टाटा मोटर्स ने सितंबर 2025 में जबरदस्त प्रदर्शन किया है. कंपनी की कुल बिक्री 94,681 यूनिट रही, जो पिछले साल के 69,694 यूनिट के मुकाबले 36% ज्यादा है. खास बात यह रही कि यह आंकड़ा मार्केट अनुमान (80,600 यूनिट) से भी कहीं ज्यादा रहा. कंपनी की कमर्शियल व्हीकल (CV) बिक्री 19% बढ़ी, जबकि इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV) में 96% उछाल और पैसेंजर व्हीकल्स (PV) बिक्री 47% बढ़ी.
सितंबर 2025 में टाटा मोटर्स ने एक बार फिर अपनी बिक्री के आंकड़ों से बाजार को चौंका दिया. कंपनी ने कुल 94,681 यूनिट्स बेचे, जो पिछले साल की 69,694 यूनिट्स से 36% अधिक हैं. यह आंकड़ा स्ट्रीट अनुमान (80,600 यूनिट्स) से भी काफी ऊपर रहा.
कमर्शियल व्हीकल्स (CV)
टाटा मोटर्स की रीढ़ माने जाने वाले CV सेगमेंट ने सितंबर में ठोस प्रदर्शन किया.
कुल CV बिक्री: 35,862 यूनिट्स (YoY 19% वृद्धि)
घरेलू CV बिक्री: 33,148 यूनिट्स (YoY 16% वृद्धि)
यह वृद्धि इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स सेक्टर की मजबूत मांग को दर्शाती है.
पैसेंजर व्हीकल्स (PV)
कंपनी की पैसेंजर व्हीकल बिक्री ने भी जोरदार छलांग लगाई.
कुल PV बिक्री: 60,907 यूनिट्स (YoY 47% वृद्धि)
SUV सेगमेंट और नए लॉन्च मॉडल्स ने इस ग्रोथ को बल दिया.
इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV) – सबसे बड़ा आकर्षण
टाटा मोटर्स का EV पोर्टफोलियो लगातार मजबूत हो रहा है और सितंबर के आंकड़े इसका सबूत हैं.
कुल EV बिक्री: 9,191 यूनिट्स (YoY 96% वृद्धि)
EV बिक्री में यह उछाल कंपनी को भविष्य की ग्रोथ स्टोरी में मजबूती देता है.
मार्केट सेंटिमेंट
टाटा मोटर्स का यह शानदार प्रदर्शन निवेशकों और बाजार दोनों के लिए पॉजिटिव सिग्नल है. जहां CV और PV बिक्री ग्रोथ को सपोर्ट कर रही है, वहीं EV सेगमेंट कंपनी के लिए लंबी अवधि का गेम-चेंजर साबित हो सकता है.
नतीजा
कुल बिक्री: 94,681 यूनिट्स
YoY वृद्धि: 36%
अनुमान (80,600 यूनिट्स) से कहीं ज्यादा
EV और PV सेगमेंट सबसे मजबूत ड्राइवर
गोल्ड मार्केट में आज इतिहास बन गया. अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत $3895 प्रति औंस के नए ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गई. लगातार बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं, अमेरिकी डॉलर की मजबूती में कमी और सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग ने सोने को नई उड़ान दी है. निवेशकों के लिए यह साफ संकेत है कि गोल्ड अब सिर्फ गहनों या परंपरागत निवेश तक सीमित नहीं, बल्कि वैश्विक बाजार की हलचल का असली सेंटीमीटर बन चुका है.
सोने ने बुधवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक नया कीर्तिमान बना दिया. कीमत $3895 प्रति औंस तक पहुंच गई, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है.
क्यों बढ़ रहा है सोना?
सोने की चमक बढ़ने की कई वजहें हैं
वैश्विक अनिश्चितताएं – अमेरिकी चुनावी साल, चीन-अमेरिका व्यापार तनाव और भू-राजनीतिक संकटों ने निवेशकों को सुरक्षित ठिकाने की तलाश में सोने की ओर धकेला है.
डॉलर की कमजोरी – डॉलर इंडेक्स में नरमी आने से सोना और ज्यादा आकर्षक बना है.
बॉन्ड यील्ड्स में गिरावट – सरकारी बॉन्ड यील्ड्स नीचे आने से निवेशकों ने वैकल्पिक रूप से सोने को चुना.
केंद्रीय बैंकों की खरीदारी – कई देशों के सेंट्रल बैंक रिज़र्व बढ़ाने के लिए सोना खरीद रहे हैं.
निवेशकों के लिए क्या मतलब?
सोने की इस बढ़त का मतलब यह है कि गोल्ड एक सुरक्षित एसेट क्लास के रूप में और मजबूत हुआ है. जहां शेयर और बॉन्ड मार्केट में उतार-चढ़ाव जारी है, वहीं गोल्ड निवेशकों को स्थिरता का अहसास दे रहा है.
