अमेरिका-चीन की लड़ाई में फायदा उठा ले गए ये देश, जानें क्या इस लिस्ट में है भारत का नाम – ABP न्यूज़

US China Trade War Latest News: अमेरिका और चीन के बीच व्यापार युद्ध ने बेशक वैश्विक व्यापार को प्रभावित किया है, लेकिन कुछ देशों ने इस अवसर का लाभ भी उठाया है. आर्थिक थिंक टैंक GTRI की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस संघर्ष से मैक्सिको, कनाडा और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के संघ ASEAN को भारत से कहीं अधिक फायदा हुआ है. हालांकि, भारत भी इस दौरान लाभान्वित हुआ है, लेकिन उसे अपनी व्यापारिक रणनीतियों को और बेहतर बनाने की आवश्यकता है.
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका-चीन के बीच ट्रेड वॉर के बावजूद भारत के निर्यात में 36.8 अरब डॉलर का इजाफा हुआ है, जिसमें प्रमुख क्षेत्रों के रूप में इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्युटिकल्स और इंजीनियरिंग सामान शामिल हैं. हालांकि, इस लिस्ट में भारत छठे स्थान पर है, जबकि अमेरिका को मैक्सिको, कनाडा, वियतनाम, दक्षिण कोरिया और जर्मनी से अधिक लाभ हुआ.
भारत का निर्यात बढ़ाने वाले प्रमुख क्षेत्र
भारत के निर्यात में वृद्धि का प्रमुख कारण स्मार्टफोन, दूरसंचार उपकरण, दवाइयां, पेट्रोलियम तेल और सोलर पैनल के उत्पादन में वृद्धि है. स्मार्टफोन और दूरसंचार उपकरण से 6.2 अरब डॉलर की वृद्धि हुई, जो कुल वृद्धि का 17.2 प्रतिशत है. इसके अलावा, दवाइयों से 4.5 अरब डॉलर (12.4 प्रतिशत), पेट्रोलियम तेल से 2.5 अरब डॉलर (6.8 प्रतिशत) और सोलर पैनल से 1.9 अरब डॉलर (5.3 प्रतिशत) का योगदान रहा.
GTRI ने सुझाव दिया कि भारत को निर्यात में स्थानीय मूल्यवृद्धि बढ़ानी चाहिए, क्योंकि कई उत्पादों में चीन से आयातित सामग्रियां शामिल होती हैं. मिसाल के लिए स्मार्टफोन के अधिकांश पुर्जे आयातित होते हैं, सोलर पैनल के लिए सोलर सेल्स ज्यादातर चीन से आते हैं, और दवाइयों के लिए APIs का 70 प्रतिशत हिस्सा भी चीन से आयात होता है.
अमेरिका और भारत के रिश्ते के लिए एक नई दिशा
अर्थशास्त्रिक थिंक टैंक ने यह भी कहा कि डोनाल्ड ट्रंप के फिर से अमेरिका के राष्ट्रपति बनने से भारतीय उद्योग के लिए नए अवसर आ सकते हैं, क्योंकि वे मैक्सिको, कनाडा, चीन और अन्य देशों पर नए शुल्क लगाने की योजना बना रहे हैं.
भारत को यह समझने की आवश्यकता है कि अमेरिका के साथ व्यापार युद्ध की स्थिति में रणनीतिक बदलाव के माध्यम से लाभ हासिल किया जा सकता है. अमेरिकी बाजार में भारतीय निर्यात की बढ़ती मांग को देखते हुए, भारत को आयात शुल्क में मामूली बदलाव करके औसत शुल्क को लगभग 10 प्रतिशत तक लाने की जरूरत हो सकती है, जिससे राजस्व पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा.
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