इंडिया को टेंशन क्यों? अमेरिकी एयरफोर्स में C-17 और C-5 की जगह NGAL का कब्जा – Zee News

Next-Generation Airlift (NGAL) Aircraft: अमेरिका अपनी पुरानी C-17 और C-5 कार्गो विमानों की जगह एक नया Next-Generation Airlift (NGAL) विमान लाएगा, जिससे इसके इस्तेमाल की लागत कम होगी और एडवांस मिशनों के लिए क्षमता बढ़ेगी.  
अमेरिकी एयरफोर्स बदल रहा विमान व्यवस्था
भारत को C-17 विकल्प चुनौतीपूर्ण
Next-Generation Airlift (NGAL) Aircraft: अमेरिका ने हाल ही में अपनी पुरानी भारी कार्गो विमान व्यवस्था को बदलने की योजना की घोषणा की है. अमेरिकी एयर फोर्स C-17 ग्लोबमास्टर III और C-5 गैलेक्सी विमानों की जगह एक नई नेक्स्ट-जेनरेशन एयरलिफ्ट (NGAL) प्लेटफॉर्म से लेने जा रही है. यह नया विमान दोनों पुरानी फ्लाइट्स की जगह लेगा और 2040 के आस-पास इस्तेमाल में लिया जा सकता है. यह कदम अमेरिका के लिए सुविधाजनक है, लेकिन इंडियन एयरफोर्स जैसी अंतरराष्ट्रीय एयरलिफ्ट ऑपरेटरों के लिए चुनौती बन सकता है, क्योंकि भारत दुनिया में C-17 का दूसरा सबसे बड़ा यूजर है.
NGAL के विकास पर है ध्यान
इंडियन एयरफोर्स के पास 11 C-17 हैं, जो 2011 से 2019 के बीच हासिल किए गए थे. ये विमान मानवता सहायता मिशनों, सैनिकों की तुरंत किसी और जगह तैनाती और सीमाओं पर लॉजिस्टिक सपोर्ट के लिए अहम माने जाते रहे हैं. भारत पहले और C-17 की अतिरिक्त यूनिट खरीदने में रुचि दिखा चुका था, लेकिन अमेरिका ने अब C-17 उत्पादन फिर से शुरू करने की कोई योजना नहीं बताई है और अमेरिका का पूरा ध्यान NGAL विकास पर है.
क्या रहेगी NGAL की खासियत?
NGAL विमान की खासियतों में अधिक गति, बेहतर एगिलिटी और लंबी दूरी से सुरक्षा वाले मिशन में सक्षम होना शामिल है. इस विमान में हाइपरसोनिक मिसाइलों और एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम से सुरक्षा के लिए मजबूत ऑप्शन होंगे. साथ ही यह जमीन पर जल्दी रिफ्यूलिंग कर सकेगा, जिससे विमान जल्दी मिशन पर लौट सके.
भारत के पास नहीं है ऑप्शन
इंडियन एयर फोर्स के लिए यह बड़ा झटका है क्योंकि C-17 ग्लोबमास्टर ने वर्षों तक उनके उच्च ऊंचाई वाले ऑपरेशन्स और आपदा राहत कार्यों में बहुत जरूरी निभाई है. भारत के पास अभी कोई घरेलू भारी-भरकम विमान ऑप्शन नहीं है, MTA (मल्टी-रोल ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट) जैसे प्रोजेक्ट भी अभी शुरुआती चरण में हैं.
विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत को 2030 के दशक में अमेरिका से इस्तेमाल किए गए C-17 खरीदने या Airbus A400M और Embraer KC-390 जैसे ऑप्शनों पर विचार करना पड़ सकता है. लेकिन IAF की जरूरतें और ऊंचाई पर ऑपरेशन क्षमता इसे आसान ऑप्शन नहीं बनाती.
अमेरिका का NGAL प्रोजेक्ट उसके पुराने C-5M और C-17 फ्लीट की उम्र बढ़ने के चलते जरूरी हो गया है. नया एकल विमान प्लेटफॉर्म परिचालन लागत को करीब 20% तक कम करने में मदद करेगा. भारत सहित अंतरराष्ट्रीय साझेदार इस पर नजर रखेंगे, और भविष्य में निर्यात वेरिएंट भी उपलब्ध हो सकते हैं.
 
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