शॉर्ट टर्म में गोल्ड की कीमतों में हलचल बनी रह सकती है.लॉन्ग टर्म निवेशक सोने को अपने पोर्टफोलियो में 10-15% हिस्सेदारी के तौर पर देख सकते हैं.भारत जैसे देशों में जहां त्योहार और शादी का सीजन आ रहा है, सोने की डिमांड घरेलू कीमतों को और ऊपर धकेल सकती है.
भारतीय निवेशकों पर असर
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गोल्ड कंज्यूमर है. अंतरराष्ट्रीय कीमतें बढ़ने का असर सीधे घरेलू बाजार पर पड़ेगा. उम्मीद है कि भारत में सोना ₹70,000 प्रति 10 ग्राम के पार जा सकता है.
आगे की राह
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर भू-राजनीतिक तनाव और ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें बनी रहीं, तो सोना आने वाले महीनों में $4000 प्रति औंस का आंकड़ा भी छू सकता है.
बुधवार, 1 अक्टूबर 2025 को Kirloskar Brothers के शेयरों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली. कंपनी ने ऐलान किया कि उसे Indian Oil Corporation Limited (IOCL) से 14,000 से ज्यादा पंप सेट सप्लाई करने का बड़ा ऑर्डर मिला है. इस खबर के बाद निवेशकों ने शेयर पर दांव लगाया और कीमत करीब 5% उछलकर ₹2,026 तक पहुंच गई. मार्केट एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यह ऑर्डर कंपनी की आमदनी और ऑयल-गैस सेक्टर में मौजूदगी को और मजबूत करेगा.
बुधवार को Kirloskar Brothers के शेयरों ने बाजार का ध्यान खींचा. कंपनी का शेयर इंट्रा-डे में 4.87% बढ़कर ₹2,026 तक पहुंचा, जबकि 2:15 बजे यह 3.55% की बढ़त के साथ ₹2,000.45 पर ट्रेड कर रहा था. उसी समय BSE सेंसेक्स भी 0.73% ऊपर 80,855 के स्तर पर था.
क्यों आई तेजी
तेजी की मुख्य वजह कंपनी का नया ऑर्डर है. Kirloskar Brothers ने एक्सचेंज फाइलिंग में बताया कि उसे Indian Oil Corporation Limited (IOCL) से 14,000 से ज्यादा पंप सेट सप्लाई करने का कॉन्ट्रैक्ट मिला है. यह ऑर्डर रिटेल मार्केट में ऑयल और गैस सेक्टर की जरूरतों को पूरा करने के लिए दिया गया है.
कॉन्ट्रैक्ट की डिटेल
कंपनी के मुताबिक-ऑर्डर की डिलीवरी 12 महीनों में पूरी होगी.कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों के तहत 100% पेमेंट डिलीवरी पर किया जाएगा.यह सौदा कंपनी के लिए आमदनी और ऑयल-गैस सेक्टर में पैठ बढ़ाने का अवसर देगा.
कंपनी का बिज़नेस मॉडल
Kirloskar Brothers, Kirloskar Group की फ्लैगशिप कंपनी है, जिसकी स्थापना 1888 में हुई थी. यह कंपनी पंप और फ्लुइड मैनेजमेंट सॉल्यूशंस में ग्लोबल लीडर मानी जाती है. भारत में सबसे पहला हल, सेंट्रीफ्यूगल पंप, डीजल इंजन और इलेक्ट्रिक मोटर इसी कंपनी ने बनाया था.
आज Kirloskar Brothers का बिजनेस इन क्षेत्रों तक फैला है:
वॉटर सप्लाई और इरिगेशन
पावर और ऑयल-गैस सेक्टर
मरीन और डिफेंस
हाइड्रो टर्बाइन और बिल्डिंग सर्विसेज
कंपनी की मौजूदगी 15 से ज्यादा देशों में है और यह बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के साथ-साथ घरेलू जरूरतों को भी पूरा करती है.
निवेशकों के लिए संकेत
IOCL का यह बड़ा ऑर्डर कंपनी की ऑयल-गैस सेक्टर में पकड़ को मजबूत करेगा और निकट भविष्य में राजस्व वृद्धि का रास्ता खोलेगा. यही कारण है कि खबर सामने आते ही शेयर में खरीदारी तेज हो गई.
सितंबर 2025 में सरकार को GST से अच्छी खबर मिली है. पिछले महीने की तुलना में वसूली में इजाफा हुआ और कुल GST कलेक्शन ₹1.89 लाख करोड़ पर पहुंच गया. अगस्त में यह आंकड़ा ₹1.86 लाख करोड़ था. यानी महज एक महीने में करीब ₹3,000 करोड़ की अतिरिक्त कमाई सरकार के खजाने में गई है. लगातार बढ़ता कलेक्शन इस बात का संकेत है कि आर्थिक गतिविधियां मजबूत हो रही हैं और टैक्स कंप्लायंस भी सुधर रहा है.
