दुनिया भर में बेघर लोगों पर हुए एक सर्वे ने कई चौंकाने वाले और दिलचस्प तथ्य सामने रखे हैं। 2020 की 'ओईसीडी' (OECD) रिपोर्ट के आधार पर जारी आंकड़ों के मुताबिक, दुनिया में सबसे ज़्यादा बेघर लोगों वाले देशों की लिस्ट में पाकिस्तान (Pakistan) पहले नंबर पर है। वहां करीब 80 लाख से ज़्यादा लोग बिना घर के सड़कों पर रहने को मजबूर हैं। जी हां, हालिया ओईसीडी (OECD) रिपोर्ट के आधार पर जारी आंकड़ों के अनुसार, दुनिया में सबसे ज़्यादा बेघर लोगों वाले देशों की लिस्ट में पड़ोसी देश पाकिस्तान (Pakistan) पहले स्थान पर है। हैरानी की बात यह है कि दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाले देश भारत (India) में यह संख्या पाकिस्तान से 4 गुना कम है, जो काफी अहम बात है।
पाकिस्तान की इस दयनीय हालत की वजह क्या है? पाकिस्तान में 80,00,000 लोगों के बेघर होने की मुख्य वजह देश की आर्थिक अस्थिरता (Economic Instability) है। पिछले कुछ सालों से पाकिस्तान गंभीर महंगाई और आर्थिक मंदी से जूझ रहा है। गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों की संख्या दिन-ब-दिन बढ़ रही है। इसके साथ ही, भयानक बाढ़ (Floods) और प्राकृतिक आपदाओं ने हज़ारों घर तबाह कर दिए हैं। राजनीतिक अस्थिरता और आवास योजनाओं की कमी के कारण वहां के आम लोगों को छत मुहैया कराना नामुमकिन सा हो गया है।
भारत में बेघर लोगों की संख्या कम होने की वजह क्या है? भारत की आबादी 140 करोड़ से ज़्यादा होने के बावजूद, बेघर लोगों की संख्या 17,70,000 तक ही सीमित है। प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत करोड़ों परिवारों को अपना घर बनाने में मदद की जा रही है। इससे बेघर लोगों की संख्या में काफी कमी आई है। इसके अलावा, भारत की स्थिर आर्थिक ग्रोथ ने लोगों की खरीदने की क्षमता बढ़ाई है, जिससे उन्हें छोटे-मोटे घर खरीदने में आसानी हुई है।
भारत में शहरीकरण और रोज़गार बढ़ रहे हैं। बढ़ते शहरीकरण के बावजूद, ग्रामीण इलाकों में 'रोज़गार गारंटी' जैसी योजनाएं लोगों के पलायन को रोक रही हैं और उन्हें अपने ही गांव में घर बनाए रखने में मदद कर रही हैं। साथ ही, भारत की मजबूत संयुक्त और पारंपरिक परिवार व्यवस्था (Joint Family System) भी आर्थिक मुश्किलों के समय लोगों को सहारा देती है।
लिस्ट में सीरिया (Syria) दूसरे नंबर पर है, जबकि बांग्लादेश (Bangladesh) तीसरे नंबर पर है। अमेरिका और ब्रिटेन जैसे विकसित देशों का भी इस लिस्ट में होना यह दिखाता है कि आवास की समस्या एक वैश्विक चुनौती है।
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