एजुकेशन रिपोर्टर|बेतिया
गांधी व लाल बहादुर शास्त्री जयंती पर एमजेके कॉलेज बेतिया व जमुनी लाल कॉलेज हाजीपुर के संयुक्त तत्वावधान में एक वेब संगोष्ठी आयोजित की गई। वर्तमान वैश्विक परिप्रेक्ष्य में महात्मा गांधी के स्वदेशी आंदोलन की प्रासंगिकता विषय पर आयोजित इस संगोष्ठी की शुरुआत कार्यक्रम संयोजक व जेएल कॉलेज के भूगोल विभाग के सहायक प्रोफेसर नेहाल अहमद के अतिथि परिचय तथा इतिहास विभाग की प्राध्यापिका डॉ श्वेता के स्वागत भाषण से हुई। संगोष्ठी में बीज वक्तव्य डॉ रजनीश कुमार ने प्रस्तुत किया। संगोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि सह वक्ता ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय दरभंगा के राजनीति विज्ञान के पूर्व अध्यक्ष प्रो जीतेन्द्र नारायण ने कहा कि प्राचीन भारतीय संस्कृति व परम्परा अत्यंत सुदृढ़ और सम्पन्न जीवन पद्धति से ओतप्रोत थी। गांधी जी ने इसे अपने स्वदेशी आंदोलन के रूप में पुनर्जीवित करने का प्रयास करते हुए खादी, चरखा, ग्राम स्वराज एवं शिक्षा को महत्वपूर्ण अस्त्र के रूप में प्रयोग किया। जमुनी लाल महाविद्यालय के संरक्षक सह- प्राचार्य प्रो बीरेंद्र कुमार ने कहा कि हमारी परिचर्चा का विषय वस्तु न केवल वर्तमान में अत्यंत प्रासंगिक है बल्कि स्वदेशी उत्पादों का स्वावलंबन हमारी आवश्यकता है।
संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे एमजेके कॉलेज के प्राचार्य प्रो रवीन्द्र कुमार चौधरी ने गांधी जी के स्वदेशी आंदोलन के आर्थिक पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए वर्तमान समय में टैरिफ़ एवं एलिफेंट इकॉनमी जैसी समस्याओं के समाधान के लिए गांधी के स्वदेशी आंदोलन को अत्यंत प्रासंगिक बताया। उन्होंने कहा कि मेक इन इंडिया, वोकल फॉर लोकल, आत्मनिर्भर भारत, स्टार्टअप इंडिया, स्टैंडअप इंडिया गांधी के सोच और विचारों को आगे बढ़ाने का ही एक प्रयास है। इससे समाज में परिवर्तन भी दिख रहा है। लोग इसे अपना रहे है। धन्यवाद ज्ञापन इतिहास विभाग की प्राध्यापिका डॉ वंदना सिंह ने की। इस अवसर पर सह संयोजक डॉ राजेश कुमार चंदेल, डॉ अरिहंत नचिकेता, डॉ अरुण दयाल, डॉ वैभव, डॉ अनामिका, डॉ निधि, डॉ स्मृति, डॉ धर्मेंद्र कुमार, डॉ चिरंजीवी आदि मौजूद रहे।
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