सितंबर 2025 में गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) कलेक्शन ₹1.89 लाख करोड़ तक पहुंच गया. यह अगस्त 2025 की तुलना में अधिक है, जब कुल वसूली ₹1.86 लाख करोड़ थी. इस तरह महीने-दर-महीने आधार पर करीब ₹3,000 करोड़ की अतिरिक्त कमाई दर्ज की गई है.
क्यों अहम है ये आंकड़ा?
GST कलेक्शन किसी भी देश की आर्थिक गतिविधियों का सीधा पैमाना होता है. जब कारोबार और खपत बढ़ती है तो टैक्स वसूली अपने आप ऊपर जाती है. सितंबर के आंकड़े साफ इशारा कर रहे हैं कि फेस्टिव सीजन से पहले बाजारों में खरीदारी बढ़ रही है और बिजनेस सेंटिमेंट भी बेहतर हुआ है.
अगस्त की तुलना में सुधार
अगस्त में वसूली ₹1.86 लाख करोड़ रही थी, जो जुलाई की तुलना में थोड़ी नरम थी. लेकिन सितंबर में दोबारा तेजी आई और यह आंकड़ा ₹1.89 लाख करोड़ तक पहुंच गया. सरकार के लिए यह अच्छा संकेत है क्योंकि लगातार बढ़ता टैक्स कलेक्शन आर्थिक मजबूती और बेहतर टैक्स कंप्लायंस की ओर इशारा करता है.
सरकार और रिज़र्व बैंक की नजर
यह आंकड़ा ऐसे समय आया है जब भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने पॉलिसी रेट 5.5% पर स्थिर रखी है और ग्रोथ अनुमान 6.8% तक बढ़ाया है. मजबूत GST कलेक्शन सरकार की आमदनी को सपोर्ट देगा और उसे फिस्कल डेफिसिट मैनेज करने में मदद करेगा.
आने वाले महीनों का असर
अक्टूबर-नवंबर में नवरात्र, दशहरा, दिवाली और शादी का सीजन रहेगा. परंपरागत रूप से इन महीनों में खपत और कारोबार काफी बढ़ जाते हैं. उम्मीद है कि अगले महीनों में GST कलेक्शन ₹1.90-2 लाख करोड़ की रेंज को पार कर सकता है.
उद्योग जगत की प्रतिक्रिया
इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि GST वसूली में निरंतर मजबूती भारत की अर्थव्यवस्था में डिमांड रिकवरी और टैक्स सिस्टम में सुधार का नतीजा है. इसके साथ ही सरकार द्वारा किए गए डिजिटल मॉनिटरिंग उपाय और ई-इनवॉइसिंग जैसी व्यवस्था ने टैक्स चोरी की गुंजाइश कम की है.
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने मौद्रिक नीति में रेपो रेट को 5.5% पर स्थिर रखा और रुख ‘न्यूट्रल’ बनाए रखा है. महंगाई में नरमी और घरेलू मांग के सहारे RBI ने FY26 की ग्रोथ अनुमान बढ़ाकर 6.8% कर दिया है. इस फैसले के बाद मार्केट में जोरदार तेजी आई और बैंकिंग-ऑटो-रियल्टी जैसे रेट-सेंसिटिव सेक्टरों में हलचल बढ़ी. एक्सपर्ट्स ने 10 ऐसे स्टॉक्स चुने हैं, जिनमें अगले कुछ हफ्तों में तगड़ा मुनाफा देखने को मिल सकता है.
भारतीय रिज़र्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने सर्वसम्मति से रेपो रेट को 5.5% पर यथावत रखने का फैसला किया है. पॉलिसी स्टांस भी ‘न्यूट्रल’ रखा गया है. RBI ने साफ किया कि हाल के टैक्स कट और GST रिफॉर्म के असर को देखने के बाद ही अगला कदम तय किया जाएगा.
RBI का ग्रोथ-अंदाज
FY26 की ग्रोथ अनुमान RBI ने बढ़ाकर 6.8% कर दिया है, जबकि महंगाई का अनुमान घटाकर 2.6% कर दिया गया. RBI का मानना है कि महंगाई अब कंट्रोल में है और पॉलिसी स्पेस ग्रोथ को सपोर्ट करने के लिए खुला है. हालांकि, ट्रेड और ग्लोबल अनिश्चितताओं के चलते अगले साल की तिमाही दर तिमाही ग्रोथ थोड़ी कमजोर रह सकती है.
मार्केट का मूड
पॉलिसी के बाद बैंक निफ्टी 1% से ज्यादा चढ़कर 55,251 पर पहुंचा, जबकि सेंसेक्स 524 अंक चढ़कर 80,791 और निफ्टी 156 अंक उछलकर 24,767 पर बंद हुआ. लगातार तीन दिन से बैंकिंग और फाइनेंस शेयरों में जबरदस्त खरीदारी देखी जा रही है.
