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Blood Moon 2026 Date: साल का पहला चंद्र ग्रहण केवल एक ग्रहण नहीं है, बल्कि एक ‘ब्लड मून’ भी है, जो अब महज कुछ ही दिन ही दूर है. इसे लेकर खगोल प्रेमियों के साथ-साथ ज्योतिषियों के बीच भी जबरदस्त उत्साह है, क्योंकि एक दुर्लभ घटना होती है. जी हां, साल 2026 का पहला ब्लड मून केवल एक खगोलीय घटना नहीं है. ज्योतिष की दृष्टि से इसे बेहद प्रभावशाली माना जा रहा है. आइए जानते हैं क्या होता है ब्लड मून, इसका ज्योतिषीय महत्व क्या है और भारत में आप इस अद्भुत दृश्य का दीदार कब और कहां कर पाएंगे?
ब्लड मून एक खास खगोलीय घटना है, जो पूर्ण चंद्र ग्रहण के समय दिखाई देती है. जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीध में आ जाते हैं और पृथ्वी बीच में स्थित हो जाती है, तब उसकी छाया चंद्रमा पर पूरी तरह पड़ती है. इसी अवस्था को पूर्ण चंद्र ग्रहण कहा जाता है.
इस दौरान चंद्रमा पूरी तरह काला नहीं होता. बल्कि वह लाल, तांबे या गहरे नारंगी रंग में चमकने लगता है. ऐसा पृथ्वी के वायुमंडल की वजह से होता है, जहां से गुजरते समय सूर्य की किरणों का नीला रंग बिखर जाता है और केवल लाल रंग की रोशनी चंद्रमा तक पहुंच पाती है. इसी कारण इस अनोखे दृश्य को ब्लड मून यानी रक्त रंग का चंद्रमा कहा जाता है.
साल 2026 का पहला ब्लड मून 3 मार्च 2026 को देखने को मिलेगा. कुछ खगोलीय गणनाओं के अनुसार इसकी शुरुआती प्रक्रिया 2 मार्च की देर रात से ही शुरू मानी जा रही है. भारतीय मानक समय के अनुसार चंद्र ग्रहण की शुरुआत दोपहर 3 बजकर 22 मिनट पर होगी, जबकि इसका समापन शाम 6 बजकर 47 मिनट पर होगा. ‘
इस बार ब्लड मून को लेकर अच्छी खबर यह है कि इसका दृश्य भारत के अधिकांश हिस्सों में देखा जा सकेगा. हालांकि अलग अलग क्षेत्रों में इसकी स्पष्टता अलग रहेगी.
पूर्वी भारत के राज्यों जैसे असम, मणिपुर, नगालैंड, मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश में चंद्र ग्रहण का दृश्य सबसे ज्यादा साफ और प्रभावशाली रहने की संभावना है.
गुवाहाटी, आइजोल, ईटानगर और कोलकाता जैसे शहरों में चंद्रमा का लाल रंग अधिक समय तक नजर आ सकता है.
देश के अन्य प्रमुख शहरों में दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई, जयपुर और लखनऊ शामिल हैं, जहां ग्रहण का आंशिक चरण दिखाई देगा.
यह भी पढ़ें: Hastrekha Secrets: क्या संकेत देता है हथेलियों को मिलाने पर आधा चांद बनना, ये शुभ संकेत है या चेतावनी, जानें
ब्लड मून को देखने के लिए किसी खास उपकरण की जरूरत नहीं होती. इसे सामान्य आंखों से सुरक्षित रूप से देखा जा सकता है. अगर आपके पास दूरबीन है, तो चंद्रमा की लाल आभा और उसकी सतह के बारीक विवरण और भी साफ दिखाई देंगे.
बेहतर दृश्य के लिए ऐसी जगह चुनें जहां आस पास की रोशनी कम हो और आसमान खुला दिखाई दे. खुले मैदान या छत से देखने पर अनुभव और भी खास हो सकता है. ध्यान रखें कि बादल या खराब मौसम दृश्यता को प्रभावित कर सकते हैं.
ज्योतिष में चंद्रमा मन, भावनाओं और मानसिक स्थिति का कारक माना जाता है. जब चंद्रमा पर पृथ्वी की छाया पड़ती है, तब भावनात्मक असंतुलन बढ़ सकता है. ब्लड मून के दौरान लाल रंग का चंद्रमा तीव्र ऊर्जा का प्रतीक बन जाता है. इसे दबे हुए सच के सामने आने का समय भी कहा जाता है.
चंद्र ग्रहण का सीधा संबंध राहु और केतु से माना जाता है. इस ग्रहण में राहु का प्रभाव मानसिक भ्रम, डर और असमंजस बढ़ा सकता है. केतु का प्रभाव व्यक्ति को भीतर की सच्चाई से रूबरू करा सकता है. इसी कारण इस समय ध्यान, जप और मौन को शुभ माना गया है.
यह ब्लड मून मुख्य रूप से जल और अग्नि तत्व की राशियों को प्रभावित कर सकता है. कर्क, वृश्चिक और मीन राशि वालों के लिए यह समय भावनात्मक उतार चढ़ाव ला सकता है. मेष और सिंह राशि के जातकों के जीवन में अचानक फैसले या टकराव की स्थिति बन सकती है. कन्या और मकर राशि के लिए यह आत्मविश्लेषण का दौर हो सकता है.
