इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर पर सरकार की बड़ी राहत! PM E-DRIVE योजना से कंपनियों को लौटाए ₹1,182 करोड़ – AajTak

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देश में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, ख़ासतौर पर लोग इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स में ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहे हैं. इसके पीछे सबसे बड़ा कारण है सरकार द्वारा मिल रही सब्सिडी. केंद्र सरकार की PM E-DRIVE योजना अब ज़मीन पर साफ असर दिखाने लगी है. इस योजना के चलते न सिर्फ ग्राहकों को कम कीमत से राहत मिल रही है, बल्कि देशभर में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर की बिक्री भी तेजी से बढ़ी है. सरकार अब तक हजारों करोड़ रुपये वाहन कंपनियों को लौटा चुकी है, ताकि आम आदमी को किफायती दाम में वाहन मिल सके.
भारी उद्योग मंत्रालय ने 5 फरवरी 2026 तक पीएम इलेक्ट्रिक ड्राइव रेवोल्यूशन इन इनोवेटिव व्हीकल इन्हैंसमेंट (PM E-Drive) योजना के तहत वाहन निर्माताओं को 1,182.32 करोड़ रुपये की राशि वापस की है. यह पैसा उन इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर पर दी गई छूट के बदले लौटाया गया है, जो 1 अप्रैल 2024 के बाद रजिस्टर्ड हुए हैं. अब तक 14,39,224 इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर इस योजना का लाभ उठा चुके हैं.
PM E-DRIVE योजना के तहत सरकार ने कुल 1,772 करोड़ रुपये का बजट तय किया है. इसका मकसद 31 मार्च 2026 तक 24,79,120 इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर को प्रोत्साहन राशि मुहैया कराना है. इस योजना की खास बात यह है कि ग्राहक को गाड़ी खरीदते समय ही कीमत में सब्सिडी के तौर पर सीधी कटौती मिलती है. बाद में यही रकम सरकार वाहन बनाने वाली कंपनियों को लौटा देती है. 
देश में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर खरीदने के मामले में महाराष्ट्र सबसे आगे है. यहां 2,71,849 वाहनों को सब्सिडी मिली है. कर्नाटक में 1,57,534 और तमिलनाडु में 1,43,914 इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर इस योजना के तहत आए हैं. उत्तर प्रदेश में 1,15,246 और राजस्थान में 94,004 इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर को लाभ मिला है, जिससे ये राज्य टॉप पांच में शामिल हो गए हैं.
PM E-DRIVE योजना पूरे देश में लागू की गई है. यह योजना सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है. ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोग भी इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर खरीदते समय इस सब्सिडी का फायदा उठा सकते हैं. सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में यह सुविधा उपलब्ध है.
हालांकि PM E-DRIVE योजना में वाहन कंपनियों को टैक्स में छूट नहीं दी जाती है. लेकिन उन्हें ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट्स के लिए चलाई जा रही प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव यानी PLI योजना से अलग सपोर्ट मिलता है. इस योजना के तहत एडवांस्ड ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी से जुड़े कंपोनेंट पर 13 से 18 प्रतिशत तक का इंसेंटिव दिया जाता है.
इस योजना में शामिल वाहन निर्माताओं को फेज्ड मैन्युफैक्चरिंग प्रोग्राम का पालन करना जरूरी होता है. इसके तहत इलेक्ट्रिक वाहनों के जरूरी पुर्जों की मैन्युफैक्चरिंग धीरे-धीरे भारत में ही करना अनिवार्य किया जाता है. सरकार का मकसद देश में मजबूत और आत्मनिर्भर इलेक्ट्रिक व्हीकल इंडस्ट्री डेवलप करना है.
 
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