Feedback
यूपी के बरेली में तैनात रहे पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे को लेकर परिवार की ओर से कई तथ्य सामने आए हैं. परिजनों का कहना है कि यह फैसला किसी राजनीतिक या धार्मिक संगठन के समर्थन में नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और संवैधानिक मूल्यों से जुड़े मुद्दों को लेकर लिया गया है.
श्याम नगर निवासी सेवानिवृत्त विंग कमांडर और अलंकार के ताऊ एस.के. सिंह ने बताया कि परिवार में आत्मसम्मान को सर्वोपरि माना गया है और किसी भी परिस्थिति में समझौता नहीं किया गया. उन्होंने बताया कि पहले अलंकार की मां ने भी आत्मसम्मान को ठेस पहुंचने पर बैंक की नौकरी से इस्तीफा दिया था. वहीं छोटे भाई विजय के निधन के बाद उनकी पत्नी गीता ने बैंक ऑफ बड़ौदा में 21 वर्षों तक कैशियर के रूप में सेवा दी. आरोप है कि प्रबंधन स्तर पर अनावश्यक दबाव और काम न करने के आरोप लगाए गए, जिसके बाद उन्होंने भी नौकरी छोड़ दी.
एस.के. सिंह ने कहा कि इसी पारिवारिक मूल्यों के तहत अलंकार अग्निहोत्री ने भी अपने पद से इस्तीफा देकर कदम उठाया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पूरे मामले को किसी तथाकथित शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए. उनका विरोध बटुकों के साथ कथित तौर पर शिखा पकड़कर किए गए व्यवहार को लेकर है.
परिवार का यह भी कहना है कि उनका कोई राजनीतिक बैकग्राउंड नहीं है. अलंकार के पिता का निधन तब हो गया था जब वह मात्र 10 वर्ष के थे, इसके बाद उन्होंने मेहनत के बल पर न सिर्फ अपने भाइयों को स्थापित किया, बल्कि खुद भी प्रशासनिक सेवा में स्थान बनाया.
परिजनों के अनुसार, अलंकार यूजीसी बिल को लेकर भी चिंतित थे और उनका मानना था कि इससे भविष्य में छात्रों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है. परिवार ने यह भी कहा कि अगर किसी अन्य समुदाय के धार्मिक प्रतीकों- जैसे सिखों की पगड़ी या मुसलमानों की दाढ़ी- के साथ इसी तरह का व्यवहार होता, तो भी वे विरोध दर्ज कराते.
अलंकार की पत्नी और पूरा परिवार उनके फैसले के समर्थन में उनके साथ खड़ा है. परिजनों का कहना है कि अधिकारियों की ओर से की गई कार्रवाई उचित नहीं थी और इसी के विरोध में यह निर्णय लिया गया.
Copyright © 2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today
होम
वीडियो
लाइव टीवी
न्यूज़ रील
मेन्यू
मेन्यू