यह भी पढ़ें: Shani Ast 2026 Predictions: क्या 2026 में शनि का अस्त होना विनाशकारी है? जानें किस सेक्टर पर होगा सबसे अधिक असर‘
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.
Blood Moon 2026 Date: साल का पहला चंद्र ग्रहण केवल एक ग्रहण नहीं है, बल्कि एक ‘ब्लड मून’ भी है, जो अब महज कुछ ही दिन ही दूर है. इसे लेकर खगोल प्रेमियों के साथ-साथ ज्योतिषियों के बीच भी जबरदस्त उत्साह है, क्योंकि एक दुर्लभ घटना होती है. जी हां, साल 2026 का पहला ब्लड मून केवल एक खगोलीय घटना नहीं है. ज्योतिष की दृष्टि से इसे बेहद प्रभावशाली माना जा रहा है. आइए जानते हैं क्या होता है ब्लड मून, इसका ज्योतिषीय महत्व क्या है और भारत में आप इस अद्भुत दृश्य का दीदार कब और कहां कर पाएंगे?
ब्लड मून एक खास खगोलीय घटना है, जो पूर्ण चंद्र ग्रहण के समय दिखाई देती है. जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीध में आ जाते हैं और पृथ्वी बीच में स्थित हो जाती है, तब उसकी छाया चंद्रमा पर पूरी तरह पड़ती है. इसी अवस्था को पूर्ण चंद्र ग्रहण कहा जाता है.
इस दौरान चंद्रमा पूरी तरह काला नहीं होता. बल्कि वह लाल, तांबे या गहरे नारंगी रंग में चमकने लगता है. ऐसा पृथ्वी के वायुमंडल की वजह से होता है, जहां से गुजरते समय सूर्य की किरणों का नीला रंग बिखर जाता है और केवल लाल रंग की रोशनी चंद्रमा तक पहुंच पाती है. इसी कारण इस अनोखे दृश्य को ब्लड मून यानी रक्त रंग का चंद्रमा कहा जाता है.
साल 2026 का पहला ब्लड मून 3 मार्च 2026 को देखने को मिलेगा. कुछ खगोलीय गणनाओं के अनुसार इसकी शुरुआती प्रक्रिया 2 मार्च की देर रात से ही शुरू मानी जा रही है. भारतीय मानक समय के अनुसार चंद्र ग्रहण की शुरुआत दोपहर 3 बजकर 22 मिनट पर होगी, जबकि इसका समापन शाम 6 बजकर 47 मिनट पर होगा. ‘
इस बार ब्लड मून को लेकर अच्छी खबर यह है कि इसका दृश्य भारत के अधिकांश हिस्सों में देखा जा सकेगा. हालांकि अलग अलग क्षेत्रों में इसकी स्पष्टता अलग रहेगी.
पूर्वी भारत के राज्यों जैसे असम, मणिपुर, नगालैंड, मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश में चंद्र ग्रहण का दृश्य सबसे ज्यादा साफ और प्रभावशाली रहने की संभावना है.
गुवाहाटी, आइजोल, ईटानगर और कोलकाता जैसे शहरों में चंद्रमा का लाल रंग अधिक समय तक नजर आ सकता है.
देश के अन्य प्रमुख शहरों में दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई, जयपुर और लखनऊ शामिल हैं, जहां ग्रहण का आंशिक चरण दिखाई देगा.
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ब्लड मून को देखने के लिए किसी खास उपकरण की जरूरत नहीं होती. इसे सामान्य आंखों से सुरक्षित रूप से देखा जा सकता है. अगर आपके पास दूरबीन है, तो चंद्रमा की लाल आभा और उसकी सतह के बारीक विवरण और भी साफ दिखाई देंगे.
बेहतर दृश्य के लिए ऐसी जगह चुनें जहां आस पास की रोशनी कम हो और आसमान खुला दिखाई दे. खुले मैदान या छत से देखने पर अनुभव और भी खास हो सकता है. ध्यान रखें कि बादल या खराब मौसम दृश्यता को प्रभावित कर सकते हैं.
ज्योतिष में चंद्रमा मन, भावनाओं और मानसिक स्थिति का कारक माना जाता है. जब चंद्रमा पर पृथ्वी की छाया पड़ती है, तब भावनात्मक असंतुलन बढ़ सकता है. ब्लड मून के दौरान लाल रंग का चंद्रमा तीव्र ऊर्जा का प्रतीक बन जाता है. इसे दबे हुए सच के सामने आने का समय भी कहा जाता है.
चंद्र ग्रहण का सीधा संबंध राहु और केतु से माना जाता है. इस ग्रहण में राहु का प्रभाव मानसिक भ्रम, डर और असमंजस बढ़ा सकता है. केतु का प्रभाव व्यक्ति को भीतर की सच्चाई से रूबरू करा सकता है. इसी कारण इस समय ध्यान, जप और मौन को शुभ माना गया है.
यह ब्लड मून मुख्य रूप से जल और अग्नि तत्व की राशियों को प्रभावित कर सकता है. कर्क, वृश्चिक और मीन राशि वालों के लिए यह समय भावनात्मक उतार चढ़ाव ला सकता है. मेष और सिंह राशि के जातकों के जीवन में अचानक फैसले या टकराव की स्थिति बन सकती है. कन्या और मकर राशि के लिए यह आत्मविश्लेषण का दौर हो सकता है.
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