एक्सपर्ट्स की राय
Right Horizons PMS के फाउंडर अनिल रेगो का कहना है कि महंगाई का अनुमान घटने से RBI के पास दरों में कटौती की गुंजाइश बढ़ी है. हालांकि, रेट कट की उम्मीद 2025 के अंत या 2026 से पहले नहीं दिख रही. वहीं, Wright Research PMS की सोनम श्रीवास्तव के मुताबिक, पॉलिसी स्टेबिलिटी से मार्केट को भरोसा मिलेगा और रेट-सेंसिटिव सेक्टरों में तेजी बनी रह सकती है.
ये हैं 10 दमदार स्टॉक्स
Moneycontrol की रिपोर्ट के मुताबिक, टेक्निकल एनालिस्ट्स और मार्केट एक्सपर्ट्स ने 10 रेट-सेंसिटिव स्टॉक्स शॉर्ट-टर्म ट्रेडिंग के लिए सुझाए हैं:
बैंक ऑफ बड़ौदा – टारगेट ₹271-285, स्टॉपलॉस ₹249
बैंक ऑफ इंडिया – टारगेट ₹136, स्टॉपलॉस ₹119
DLF – टारगेट ₹750, स्टॉपलॉस ₹699
केनरा बैंक – टारगेट ₹134, स्टॉपलॉस ₹118
चोलामंडलम इंवेस्टमेंट – टारगेट ₹1,788, स्टॉपलॉस ₹1,530
बजाज फाइनेंस – टारगेट ₹1,100, स्टॉपलॉस ₹950
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) – टारगेट ₹950, स्टॉपलॉस ₹840
श्रीराम फाइनेंस – टारगेट ₹715, स्टॉपलॉस ₹600
एक्सिस बैंक – टारगेट ₹1,240, स्टॉपलॉस ₹1,100
HDFC बैंक – टारगेट ₹1,000-1,020, स्टॉपलॉस ₹930
निवेशकों के लिए संकेत
इनमें से ज्यादातर स्टॉक्स बैंकिंग और फाइनेंस सेक्टर से जुड़े हैं, जिन्हें RBI पॉलिसी का सीधा फायदा मिल सकता है. वहीं, रियल्टी और ऑटो सेक्टर भी रेट कट की संभावनाओं से सपोर्ट पा सकते हैं.
यूरोपीय शेयर बाजारों ने बुधवार को हल्की बढ़त के साथ कारोबार की शुरुआत की. शुरुआती सौदों में पैन-यूरोपीय Stoxx 600 इंडेक्स 0.1% चढ़ा, हालांकि सेक्टर्स और प्रमुख एक्सचेंजों का रुख मिला-जुला रहा. निवेशकों की नजर अमेरिकी सरकार के शटडाउन पर टिकी है, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि इसका यूरोपीय बाजारों पर गहरा असर नहीं होगा. Aberdeen के एक अर्थशास्त्री ने कहा कि मार्केट्स संभवतः शटडाउन के शॉर्ट-टर्म असर को नज़रअंदाज़ कर देंगे.
यूरोपीय बाजारों की धीमी शुरुआत
बुधवार सुबह यूरोपीय बाजारों ने हल्की तेजी दर्ज की. पैन-यूरोपीय Stoxx 600 इंडेक्स 0.1% ऊपर रहा. शुरुआती कारोबार में सेक्टर और प्रमुख एक्सचेंजों का प्रदर्शन अलग-अलग रहा—कुछ सेक्टर्स ग्रीन में तो कुछ रेड में थे. यह संकेत है कि निवेशकों का मूड सतर्क है.
US Government Shutdown पर नजर
वैश्विक निवेशक फिलहाल अमेरिकी सरकार के शटडाउन पर फोकस कर रहे हैं. शटडाउन की वजह से फेडरल फंडिंग और सरकारी कामकाज रुकने का खतरा मंडरा रहा है. वॉशिंगटन में राजनीतिक गतिरोध ने अनिश्चितता बढ़ा दी है.
Aberdeen का कहना: बाजार पर बड़ा असर नहीं
Aberdeen के एक अर्थशास्त्री ने कहा कि अमेरिकी शटडाउन का असर यूरोपीय बाजारों पर गहरा नहीं होगा. उनका मानना है कि यह एक शॉर्ट-टर्म इवेंट होगा और निवेशक जल्द ही अन्य आर्थिक संकेतकों और कंपनियों के नतीजों पर ध्यान केंद्रित कर लेंगे.
निवेशकों का रुख
यूरोपीय निवेशक सतर्कता के साथ पोजिशन ले रहे हैं. हालिया अमेरिकी आर्थिक डेटा मजबूत रहा है, लेकिन शटडाउन को लेकर पॉलिटिकल अनिश्चितता ने जोखिम लेने की भूख को सीमित कर दिया है. इसके चलते यूरोपीय बाजारों में भारी उतार-चढ़ाव की संभावना बनी हुई है.
