भारत के पूरब में करीब 5 हजार किमी दूर एक देश है साउथ कोरिया, जहां BTS जैसा वर्ल्ड फेमस बैंड और सैमसंग जैसी कंपनियां हैं। 3 दिसंबर 2024 की रात 10 बजकर 23 मिनट पर वहां के राष्ट्रपति यून सुक-सोल ने अचानक देश में मार्शल लॉ यानी इमरजेंसी लगा दी।
लोग सड़कों पर आ गए। आनन-फानन में इसके खिलाफ संसद में प्रस्ताव पारित हुआ और 6 घंटे में ही इसे निरस्त करना पड़ा। दांव उल्टा पड़ने पर राष्ट्रपति ने लोगों से माफी मांगी, लेकिन डैमेज हो चुका था। 10 दिनों के भीतर नेशनल असेंबली में महाभियोग प्रस्ताव लाकर इमरजेंसी लगाने वाले राष्ट्रपति की कुर्सी छीन ली गई है।
यून सुक-सोल ने बैठे बिठाए मुसीबत क्यों मोल ली, क्या उनके पास अभी भी मौका है और अगर भारत में ऐसी सिचुएशन बनी तो क्या होगा; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में…
सवाल 1: राष्ट्रपति यून सुक-सोल के खिलाफ महाभियोग क्यों लाया गया? जवाब: साउथ कोरिया के राष्ट्रपति को महाभियोग के जरिए हटाने के पीछे 2 बड़ी वजहें हैं…
1. उन्होंने देश में मार्शल लॉ लगाया। इसका ऐलान करते हुए यून ने कहा था कि ‘विपक्ष नॉर्थ कोरिया के साथ सहानुभूति रखता है और देश विरोधी गतिविधियों में शामिल है। इससे देश को बचाने के लिए वे मार्शल लॉ लगाने की घोषणा कर रहे हैं।’
2. 2022 में राष्ट्रपति का चुनाव जीतने के बाद यून ने तानाशाही शुरू कर दी। राष्ट्रपति रहते हुए उनका नाम कई घोटालों में सामने आया।
मतदान के बाद विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता पार्क चान-डे ने कहा, ‘आज का महाभियोग लोगों की महान जीत है।’
सवाल 2: राष्ट्रपति यून ने मार्शल लॉ क्यों लगाया था? जवाब: इसके लिए पहले साउथ कोरिया के पॉलिटिकल सिस्टम को समझते हैं। वहां राष्ट्रपति सरकार का प्रमुख होता है। 5 साल के लिए सीधे जनता अपना राष्ट्रपति चुनती है। नेशनल असेंबली के लिए अलग से हर 4 साल में चुनाव होते हैं।
2022 में यून मामूली अंतर से जीतकर राष्ट्रपति बने। 2024 में नेशनल असेंबली के चुनाव में सत्ताधारी पीपुल पावर को सिर्फ 108 सीटें मिलीं, जबकि विपक्षी पार्टी DPK को 170 सीटें मिलीं। असेंबली में हार के बाद यून अपने मनचाहे कानून पारित कर नहीं पाए। मॉर्शल लॉ लगाने के पीछे 2 बड़ी वजहें थीं…
इसके अलावा सितंबर 2022 में किम को कोरियन अमेरिकन पादरी ने 2 लाख रुपए का डि’ओर कम्पनी का लग्जरी बैग तोहफे में दिया। इसका वीडियो वायरल हो गया और जनता में आक्रोश फैल गया। लोगों का कहना था कि किम फर्स्ट लेडी हैं, इसलिए उन्हें इतना महंगा तोहफा नहीं लेना चाहिए था।
सवाल 3: साउथ कोरिया में राष्ट्रपति को हटाने की प्रक्रिया क्या है? जवाब: महाभियोग का इस्तेमाल किसी पद पर बैठे व्यक्ति को उस पद से हटाने के लिए किया जाता है। साउथ कोरिया के संविधान के अनुच्छेद 77 के तहत महाभियोग लाया जाता है। महाभियोग पारित होने के बाद व्यक्ति को उस पद की सभी शक्तियों और जिम्मेदारियों से हटा दिया जाता है। साउथ कोरिया में महाभियोग की प्रक्रिया को पॉइंट्स में समझिए…
सवाल 4: अब साउथ कोरिया में सरकार कौन चलाएगा? जवाब: राष्ट्रपति यून के बाद प्रधानमंत्री हान डक-सू कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कामकाज संभालेंगे। हान 2007 में पहली बार साउथ कोरिया के राष्ट्रपति बने थे। 2022 में राष्ट्रपति यून की जीत के बाद हान को फिर से प्रधानमंत्री बनाया गया। साउथ कोरिया के संविधान में कार्यवाहक राष्ट्रपति के अधिकारों को साफ तौर पर नहीं बताया गया है, लेकिन वे नया राष्ट्रपति चुनने तक इस पद पर काबिज रहेंगे।
कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में हान के सामने कई चुनौतियां हैं। इसमें सबसे बड़ी चुनौती देश की जनता के बीच भरोसा वापस लाना है। राष्ट्रपति यून की छवि का असर हान पर भी पड़ सकता है। उन्हें देश में आर्थिक स्थितियों को सुधारने, नॉर्थ कोरिया से निपटने और सरकार को बनाए रखना होगा।
