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भारत में 2024 को अब तक का सबसे गर्म वर्ष घोषित किया गया है. भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, 2024 में देश ने 1901 से अब तक का सबसे अधिक वार्षिक औसत वायुमंडलीय तापमान दर्ज किया है जो दीर्घकालीन औसत से +0.65°C ज्यादा था.
पिछले एक सदी में तापमान की प्रवृत्ति में काफी वृद्धि देखी गई है, जो प्रति 100 वर्षों में +0.68°C की दर से बढ़ा है. 2016 में भी उच्च तापमान दर्ज हुआ था, जब तापमान विसंगति +0.54°C थी, जो इस वर्ष के मुकाबले कम थी.
तापमान में हुई +0.83°C की वृद्धि
मौसम के आंकड़ों से पता चलता है कि मानसून के बाद का मौसम सबसे अधिक प्रभावित रहा, जिससे तापमान में +0.83°C की वृद्धि दर्ज की गई है. देश भर में न्यूनतम और अधिकतम तापमान प्रवृत्तियों में क्रमशः 0.89°C और 0.46°C प्रति 100 वर्षों की वृद्धि देखी गई है.
दिसंबर 2024 विशेष रूप से गर्मी की इस प्रवृत्ति को दर्शाता है, जिसमें दक्षिण प्रायद्वीप क्षेत्र में न्यूनतम तापमान विसंगति +2.15°C रिकॉर्ड की गई, जो कि 1900 के दशक की शुरुआत से अब तक की सबसे अधिक थी.
बिगड़ रहा है संतुलन
यह बढ़ती गर्मी जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों को स्पष्ट रूप से दर्शाती है जो न केवल पर्यावरणीय संतुलन को बिगाड़ रही है. बल्कि कृषि, जल वितरण और मानव स्वास्थ्य जैसे विभिन्न क्षेत्रों पर भी गहरा प्रभाव डाल रही है.
भारत जैसे विकासशील देश के लिए यह गर्मी की प्रवृत्ति चिंताजनक है और इससे निपटने के लिए सतत और ठोस उपायों की आवश्यकता है. इस बढ़ती गर्मी के प्रभाव को कम करने के लिए सभी स्तरों पर ठोस प्रयास और सहयोग आवश्यक हैं.
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