सेक्टर्स का प्रदर्शन
Stoxx 600 इंडेक्स में शामिल अलग-अलग सेक्टर्स का प्रदर्शन अलग रहा. टेक्नोलॉजी और हेल्थकेयर में हल्की तेजी दिखी, जबकि एनर्जी और फाइनेंशियल्स में प्रेशर देखा गया. यह बताता है कि निवेशक डिफेंसिव स्टॉक्स को तरजीह दे रहे हैं.
एशियाई बाजारों से मिले मिश्रित संकेतों और अमेरिकी फ्यूचर्स में हल्की गिरावट का भी असर यूरोपीय सेंटिमेंट पर पड़ा. इसके बावजूद यूरोपीय इंडेक्सेज शुरुआती बढ़त बनाए रखने में कामयाब रहे.
आगे की राह
विश्लेषकों का कहना है कि निकट भविष्य में यूरोपीय बाजार अमेरिकी शटडाउन की खबरों से ज्यादा प्रभावित नहीं होंगे. आने वाले दिनों में ECB की मौद्रिक नीति, महंगाई के आंकड़े और कॉरपोरेट अर्निंग्स सीजन पर निवेशकों की नजर रहेगी.
Hyundai Motor India (HMIL) का शेयर बुधवार को 3% टूटकर ₹2,508 पर आ गया. कंपनी ने सितंबर 2025 में 70,347 यूनिट की बिक्री के साथ 10% सालाना ग्रोथ दर्ज की थी, फिर भी पिछले दो दिनों में स्टॉक 5% गिरा और 22 सितंबर के रिकॉर्ड हाई ₹2,889.65 से 13% नीचे आ चुका है. हालांकि, पिछले छह महीनों में HMIL ने बाजार से बेहतर प्रदर्शन किया है और लगभग 50% चढ़ा है, जबकि सेंसेक्स सिर्फ 6.3% और BSE Auto इंडेक्स 25% बढ़ा है.
शेयर प्राइस में दबाव
Hyundai Motor India का शेयर बुधवार को 3% टूटकर ₹2,508 पर आ गया. हाल के दो दिनों में यह 5% गिरा है और 22 सितंबर को बने रिकॉर्ड हाई ₹2,889.65 से अब तक 13% नीचे है. हालांकि, लॉन्ग-टर्म परफॉर्मेंस देखें तो पिछले छह महीनों में शेयर 50% चढ़ा है, जो सेंसेक्स और BSE Auto इंडेक्स से काफी बेहतर है.
सितंबर में दमदार बिक्री
कंपनी ने सितंबर 2025 में 70,347 यूनिट बेचे, जो सालाना आधार पर 10% ज्यादा है. इसमें घरेलू बिक्री 51,547 यूनिट रही और एक्सपोर्ट 18,800 यूनिट. अगस्त की तुलना में भी कंपनी का प्रदर्शन बेहतर रहा, जब 60,501 यूनिट बिके थे.
Hyundai का कहना है कि सितंबर में SUV सेल्स का इतिहास का सबसे ऊंचा स्तर छुआ. SUV सेल्स पेनिट्रेशन 72.4% रहा, जिसमें Creta ने 18,861 यूनिट की रिकॉर्ड बिक्री की. वहीं Venue ने भी 20 महीने का रिकॉर्ड तोड़ा और 11,484 यूनिट्स बिकीं.
ब्रोकरेज हाउस का नजरियासरकार ने कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी (CAFE3) नॉर्म्स FY28 से लागू करने की घोषणा की है, जिसमें CO2 एमिशन टारगेट घटाकर 88.4gm/km किया गया है. HSBC के अनुसार, अगर सरकार मौजूदा MIDC से WLTP साइकिल में शिफ्ट करती है तो कंपनियों को मुश्किलें आएंगी.
M&M और Hyundai इस मामले में डिसएडवांटेज में माने जा रहे हैं क्योंकि उनका पोर्टफोलियो वजन, माइलेज और पावरट्रेन मिक्स अपेक्षाकृत चुनौतीपूर्ण है. FY29 से हर साल 2-3% इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) एक्सपोजर बढ़ाना अनिवार्य होगा, जो Hyundai के लिए चुनौती साबित हो सकता है.
InCred Equities का मानना है कि GST कट से कॉम्पैक्ट कार सेगमेंट में वॉल्यूम ग्रोथ पर फोकस बढ़ेगा, जहां Hyundai की हिस्सेदारी सीमित है.
वैल्यूएशन प्रेशर
तेजी से भागे स्टॉक ने Hyundai Motor India के फॉरवर्ड P/E वैल्यूएशन को Maruti Suzuki से 26% ऊपर पहुंचा दिया है. ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि यह लेवल लंबे समय तक टिकना मुश्किल होगा.
InCred ने HMIL का टारगेट प्राइस ₹1,612 से बढ़ाकर ₹2,023 किया है, लेकिन REDUCE रेटिंग बनाए रखी है.
फर्म ने कहा कि HMIL का वैल्यूएशन Maruti से 20% डिस्काउंट पर रहना चाहिए.
