40 किलो सोना, एक थिएटर, चार किरदार… बिना प्रमोशन 'तुम्बाड़' डायरेक्टर की नई फिल्म 'मायासभा' करेगी कमाल? – AajTak

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डायरेक्टर राही अनिल बर्वे की फिल्म ‘तुम्बाड़’ का पॉपुलर होना अपने-आप में एक अद्भुत कहानी है. बिना खास बजट, प्रमोशन या चर्चा के आई ‘तुम्बाड़’ ने जनता को ऐसा इंप्रेस किया कि ये फिल्म सरप्राइज हिट साबित हुई. राही अनिल बर्वे की दूसरी फिल्म ‘मायासभा’ अब रिलीज के लिए तैयार है. फिल्म में लीड रोल जाने-माने एक्टर जावेद जाफरी ने किया है. ‘तुम्बाड़’ को जितनी चर्चा मिली थी, ‘मायासभा’ को उतनी भी नहीं मिली. मगर दिमाग को फंसा लेने वाली कहानी के साथ ये फिल्म शुक्रवार को थिएटर्स में पहुंच रही है.
क्या है ‘मायासभा’ की कहानी?
‘मायासभा’ का ट्रेलर बताता है कि ये एक साइकोलॉजिकल थ्रिलर टाइप कहानी है. एक टॉप फिल्म प्रोड्यूसर (जावेद जाफरी) ने एक फिल्म थिएटर में 40 किलो सोना छुपाया था. अब वो भूल चुका है कि ये सोना उसने कहां छुपाया है. करीब 20 सालों से वो प्रोड्यूसर इस जर्जर हो चुके थिएटर ‘मायासभा’ में रहता है. इस प्रोड्यूसर से अलग रहने वाला उसका बेटा एक दिन अपने दो दोस्तों को इस थिएटर में ले आता है— सोना खोजने की आस में. इन चार लोगों के बीच 24 घंटे में ‘मायासभा’ में जो कुछ होता है, वही फिल्म की कहानी है.
कई सालों से दबा था जावेद जाफरी का ‘बेस्ट काम’
‘मायासभा’ का शूट स्टार्ट होने की जानकारी जावेद जाफरी ने अपने ट्विटर (अब एक्स) हैंडल पर 2018 में शेयर की थी. बर्वे ने अपने एक इंटरव्यू में बताया है कि ‘तुम्बाड़’ की रिलीज के बाद और नया प्रोजेक्ट शुरू करने के बीच वाले वक्त में उन्होंने ‘मायासभा’ शूट की थी.
2023 तक ये फिल्म बनकर एक किनारे रखी हुई थी. जब बर्वे का एक प्रोजेक्ट ‘गुलकंद टेल्स’ बीच में अटक गया तो बीच के खाली पड़े डेढ़ सालों में उन्होंने ‘मायासभा’ को तैयार किया. एक इंटरव्यू में जावेद जाफरी ने अपने 40 साल लंबे करियर में ‘मायासभा’ को अपनी बेस्ट परफॉर्मेंस बताया था. कुछ समय पहले आया ट्रेलर देखने के बाद जावेद की इस बात पर कोई शक भी नहीं लगता. यहां देखें ‘मायासभा’ का ट्रेलर:
बजट नहीं, प्रमोशन नहीं, स्क्रीन्स नहीं
‘मायासभा’ का हाल प्रमोशन के मामले में ‘तुम्बाड़’ से भी कमजोर है. कम ही चांस है कि सोशल मीडिया पर आपने इसका कोई बड़ा प्रमोशन देखा हो. यूट्यूब पर फिल्म के ट्रेलर वीडियो पर अभी तक 1 मिलियन व्यूज़ भी नहीं हैं. राही अनिल बर्वे खुद सोशल मीडिया पर लोगों को और मीडिया पर्सन्स को टैग कर-करके अपनी फिल्म के बारे में बता रहे हैं. उनके कहने पर लोग ट्रेलर देखते हैं और तारीफ भी करते हैं. लेकिन ये कहना गलत नहीं होगा कि उनका एफर्ट पूरा पड़ता नजर नहीं आ रहा.
30 जनवरी, शुक्रवार को ‘मायासभा’ थिएटर्स में पहुंच रही है. इसके साथ रानी मुखर्जी की पॉपुलर फ्रेंचाईजी ‘मर्दानी’ की तीसरी फिल्म भी आ रही है. विजय सेतुपति की एक्सपेरिमेंटल साइलेंट फिल्म ‘गांधी टॉक्स’ भी रिलीज हो रही है. ‘बॉर्डर 2’ का शुक्रवार से दूसरा हफ्ता शुरू होगा. ऐसे में जाहिर है कि ‘मायासभा’ को बहुत कम स्क्रीन्स मिली हैं. हमेशा की तरह जादू की छड़ी अब जनता के हाथ में है. अगर ‘मायासभा’ दर्शकों को इंप्रेस करने में कामयाब हुई, तो ये ‘तुम्बाड़’ जैसा कमाल भी कर सकती है. बस देखना है कि जनता इस फिल्म तक पहुंच पाती है या नहीं.
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