Tamilnadu Govt on Waqf Amendment Act: तमिलनाडु सरकार ने विवादित वक्फ अमेंडमेंट एक्ट 2025 को लागू करने से इनकार किया और सुप्रीम कोर्ट के आखिरी फैसले तक इस पर रोक जारी रखने का ऐलान किया. AIMPLB ने इस फैसले को संवैधानिक और साहसी बताते हुए सराहा की और दूसरे राज्यों से भी सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले तक इंतजार करने की अपील की.
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Tamilnadu News Today: बीते अप्रैल में केंद्र सरकार ने विवादित वक्फ अमेंडमेंट एक्ट 2025 पारित कर मुस्लिम समुदाय के सामने उहापोह की स्थिति पैदा कर दी. इसको लेकर कई सियासी दल और मुस्लिम संगठनों ने देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था का दरवाजा खटखटाया. सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद वक्फ कानून पर रोक लगा दिया. कई राज्यों ने इस कानून को लागू करने से इंकार कर दिया.
तमिलनाडु भी उन राज्यों में शामिल है, जिसने वक्फ अमेंडमेंट एक्टर को लागू करने से इंकार कर दिया. सरकार की तरफ से रोक का यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले तक लागू रहेगा. सरकार के फैसले को समय पर और साहसी फैसला बताते हुए ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने स्वागत किया है.
शनिवार को जारी किए गए इस फैसले की मुस्लिम समुदाय के नेताओं और कानूनी विशेषज्ञों ने तारीफ की. उनका कहना है कि यह संवैधानिक समझदारी और धर्मनिरपेक्ष दृष्टिकोण को दर्शाता है. AIMPLB के प्रवक्ता डॉ. एसक्यूआर इलियास ने कहा कि तमिलनाडु सरकार ने जो कदम उठाया है, उससे वक्फ प्रशासन का काम बिना रुकावट चलता रहेगा. यानि जब तक सुप्रीम कोर्ट यह साफ नहीं कर देता कि नया संशोधित कानून सही है या गलत, तब तक कोई कानूनी उलझन या अस्थिरता नहीं होगी.
AIMPLB के प्रवक्ता डॉ. एस.क्यू.आर. इलियास ने कहा कि वे तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन और राज्य सरकार के फैसले की सराहना करते हैं. उनका कहना है कि यह कदम न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करता है और वक्फ बोर्ड जैसी संवेदनशील संस्था को जल्दबाजी में बदलने से बचाता है.
तमिलनाडु के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री एस.एम. नासर ने भी बताया कि राज्य सरकार ने मौजूदा वक्फ बोर्ड को जारी रखने का फैसला किया है. इतना ही नहीं राज्य सरकार ने विवादित वक्फ (संशोधन) एक्ट 2025 को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती भी दी है. उनका कहना है कि अंतिम फैसला आने तक नया बोर्ड लागू नहीं किया जाएगा. इससे यह साफ होता है कि राज्य सरकार अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों और कानूनी स्थिरता दोनों को महत्व देती है.
AIMPLB ने अपनी विज्ञप्ति में अन्य राज्यों से भी अपील की है कि जब तक सुप्रीम कोर्ट यह तय नहीं करता कि संशोधन सही है या गलत, तब तक सावधानी से कदम उठाए जाएं. बोर्ड का मानना है कि ऐसा करने से लोकतंत्र मजबूत होगा, भारत का धर्मनिरपेक्ष और बहुलतावादी ढांचा सुरक्षित रहेगा और धार्मिक दान-संपत्ति के प्रबंधन में किसी तरह का भ्रम नहीं होगा.
डॉ. इलियास ने मुख्यमंत्री स्टालिन को बधाई देते हुए कहा कि यह फैसला राजनीतिक साहस और मुस्लिम समुदाय की चिंता के प्रति संवेदनशीलता दिखाता है. इससे समुदाय को भरोसा मिलता है कि उनकी धार्मिक और दान-संपत्तियां संविधान और कानून के दायरे में सुरक्षित रहेंगी.
रैहान शाहिद का ताल्लुक उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर ज़िले से हैं. वह पिछले पांच सालों से दिल्ली में सक्रिय रूप से पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्यरत हैं. Zee न्यूज़ से पहले उन्होंने ABP न्यूज़ और दू…और पढ़ें
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