आगे की राह
विशेषज्ञों के मुताबिक Hyundai Motor India के लिए मार्केट शेयर प्रेशर और CAFE नॉर्म्स सबसे बड़ी चुनौती होंगे. हालांकि, नए प्रोडक्ट लॉन्च की सफलता कंपनी के लिए अपसाइड रिस्क हो सकती है.
Netweb Technologies के शेयरों ने बुधवार को नया रिकॉर्ड हाई बना दिया. भारी वॉल्यूम्स पर स्टॉक 14% उछलकर ₹4,146.55 तक पहुंच गया. कंपनी का शेयर पिछले छह हफ्तों में 102% चढ़ चुका है, यानी इसने निवेशकों का पैसा दोगुना कर दिया. सिर्फ दो हफ्तों में ही इसमें 42% की तेजी आई है. अप्रैल 2025 के 52-सप्ताह के निचले स्तर ₹1,278.85 से अब तक यह शेयर 224% ऊपर चढ़ चुका है, जिससे निवेशकों को शानदार मल्टीबैगर रिटर्न मिला है.
भारी वॉल्यूम्स पर नया हाई
Netweb Technologies का शेयर बुधवार को तेज़ी के साथ नई ऊंचाई पर पहुंचा. BSE पर यह 14% उछलकर ₹4,146.55 तक गया, जो इसका अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है. मार्केट में जबरदस्त वॉल्यूम्स देखने को मिले, जिसने तेजी को और मजबूती दी.
6 हफ्तों में 102% की रैली
20 अगस्त 2025 को यह शेयर ₹2,047.70 पर था, जो अब 102% उछलकर ₹4,100 के पार निकल चुका है. यानी केवल छह हफ्तों में निवेशकों का पैसा दोगुना हो गया. यह स्मॉलकैप आईटी-एनेबल्ड सर्विसेज कंपनी निवेशकों की नई पसंद बनती दिख रही है.
दो हफ्तों में 42% की तेजी
पिछले 14 ट्रेडिंग सेशंस में Netweb के शेयरों ने 42% का उछाल दर्ज किया है. लगातार खरीदारी से स्टॉक में मजबूती आई है और हर डिप पर निवेशकों ने इसे उठाया है.
52-सप्ताह के लो से 224% ऊपर
7 अप्रैल 2025 को Netweb Technologies ₹1,278.85 पर था, जो इसका 52-सप्ताह का निचला स्तर था. वहां से अब तक शेयर 224% चढ़ चुका है. इस दौरान कंपनी का मार्केट कैप भी तेजी से बढ़ा है और निवेशकों की वेल्थ में भारी इजाफा हुआ है.
तेजी की वजह क्या है?
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, क्लाउड सर्विसेज और AI-आधारित डिमांड की वजह से आईटी-एनेबल्ड कंपनियों पर निवेशकों का भरोसा बढ़ा है. साथ ही, छोटे और चुस्त टेक प्लेयर्स को निवेशक ग्रोथ के बड़े मौके के तौर पर देख रहे हैं.
भारी वॉल्यूम्स का असर
बुधवार की रैली में भारी वॉल्यूम्स देखने को मिले, जिससे स्टॉक में और तेजी आई. ट्रेडर्स का मानना है कि जब तक वॉल्यूम सपोर्ट करते हैं, स्टॉक शॉर्ट-टर्म में नए हाई बना सकता है.
निवेशकों के लिए संकेत
हालांकि, ब्रोकरेज हाउस निवेशकों को सावधानी बरतने की सलाह भी दे रहे हैं. लगातार चढ़ान के बाद स्टॉक में मुनाफावसूली का दबाव आ सकता है. लेकिन लॉन्ग-टर्म निवेशक इसे ग्रोथ स्टोरी के रूप में देख सकते हैं.
डिजिटल पेमेंट्स सेक्टर के लिए राहतभरी खबर आई है. RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने साफ किया है कि UPI पेमेंट्स पर किसी भी तरह का चार्ज लगाने का कोई प्रस्ताव नहीं है. यह बयान खासतौर पर Paytm, PhonePe और Google Pay जैसी कंपनियों के लिए पॉजिटिव माना जा रहा है. निवेशकों को डर था कि चार्ज लगने से UPI ट्रांजैक्शन वॉल्यूम पर असर पड़ेगा, लेकिन RBI ने इन आशंकाओं को खारिज कर दिया है.
RBI का ऐलान – UPI पेमेंट्स पर कोई चार्ज लगाने का प्रस्ताव नहीं.
गवर्नर का बयान – “UPI पूरी तरह फ्री रहेगा, चार्ज का सवाल नहीं.”
कंपनियों के लिए पॉजिटिव – Paytm, PhonePe, Google Pay जैसी फिनटेक कंपनियों को राहत.
निवेशकों की चिंता दूर – चार्ज लगने से ट्रांजैक्शन वॉल्यूम घटने की आशंका अब खत्म.
UPI का भविष्य – गवर्नर बोले, डिजिटल पेमेंट्स ग्रोथ को बढ़ावा देना हमारी प्राथमिकता है.
