सिटी रिपोर्टर| मोतिहारी
जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान में तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित हुई। संगोष्ठी के तीसरे दिन के समापन सत्र में महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रो राजेंद्र बड़गूजर ने इस संगोष्ठी की सफलता को बड़ी उपलब्धि कहा। उन्होंने कहा कि यह संगोष्ठी हिंदी शिक्षण में नवाचार की दृष्टि से यह आयोजन एक नए युग की आहट और संकल्पना की तरह लगा। हिंदी शिक्षण नए क्षितिज की तलाश विषय पर केंद्रित यह संगोष्ठी केवल अकादमिक आयोजन के रूप में याद नहीं रहेगी, बल्कि हिंदी भाषा को आधुनिक तकनीक और प्राचीन भारतीय दर्शन के सेतु पर खड़ा करने का एक सफल प्रयास भी है। डॉ गौरव कुमार त्रिपाठी ने गिरमिटिया मजदूरों के ऐतिहासिक संघर्ष को याद करते हुए बताया कि कैसे सात समंदर पार भी हिंदी अपनी लोक-संवेदना के कारण जीवित रही और आज वैश्विक क्षितिज पर अपनी पहचान बना रही है। सत्र अध्यक्ष डॉ श्याम नंदन ने 21वीं सदी की चुनौतियों पर चर्चा करते हुए हिंदी को सामाजिक न्याय की भाषा के रूप में परिभाषित किया। डॉ अंजनी कुमार ने हिंदी भाषा के सामाजिक और जातीय विमर्श पर ध्यानाकर्षण किया। डॉ विनोद आजाद ने हिंदी साहित्य और भाषा में जातीय विमर्श की उपस्थिति के प्रभाव का विश्लेषण करते हुए बताया कि कैसे भाषा सामाजिक संरचनाओं को प्रभावित करती है।
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