Jamia News: मेंटेनेंस या आंदोलन का डर? जामिया प्रशासन ने क्यों किया कैंपस को बंद, 2019 से क्या है लिंक – Zee News Hindi

Jamia News: जामिया के स्टूडेंट्स हर साल 15 दिसंबर को प्रतिरोध दिवस मनाते हैं. क्योंकि 15 दिसंबर 2019 को जामिया के स्टूडेंट्स पर पुलिस ने बर्बरता की थी, लेकिन जामिया प्रशासन ने ऐसा फैसला लिया है. जिसको लेकर जामिया के छात्रों में काफी गुस्सा है.
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Jamia News: देश और दुनिया में मशहूर यूनिवर्सिटी जामिया मिल्लिया इस्लामिया के स्टूडेंट्स 15 दिसंबर 2019 से हर साल 15 दिसंबर को प्रतिरोध दिवस मनाते हैं. क्योंकि 15 दिसंबर 2019 को जामिया के स्टूडेंट्स पर पुलिस ने बर्बरता की थी. आज जामिया के छात्रों पर पुलिस की बर्बरता को 5 साल हो गए हैं.

हर साल की तरह इस साल भी छात्र इस दिन जामिया परिसर में प्रतिरोध दिवस निकालना चाहते हैं, लेकिन इस बीच यूनिवर्सिटी प्रशासन ने ऐसा आदेश जारी कर दिया है जिसके चलते छात्र जामिया के मुख्य परिसर में प्रतिरोध दिवस नहीं मना पाएंगे. जामिया प्रशासन के इस फैसले पर छात्रों ने नाराजगी जाहिर की है. साथ ही यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स ने जामिया प्रशासन पर कई गंभीर इल्जाम भी लगाए हैं. 

जामिया कैंपस क्यों रहेगा बंद?
जामिया प्रशासन ने एक नोटिफिकेशन जारी किया है. जिसमें लिखा है कि जामिया प्रशासन ने निर्देश दिया है कि मुख्य परिसर के गेट नंबर 7 के भीतर मौजूद सभी कैंटीन नियमित रखरखाव और मरम्मत के उद्देश्य से 15 दिसंबर 2024 को दोपहर 1 बजे से बंद रहेंगी. इससे पहले भी जामिया प्रशासन ने एक और नोटिफिकेशन जारी किया था. जिसमें मरम्मत के उद्देश्य से आज दोपहर 1 बजे से सभी लाइब्रेरी को बंद करने का आदेश जारी किया गया था.

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जामिया प्रशासन के फैसले से छात्रों में आक्रोश
जामिया के इस फैसले से छात्र काफी गुस्सा है. छात्र जामिया कैंपस में पुलिस द्वारा की गई बर्बरता के खिलाफ रैली निकालना चाहते हैं. जामिया के पूर्व छात्र अकील हुसैन ने कहा कि आज जामिया मिल्लिया इस्लामिया को मेंटेनेंस के नाम पर बंद करना वाइस चांसलर के डर को दर्शाता है. 15 दिसंबर 2019 का दिन जामिया के इतिहास में दर्ज़ हैं. जामिया एडमिन चाहता है कि छात्र आज से पांच साल पहले जामिया में हुई स्टेट द्वारा प्रायोजित हिंसा को भूल जाएं. 

क्या जामिया कैंपस बन गया था युद्ध का मैदान
उन्होंने आगे कहा कि जामिया एएमयू के छात्रों के जहन में 15 दिसंबर 2019 का दिन आज भी कैद है. इस दिन को याद रखना ज़रूरी है ताकि आगे आने वाली नस्लों को बताया जा सकें कि किस तरह से सरकारी मशीनरी ने अपने सत्ता के अहंकार के दम पर बेकसूर बच्चों को रौंदा था. कॉपी कलम को टियर गैस, बंदूक की गोलियां, जूतों के बूटों की धमक, लाठी डंडों से रौंदा गया था. एक माइनोरिटी संस्थान को युद्ध का मैदान बनाया गया था. यह दिन न तो एएमयू भूला है और न ही जामिया और न ही सरकार को भूलने देंगे.
छात्र ने जामिया प्रशासन से पूछा सवाल
वहीं, एक और छात्र जीशान खान का कहना है कि जामिया प्रशासन ने ऐसे में समय में फरमान जारी किया है, जब छात्र अपनी परीक्षा दे रहे हैं. ऐसा कौन सा रखरखाव कार्य था जो 15 दिसंबर को पूरी लाइब्रेरी बंद करनी पड़ी? प्रशासन नहीं चाहता कि छात्र इस दिन कैंपस में आएं और उस काले दिन के खिलाफ अपनी आवाज उठाएं जब दिल्ली पुलिस ने लाइब्रेरी में पढ़ रहे निर्दोष छात्रों पर बेरहमी से लाठीचार्ज किया था. यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि परीक्षाओं के दौरान भी लाइब्रेरी बंद की जा रही है ताकि छात्र कैंपस में न आ सकें.
क्या है पूरा मामला
गौरतलब है कि 2019 में केंद्र सरकार द्वारा पारित नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और NRC के खिलाफ पूरे देश में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे. यह विरोध प्रदर्शन जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्रों द्वारा शुरू किया गया था, जिसके कारण शाहीन बाग आंदोलन उभरा और पूरे देश में शाहीन बाग बनने लगे.
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लाइब्रेरी में लाठीचार्ज
इसी कड़ी में 15 दिसंबर 2019 को जामिया के छात्रों द्वारा नियमित प्रदर्शन चल रहा था, तभी दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन को खत्म करने के लिए छात्रों पर लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले भी दागे, जिससे अफरा-तफरी मच गई. मामला तब और गंभीर हो गया जब पुलिस ने कैंपस में घुसकर लाइब्रेरी में पढ़ रहे छात्रों पर लाठीचार्ज कर दिया. इस कार्रवाई में सैकड़ों छात्र घायल हुए और कई गंभीर रूप से घायल हुए. हर साल जामिया के छात्र इस दिन दिल्ली पुलिस द्वारा छात्रों पर की गई बर्बरता की याद में विरोध प्रदर्शन करते हैं.
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