हिंदी किताबें इंग्लिश में ट्रांसलेट कीं, 400कॉलेजों में एमडीएस यूनिवर्सिटी टॉपर बनीं – Dainik Bhaskar

21 शहरों में फैला बिजनेस नेटवर्क
आज मैं अपनी कंपनी की डायरेक्टर हूं, जो 21 शहरों में सक्रिय है। हम 5000+ ब्रांड्स के साथ काम कर रहे हैं, 1.5 मिलियन कस्टमर्स को सर्व कर रहे हैं और 300 से अधिक लोगों को रोजगार दे रहे हैं। मेरे लिए महिला सशक्तिकरण का मतलब है आर्थिक आत्मनिर्भरता, इसलिए हमारी कंपनी में बैक-ऑफिस की 70% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। हम ऑटिज्म से जुड़े बच्चों और अनाथ बच्चियों के लिए भी काम कर रहे हैं। मिसेज इंडिया द क्राउन विनर 2019 का सम्मान मेरे लिए उपलब्धि नहीं, बल्कि जिम्मेदारी है, क्योंकि असली सफलता वही है जो समाज के काम आए।
डबल शिफ्ट में किया सपना पूरा
जयपुर में जब मैंने और मेरे पति हार्दिक मोदी ने ‘स्मार्ट सर्किल ग्रुप’ शुरू करने का फैसला किया, तब हम दोनों जॉब में थे और परिवार से कोई आर्थिक मदद नहीं ली। मैं सुबह 10 से शाम 6:30 तक नौकरी करती थी और रात 7 से 1 बजे तक बिजनेस पर काम यानी डबल शिफ्ट। यही मेहनत हमारी सफलता की नींव बनी। मैंने एचआर मैनेजर के रूप में महिंद्रा एंड महिंद्रा और एक्सोटिक इंडिया में काम किया। साथ ही कॉलेज प्रिंसिपल की जिम्मेदारी भी निभाई। इस अनुभव ने टीम लीडरशिप और लोगों से जुड़ने की कला सिखाई। मेरे पति का सहयोग मेरी सबसे बड़ी ताकत रही। हम घर और जीवन की जिम्मेदारियां बराबर बांटते हैं। उनके धैर्य ने मुझे संतुलन और आत्मविश्वास सिखाया।
श्वेता मेहता मोदी, डायरेक्टर, स्मार्ट सर्किल ग्रुप
wall of fame
जैसलमेर में बीएससी की पढ़ाई के दौरान पूरे कॉलेज में मैं अकेली इंग्लिश मीडियम स्टूडेंट थी। न इंग्लिश की किताबें थीं, ना ऐसे प्रोफेसर्स जो इंग्लिश में पढ़ा सकें। मेरी पूरी स्कूलिंग एयरफोर्स बैकग्राउंड में इंग्लिश मीडियम से हुई थी, इसलिए शुरुआत बहुत कठिन रही। लेकिन मैंने हार नहीं मानी और अपनी राह खुद बनाई।
मैंने अपनी कुछ दोस्तों के साथ मिलकर सभी हिंदी किताबों को इंग्लिश में ट्रांसलेट किया और बिना किसी प्रोफेसर की मदद के पूरा सिलेबस तैयार किया। मेरे पैरेंट्स चिंतित थे, पर मैंने उन्हें भरोसा दिलाया कि मैं यह कर लूंगी। जब रिजल्ट आया और साइबर कैफे में फर्स्ट, सेकंड और थर्ड डिवीजन में मेरा रोल नंबर नहीं दिखा तो मेरे पिता निराश हो गए। लेकिन थोड़ी देर बाद पता चला कि मैंने 400 कॉलेजों में से एमडीएस यूनिवर्सिटी टॉप की थी। उस पल ने मुझे सिखाया कि छोटे शहर, इंग्लिश या रिसोर्स की कमी सिर्फ बहाने होते हैं, आगे बढ़ना है तो इन्हें पीछे छोड़ना पड़ता है।
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