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किसी भी देश की नीति और नेता ही उस मुल्क का भविष्य तय करते हैं, लेकिन दोनों ही हर बदलते 24 घंटे के साथ बदलने लग जाएं तो फिर देश गहरी खाई में चला जाता है. शायद अमेरिका के साथ भी ऐसा ही हो रहा है. डोनाल्ड ट्रंप का हर कदम और हर फैसले उनसे ज्यादा, अमेरिका के लिए घातक साबित हो रहे हैं. कभी भारत जैसे स्ट्रेजिक पार्टनर पर ट्रेरिफ बम फोडना, कभी कड़े प्रतिबंध लगाने की धमकी देना तो कभी भारत की दोस्ती को खो देने की बात करना अब ट्रंप प्रशासन को ही भारी पड़ रहा है और शायद इसी वजह से ट्रंप को देर से ही सही ये समझ आने भी लगा है.
राष्ट्रपति ट्रंप और पीएम मोदी के बीच टैरिफ के बाद संबंधों में तनाव खत्म होता दिख रहा है. पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पीएम मोदी की तारीफ की, उन्हें अपना दोस्त और महान नेता बताया. जिसका जवाब देते हुए पीएम मोदी ने कहा कि वो राष्ट्रपति ट्रंप की भावनाओं की तहे दिल से सराहना करते हैं और उनका पूर्ण समर्थन करते हैं. इससे पहले ट्रंप ने ये भी कहा था कि ऐसा लगता है कि हमने भारत और रूस को चीन के हाथों खो दिया है, लेकिन अब अमेरिकी राष्ट्रपति का बदला रुख दोनों देशों के रिश्तों में मजबूती का संकेत दे रहा है.
विश्व राजनीति में गिले-शिकवे हो सकते हैं, लेकिन दोस्ती की डोर कमजोर नहीं पड़ सकती. तभी तो भारत को डेड इकनॉमी बताने वाले ट्रंप के सुर बदल गए हैं और शायद उन्हें भारत को खोने का डर भी सताने लगा है. विश्व पटल पर भारत का बढ़ता कद ही है, जो ट्रंप को एहसास दिला रहा है कि मोदी की दोस्ती कितनी जरूरी है. अब जब दोस्त अपनी दोस्ती का हवाला दे रहा है, तो भला पीएम मोदी भी कैसे देर करते. पीएम मोदी ने ट्रंप की भारत-अमेरिका संबंधों पर सकारात्मक टिप्पणियों की सराहना की और कहा कि वो ट्रंप की भावनाओं का सम्मान करते हैं और भारत और अमेरिका के बीच का रिश्ता सकारात्मक है.
अगर जनवरी से पहले की बात करें तो भारत और खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्रंप का सपोर्ट किया था. उम्मीद थी कि ट्रंप की जीत के बाद भारत के लिए अमेरिका से रिश्ते और मजबूत होंगे, लेकिन 20 जनवरी 2025 को राष्ट्रपति पद संभालने के फौरन बाद ट्रंप ने भारत के खिलाफ टैरिफ वॉर का ऐलान कर दिया और शुरू में भारत पर 25 फीसदी टैरिफ भी लगा दिया.
इतने के बाद भी ट्रंप का मन नहीं भरा तो रूस का साथ देने का आरोप लगाते हुए 27 अगस्त से 25 फीसदी टैरिफ और लगा दिया. यह किसी भी देश पर लगे टैरिफ से कहीं ज्यादा है. हालांकि भारत ने इस पर कोई कड़ी प्रतिक्रिया नहीं दी. भारत को पता है कि दोस्ती में अनबन हो सकती है लेकिन दरार नहीं पड़ सकती. अब जिस तरीके से ट्रंप के सुर बदले हैं, उससे कयास जरूर लगाया जा सकता है कि आने वाले दिनों में भारत-US के बीच जमी बर्फ पिघलने लगेगी. आर्थिक मोर्चे पर अटकी बातचीत आगे बढ़ेगी.
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