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Indian Armed Forces modernization: भारतीय सशस्त्र बलों का आधुनिकीकरण जारी है. तीनों सेनाओं को AI, हाइपरसोनिक्स, ड्रोन और साइबर डिफेंस जैसी अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी से इंटीग्रेट किया जा रहा है. एकीकृत ऑपरेशन्स के लिए जॉइंट थिएटर कमांड्स स्थापित करने की दिशा में भी आगे बढ़ा जा रहा है. सेनाओं की ताकत बढ़ाने के लिए भारत सरकार ने भी अपना खजना खोल रखा है. साल 2025 में रक्षा मंत्रालय ने सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण के लिए दिसंबर के अंत तक 1.82 लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए. इसके अलावा जनवरी 2025 से देश की रक्षा तैयारियों को बढ़ाने के लिए 3.84 लाख करोड़ रुपये से अधिक के पूंजीगत अधिग्रहण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है. ये जानकारी सरकार ने दी है.
एक बयान में रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व में मंत्रालय ने तीन सेनाओं के समन्वय को मजबूत करने, रक्षा तैयारियों को बढ़ाने, आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने और कल्याणकारी वितरण तंत्र में सुधार लाने के उद्देश्य से व्यापक सुधारों को लागू किया है. रक्षा मंत्रालय ने साल 2025 को सुधारों का वर्ष घोषित किया था. इसी को केंद्र में रखते हुए जमकर खर्च भी किया गया है.
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, रक्षा अधिग्रहण परिषद ने जनवरी 2025 से देश की रक्षा तैयारियों को बढ़ाने के लिए कुल 3.84 लाख करोड़ रुपये से अधिक के पूंजीगत अधिग्रहण प्रस्तावों को मंजूरी दी है. इसमें स्वदेशीकरण के माध्यम से आधुनिकीकरण पर ध्यान केंद्रित किया गया है. बयान के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2025-26 में, दिसंबर 2025 के अंत तक मंत्रालय ने सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण के लिए 1.82 लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए हैं.
रक्षा मंत्रालय ने बताया है कि दिसंबर 2025 के अंत तक पूंजी अधिग्रहण बजट के तहत 80 प्रतिशत (लगभग 1.2 लाख करोड़ रुपये) व्यय कर लिया गया है. इस आवंटन का उपयोग सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण पर किया जा रहा है. रक्षा मंत्रालय का कुल पूंजीगत व्यय भी 76 प्रतिशत तक पहुंच गया है.
जमीन, समुद्र और हवा में ताकत बनाए रखने के लिए नए जमाने के आधुनिक हथियारों की खरीद और निर्माण जारी है ताकि 21वीं सदी के खतरों का सामना किया जा सके. भारतीय सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण में ऑपरेशन सिंदूर के बाद कई गुना तेजी आई है.
सेना का लक्ष्य 1,800 से ज्यादा मुख्य युद्धक टैंक, 400 हल्के टैंक, 600,000 तोप के गोले और कई तरह के मानवरहित हवाई सिस्टम खरीदना है. नौसेना की प्राथमिकताओं में एक विमानवाहक पोत, 10 अगली पीढ़ी के डिस्ट्रॉयर, 10 से ज़्यादा लैंडिंग प्लेटफॉर्म और एडवांस्ड हेलीकॉप्टर शामिल हैं. वायु सेना 20 स्ट्रैटोस्फेरिक एयरशिप, 350 मल्टी-मिशन ड्रोन, स्टील्थ UCAV, हाई-पावर लेजर सिस्टम और डायरेक्टेड-एनर्जी हथियार खरीदने की योजना बना रही है.
अलग-अलग तरह की मिसाइलों का विकास भी जारी है जिसमें क्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन मुख्य भूमिका निभा रहा है. डीआरडीओ आधुनिक युद्ध में वायु रक्षा के महत्व को देखते हुए जल्द से जल्द स्वदेशी मल्टी लेयर्ड एयर डिफेंस सिस्टम सुदर्शन चक्र के विकास में भी जुटा हुआ है.
उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के रहने वाले शिवेन्द्र राय को हिंदी डिजिटल पत्रकारिता में 5 साल का अनुभव है. वाराणसी के महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से इतिहास में एमए … और पढ़ें
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