UP Madrasa Approval Scam: मिर्जापुर में मदरसों की मंजूरी और फंडिंग से जुड़ा एक बड़ा घोटाला सामने आया है. एक SIT जांच में 189 मदरसों में गड़बड़ियां और करीब 2 करोड़ के गबन का पता चला है. पूरी खबर पढ़ने के लिए नीचे स्क्रॉल करें.
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UP Madrasa News: उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में मदरसों की मंजूरी और सरकारी फंड के गलत इस्तेमाल से जुड़ा एक बड़ा घोटाला सामने आया है. एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम की जांच में 189 मदरसों की मंजूरी की प्रक्रिया में बड़ी गड़बड़ियां और सरकारी फंड में लगभग 2 करोड़ रुपये के गबन का पता चला है. इस मामले में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के कई अधिकारियों और कर्मचारियों और 42 मदरसों के मैनेजरों के खिलाफ FIR दर्ज करने की सिफारिश की गई है.
SIT की रिपोर्ट के मुताबिक, मदरसों को अस्थायी मंजूरी दी गई थी, लेकिन न तो उनके रिकॉर्ड की ठीक से जांच की गई और न ही फिजिकल इंस्पेक्शन किया गया. इसके बावजूद शिक्षकों की सैलरी के लिए बजट मांगा गया और कई मदरसों को पेमेंट भी किया गया जिनके लिए कोई बजट मंजूर नहीं किया गया था. जांच में यह भी पता चला कि मदरसा आधुनिकीकरण योजना के तहत नियुक्त असिस्टेंट को बिना किसी डॉक्यूमेंट या फिजिकल वेरिफिकेशन के गैर-कानूनी तरीके से मानदेय दिया गया.
आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज
SIT ने मिर्जापुर जिले के 143 मदरसों की जांच की और उनमें से 89 की मंजूरी में गंभीर गड़बड़ियां पाई गईं. रिपोर्ट में कहा गया है कि यह सब अधिकारियों, कर्मचारियों और मदरसों के मैनेजरों की मिलीभगत से किया गया, जिसके कारण सरकारी आदेशों और उत्तर प्रदेश मदरसा और शिक्षा परिषद अधिनियम, 2004 का खुलेआम उल्लंघन हुआ. रिपोर्ट में कई अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम हैं, जिनमें पूर्व और वर्तमान जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी, अन्य प्रशासनिक अधिकारी, कंप्यूटर ऑपरेटर और रिटायर्ड कर्मचारी शामिल हैं. SIT ने इन सभी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 409 (आपराधिक विश्वासघात) और 120-B (आपराधिक साजिश) के तहत FIR दर्ज करने की सिफारिश की है.
इतने करोड़ रुपये का पेमेंट का आरोप
हालांकि, रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि तत्कालीन जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी, विनोद गोरखपुर पर 2017 में बिना उचित वेरिफिकेशन के डिजिटल सिग्नेचर का इस्तेमाल करके मदरसों को लगभग 1.19 करोड़ रुपये का पेमेंट करने का आरोप है. उनके खिलाफ पहले से ही विभागीय जांच चल रही है, लेकिन अभी तक उनके खिलाफ FIR दर्ज करने की सिफारिश नहीं की गई है. SIT रिपोर्ट जारी होने के बाद उम्मीद है कि इस मामले में आगे और सख्त कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जाएगी.
तौसीफ आलम पिछले चार सालों से पत्रकारिता के पेशे में हैं. उन्होंने देश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी जामिया मिल्लिया इस्लामिया से ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई की है. Amar Ujala,Times Now…और पढ़ें
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