सितंबर 2025 ऑटो सेल्स डेटा में कंपनियों ने दमदार प्रदर्शन किया है. महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M) और Bajaj Auto ने अनुमान से ज्यादा बिक्री दर्ज की, जबकि Hyundai Motor ने Creta और Venue की रिकॉर्ड बिक्री से सुर्खियां बटोरीं. ट्रैक्टर सेगमेंट में M&M और Escorts Kubota ने 45-50% की जोरदार बढ़त दिखाई. वहीं VST Tillers की बिक्री 34% बढ़ी. हालांकि SML Isuzu और Atul Auto को झटका लगा, जहां घरेलू बिक्री में गिरावट देखने को मिली.
M&M: ट्रैक्टरों में धमाका, ऑटो में मजबूती
सितंबर में Mahindra & Mahindra (M&M) ने कुल 1 लाख यूनिट्स बेचे, जो अनुमानित 92,000 से काफी अधिक रहे. घरेलू ऑटो सेल्स 10% बढ़कर 56,233 यूनिट रहीं, जबकि 3-व्हीलर सेगमेंट 30% चढ़कर 13,017 यूनिट पर पहुंचा. सबसे बड़ा सरप्राइज ट्रैक्टर बिजनेस रहा, जहां 66,111 यूनिट्स बिके, यानी सालाना आधार पर 49% की उछाल. ट्रैक्टर सेल्स अनुमानित 49,800 से कहीं ऊपर रही. एक्सपोर्ट भी 43% बढ़कर 4,320 यूनिट्स रहे.
Bajaj Auto: अनुमान से आगे
Bajaj Auto ने सितंबर में 5.10 लाख यूनिट्स की बिक्री की, जबकि अनुमान 5 लाख का था. यह साल-दर-साल 9% की वृद्धि है. घरेलू बिक्री 4% बढ़कर 3.25 लाख यूनिट और एक्सपोर्ट 18% बढ़कर 1.85 लाख यूनिट रहे. दोपहिया बिक्री 8% बढ़कर 4.3 लाख यूनिट और कमर्शियल व्हीकल सेल्स 15% बढ़कर 79,651 यूनिट तक पहुंचीं.
Hyundai Motor: Creta और Venue की रिकॉर्ड बिक्री
Hyundai Motor की सितंबर सेल्स 10% बढ़कर 70,347 यूनिट्स रहीं (अनुमान 69,000). इसमें 43.5% की बढ़त के साथ 18,800 यूनिट्स का एक्सपोर्ट शामिल है. Creta की बिक्री ने इतिहास रच दिया—सितंबर में रिकॉर्ड 18,861 यूनिट्स Creta बिकीं. Venue ने भी पिछले 20 महीनों का रिकॉर्ड तोड़ते हुए 11,484 यूनिट्स की बिक्री की. कंपनी ने इसे GST 2.0 रेट कट का असर बताया.
Escorts Kubota: ट्रैक्टरों में धमाकेदार उछाल
Escorts Kubota ने सितंबर में 47.6% उछाल के साथ 18,267 ट्रैक्टर बेचे. घरेलू बिक्री 48.5% बढ़कर 17,803 यूनिट्स रही, जबकि एक्सपोर्ट 17.5% बढ़कर 464 यूनिट पर पहुंचा.
VST Tillers: मजबूत ग्रोथ
VST Tillers की कुल बिक्री 34.7% चढ़कर 3,480 यूनिट पर रही. पावर टिलर्स की बिक्री 42.3% बढ़कर 3,002 यूनिट्स हुईं, जबकि ट्रैक्टर बिक्री मामूली 1% बढ़कर 478 यूनिट्स रही.
SML Isuzu और Atul Auto को झटका
SML Isuzu की सितंबर बिक्री 10% घटकर 950 यूनिट पर आ गई. पैसेंजर व्हीकल्स की बिक्री 580 यूनिट और कार्गो व्हीकल्स 370 यूनिट पर रही, दोनों में 9-10% गिरावट. Atul Auto की कुल बिक्री 4.22% बढ़कर 3,503 यूनिट रही, लेकिन घरेलू सेल्स 2.97% गिरकर 2,971 यूनिट पर सिमट गईं.
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के रेपो रेट को 5.5% पर स्थिर रखने और बैंकिंग लेंडिंग नियमों में बड़े बदलावों की घोषणा के बाद बाजार में जोरदार तेजी लौटी. बैंक निफ्टी 1 अक्टूबर को 700 अंक चढ़कर 55,350 तक पहुंच गया और 55,000 का अहम स्तर पार किया. तेजी की अगुवाई Kotak Mahindra Bank, ICICI Bank और HDFC Bank ने की. वहीं, RBI के कदम से इंफ्रा लोन पर दबाव घटने की उम्मीद से NBFC शेयरों HUDCO, IREDA, PFC और REC में 3-5% की तेजी दर्ज की गई.
