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यवतमाल: तहसीलदार तहसील कार्यालय में नहीं रहते, जिसके चलते वर्धा नदी के किनारे घाटों पर रात में रेत का उत्खनन और परिवहन होता है. ऐसे में रेत तस्करों को गुरुर था तहसीलदार नहीं है तो क्या कार्रवाई होगी. लेकिन इन रेत माफियाओं की ‘शर्मनाक’ उम्मीदों पर पानी फिर गया है. मारेगांव के तहसीलदार उत्तम निलावाड ने सोमवार की रात साहसिक कार्रवाई करते हुए रेत परिवहन कर रहे तीन ट्रकों को जब्त किया है.
मारेगांव के तहसीलदार निलावाड ने कार्रवाई की मांग की है और नरसाला गिट्टी क्रशर के खिलाफ भी ऐसी ही कार्रवाई की मांग की गई है. रात के समय रेत उत्खनन शुरू होता था। पिछले कुछ दिनों से इस बात की जानकारी मिलने के बाद तहसीलदार ने कार्रवाई शुरू कर दी थी. हालांकि, राजस्व विभाग के कुछ कर्मचारियों के साथ ही खुफिया तंत्र का उचित सहयोग नहीं मिलने के कारण कई बार कार्रवाई सीमित रही.
आखिरकार तहसीलदार नीलावाड ने रेत खनन रोकने के लिए टीम गठित कर कार्रवाई शुरू कर दी. यह कार्रवाई रात करीब 12 बजे कोसरा इलाके में की गई. रेत परिवहन कर रहे तीन टीपरों को जब्त कर तहसील कार्यालय परिसर में रखा गया है।
यह कार्रवाई तहसीलदार उत्तम निलावाड, प्रशांत डांगारे, वाहन चालक विजय कनाके, तलाथी नाईक, कोतवाल दिलीप पचारे, कोतवाल चांदेकर, पुलिस पाटिल प्रेमदास गानार ने की.
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