सवाल 5: क्या राष्ट्रपति यून देश छोड़कर भाग सकते हैं? जवाब: अमेरिकी न्यूज एजेंसी एबीसी न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, यून के खिलाफ सत्ता का दुरुपयोग करने और मार्शल लॉ लगाने की जांच चल रही है। इस वजह से जांच एजेंसियां उन पर नजरें बनाए हुई हैं। ऐसे में यून का देश छोड़कर भागना मुश्किल है।
9 दिसंबर को साउथ कोरिया के न्याय मंत्रालय ने राष्ट्रपति यून के देश छोड़ने पर बैन लगा दिया था। जिससे वो लीगल तरीके से देश छोड़कर नहीं भाग सकते हैं।
सवाल 6: क्या राष्ट्रपति यून कोर्ट से महाभियोग को खारिज करवा सकते हैं? जवाब: यून के खिलाफ अगले 6 महीने यानी जून 2025 तक संवैधानिक कोर्ट में ट्रायल चलेगा। आमतौर पर इन मामलों में 9 सदस्यीय बेंच सुनवाई करती है, लेकिन अक्टूबर 2024 में 3 जजों ने इस्तीफा दे दिया था। जिसके बाद अब बेंच में 6 जज बचे हैं। जून 2025 तक अगर तीनों जजों की भर्तियां नहीं होती तो यून के मामले में 6 सदस्यीय बेंच को सुनवाई करनी होगी।
6 सदस्यों में से किसी एक ने भी यून के पक्ष में फैसला दिया तो वे दोबारा राष्ट्रपति बन सकते हैं। वहीं, अगर बेंच ने यून को दोषी करार दे दिया तो 60 दिनों के अंदर नया राष्ट्रपति चुनाव कराया जाएगा।
सवाल 7: साउथ कोरिया का मार्शल लॉ भारत के राष्ट्रपति शासन से कितना अलग है? जवाब: कोरिया का मार्शल लॉ भारत के इमरजेंसी कानून से मिलता-जुलता है। हालांकि भारत में आपातकाल लागू होने पर सिर्फ राष्ट्रपति का ही शासन होता है। यहां सेना का शासन नहीं होता।
वहीं, कोरियन मार्शल लॉ में सेना का शासन होता है और राष्ट्रपति को सेना प्रमुख कहा जाता है। इस दौरान सिविल कोर्ट निलंबित हो जाता है। साथ ही जब तक मार्शल लॉ लगा रहता है तब तक मौलिक अधिकार भी निलंबित रहते हैं।
साउथ कोरिया में मार्शल लॉ
भारत में इमरजेंसी भारत के संविधान में तीन तरह की आपात स्थितियों में ये कानून लागू करने का प्रावधान है-
सवाल-8: भारत में कभी ऐसी सिचुएशन बनी तो क्या होगा?
जवाबः भारत में इमरजेंसी घोषित करने का अधिकार राष्ट्रपति के पास होता है, लेकिन केन्द्रीय मंत्रिमंडल के लिखित सुझाव पर। भारत में सिर्फ एक बार 1975 में इमरजेंसी लगाई गई। उस वक्त देश में इंदिरा गांधी की सरकार थी। तब लिखित स्वीकृति का प्रावधान नहीं था। 21 महीने की इमरजेंसी के बाद हुए चुनाव में जनता पार्टी जीती तो 44वें संविधान संशोधन में ये प्रावधान जोड़ा गया।
इमरजेंसी घोषित होने के बाद इसे संसद के दोनों सदनों में पास करवाना भी जरूरी है। अगर आपातकाल के प्रस्ताव को किसी भी सदन में बहुमत नहीं मिल पाता तो घोषित आपातकाल अपने आप निरस्त हो जाएगा। भारत में इमरजेंसी लगाने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती दी जा सकती है।
सवाल 9: क्या राष्ट्रपति यून के हटने से साउथ कोरिया और भारत के रिश्तों पर क्या असर पड़ेगा? जवाब: जेएनयू के रिटायर्ड प्रोफेसर और फॉरेन एक्सपर्ट ए के पाशा के मुताबिक, राष्ट्रपति यून के जाने से भारत और साउथ कोरिया के रिश्तों पर कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा। JNU के प्रोफेसर स्वर्ण सिंह एक इंटरव्यू में कहते हैं,
भारत और साउथ कोरिया के बीच 27-28 बिलियन डॉलर का ट्रेड होता है। साउथ कोरिया भारत का बड़ा इन्वेस्टर है। इसका भारत के कंज्यूमर प्रोडक्ट और मार्केट में बड़ा इम्पैक्ट है। इसके चलते भारत सरकार साउथ कोरिया में हो रहे राजनीतिक बदलाव पर नजर बनाए रखेगी। साउथ कोरिया में अगले 6 से 8 महीनों में नए राष्ट्रपति का चुनाव होना है।
सवाल 10: क्या पहले भी साउथ कोरिया के राष्ट्रपति के खिलाफ महाभियोग लाया गया था? जवाब: साउथ कोरिया में इससे पहले 3 बार महाभियोग लाया गया। इसमें एक बार राष्ट्रपति को पद से हटा दिया गया और एक बार कोर्ट ने राष्ट्रपति को बहाल कर दिया था।
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रिसर्च सहयोग- आयुष अग्रवाल
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