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की अक्टूबर मौद्रिक नीति ने बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर को नई ऊर्जा दी है. बुधवार को बैंक निफ्टी ने 55,000 का मनोवैज्ञानिक स्तर पार कर लिया और 700 अंक यानी 1.3% की तेजी के साथ 55,350 तक पहुंच गया.
बैंकिंग शेयरों में जोश
तेजी की अगुवाई Kotak Mahindra Bank, ICICI Bank और HDFC Bank जैसे दिग्गज शेयरों ने की, जो इंट्राडे में 3% तक चढ़े. Nifty Private Bank इंडेक्स 1.75% उछला, जबकि PSU बैंक शेयरों में मुनाफावसूली देखी गई और इंडेक्स 1.1% गिरा.
RBI का बड़ा पैकेज
RBI ने रेपो रेट को लगातार दूसरी बार 5.5% पर स्थिर रखा और न्यूट्रल स्टांस बनाए रखा. गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि मौजूदा हालात भविष्य में ग्रोथ को सपोर्ट करने के लिए पॉलिसी स्पेस देते हैं.
सेंट्रल बैंक ने कई बड़े ऐलान किए—
कैपिटल मार्केट लेंडिंग का विस्तार – अब बैंक भारतीय कंपनियों के अधिग्रहण को फाइनेंस कर सकेंगे.
लार्ज कॉरपोरेट्स को राहत – 2016 का वह नियम हटाया जाएगा, जिसने बड़े उधारकर्ताओं के लिए बैंकिंग लोन को सीमित किया था.
लेंडिंग पर नई आज़ादी – बैंकों को उधारकर्ताओं के खाते खोलने और चलाने में अधिक लचीलापन मिलेगा.
IPO फाइनेंसिंग की लिमिट बढ़ाई – प्रति निवेशक लिमिट 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 25 लाख रुपये कर दी गई.
शेयर और डेट सिक्योरिटीज पर लोन – अब बैंकों को बिना किसी सीमा के लोन देने की छूट.
NBFCs और इंफ्रा सेक्टर को बूस्ट
RBI ने गैर-बैंकिंग वित्त कंपनियों (NBFCs) को राहत देते हुए उच्च गुणवत्ता वाले ऑपरेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर दिए जाने वाले लोन पर जोखिम भार (risk weights) घटाने की घोषणा की. इससे NBFCs की फंडिंग लागत घटेगी और सड़क-पुल जैसे प्रोजेक्ट्स को तेजी से गति मिलेगी. इसका असर शेयर बाजार पर भी दिखा. HUDCO, IREDA, PFC और REC के शेयर 3-5% उछले.
एक्सपर्ट की राय
Kotak AMC के एमडी निलेश शाह ने कहा, “RBI का यह कदम 9,000 से ज्यादा कंप्लायंसेज को सरल बनाना, बैंकों को कैपिटल मार्केट एक्सपोजर में बराबरी देना और अधिग्रहण फाइनेंसिंग की छूट, सरकार की इकोनॉमी को प्रोत्साहित करने की नीति के अनुरूप है.”
RBI की घोषणाओं से बैंकिंग सेक्टर को नई ताकत मिली है. जहां बैंकिंग और प्राइवेट बैंक शेयरों में तेजी रही, वहीं NBFC स्टॉक्स को इंफ्रा लोन पर राहत का बड़ा फायदा मिला. बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम आने वाले महीनों में क्रेडिट ग्रोथ और आर्थिक गतिविधियों को मजबूती देंगे.
फार्मा सेक्टर बुधवार को स्टॉक मार्केट का स्टार साबित हुआ. अमेरिकी कंपनी Pfizer के टैरिफ राहत के बदले चुनिंदा दवाओं की कीमत घटाने के समझौते की खबर के बाद भारतीय फार्मा शेयरों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली. NSE पर Pfizer का शेयर 8% उछलकर ₹5,442 तक पहुंच गया. इसके अलावा लुपिन, सन फार्मा, बायोकॉन और पिरामल फार्मा जैसे दिग्गज स्टॉक्स में भी खरीदारी बढ़ी, जिससे पूरे सेक्टर में पॉजिटिव सेंटीमेंट दिखा.
Pfizer डील का असर – US एडमिनिस्ट्रेशन के साथ डील के बाद NSE पर Pfizer 8% चढ़ा.
टॉप गेनर – Pfizer ₹5,442 तक पहुंचा, दिन का सबसे बड़ा उछाल.
अन्य फार्मा शेयर – लुपिन, सन फार्मा, एरिस लाइफ, लॉरस लैब्स, पिरामल फार्मा, बायोकॉन, ग्रेन्यूल्स और सुवेन लाइफ 2–4% तक चढ़े.
सेक्टरल रिएक्शन – पूरे फार्मा इंडेक्स में मजबूती, निवेशकों का भरोसा बढ़ा.
बाजार मैसेज – टैरिफ रिलीफ और प्राइस-कट डील से भारतीय फार्मा कंपनियों को ग्लोबल मार्केट में फायदा मिल सकता है.
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