करेंगे।”
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