'गेहूं-चावल से दूध-दही तक कृषि क्षेत्र पूरी तरह सुरक्षित', India-US ट्रेड डील पर वाणिज्य सचिव का बड़ा बयान – Jagran

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वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने बताया कि भारत ने व्यापार समझौतों में हमेशा संवेदनशील क्षेत्रों पर स्पष्ट रुख रखा है। उन्होंने पुष्टि की कि अमेरिका के सा …और पढ़ें
भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते में संवेदनशील क्षेत्र सुरक्षित
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि भारत ने व्यापार समझौतों में हमेशा उन क्षेत्रों को लेकर ‘स्पष्ट सोच’ रखी है जो देश के लिए ‘बेहद’ संवेदनशील हैं और अमेरिका के साथ अंतरिम व्यापार समझौते में ऐसे सभी प्रमुख क्षेत्रों की पूरी तरह रक्षा की गई है।
उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष संयुक्त बयान को कानूनी समझौते में बदलने पर काम कर रहे हैं, जिसे मार्च के अंत तक अंतिम रूप देकर हस्ताक्षर किए जाने की उम्मीद है।
यहां मीडिया से बात करते हुए वाणिज्य सचिव ने कहा, ‘भारत ने हमेशा सभी समझौतों पर स्पष्ट सोच के साथ बातचीत की है।
जो भी क्षेत्र भारत के लिए बेहद संवेदनशील हैं, जहां हमें लगता है कि हमारे किसान, मछुआरे, दुग्ध क्षेत्र प्रभावित हो सकते हैं, वहां हमने अपने साझेदार देशों को साफ बता दिया है कि भारत ऐसे मामलों में बाजार नहीं खोल सकता या पहुंच नहीं दे सकता।’
उन्होंने कहा, ‘अगर आप पिछले एक साल में किए गए सभी समझौतों को देखें। हमने पांच व्यापार समझौते किए हैं। सभी में संवेदनशील क्षेत्रों की रक्षा की गई है।
अमेरिका के साथ भी सभी प्रमुख संवेदनशील क्षेत्रों को सुरक्षित रखा गया है। जहां थोड़ी संवेदनशीलता थी, वहां हमने शुल्क दर ‘कोटा’ व्यवस्था का इस्तेमाल किया ताकि बाजार तक पहुंच सीमित रहे और हमारे किसानों पर असर न पड़े।’
इस महीने की शुरुआत में घोषित अंतरिम व्यापार समझौते के तहत भारत ने मक्का, गेहूं, चावल, सोया, पोल्ट्री, दूध, पनीर, एथनाल (ईंधन), तंबाकू, कुछ सब्जियों और मांस जैसे संवेदनशील कृषि एवं दुग्ध उत्पादों को पूरी तरह संरक्षित रखा है।
इन वस्तुओं पर अमेरिका को कोई शुल्क रियायत नहीं दी गई है। ये उत्पाद संवेदनशील हैं क्योंकि इनका संबंध देश के छोटे एवं सीमांत किसानों की आजीविका से है।
अन्य मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) में भी भारत ने संवेदनशील कृषि और दुग्ध उत्पादों पर आयात शुल्क में कोई रियायत नहीं दी है। भारत ने हाल ही में यूरोपीय संघ, ब्रिटेन तथा आस्ट्रेलिया के साथ एफटीए को अंतिम रूप दिया है।
भारत को 2024 में अमेरिका का कृषि निर्यात 1.6 अरब डालर रहा। प्रमुख निर्यातों में बादाम (छिलके सहित, 86.8 करोड़ डालर), पिस्ता (12.1 करोड़ डालर), सेब (2.1 करोड़ डालर) और एथनाल (एथिल अल्कोहल, 26.6 करोड़ डालर) शामिल हैं।
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद चालू वित्त वर्ष में अब तक भारत के वस्तु एवं सेवा निर्यात में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई है और जनवरी में भी इसके सकारात्मक रहने का अनुमान है।
उन्होंने कहा कि जनवरी के निर्यात आंकड़े इस महीने जारी किए जाएंगे। अग्रवाल ने यहां कहा, ‘कुल मिलाकर निर्यात अच्छा प्रदर्शन कर रहा है। वस्तु निर्यात में हम मजबूती से टिके हुए हैं। सेवाएं हमेशा की तरह बहुत अच्छा कर रही हैं। आप जनवरी के आंकड़ों के सकारात्मक रहने की उम्मीद कर सकते हैं।’
वित्त वर्ष 2025-26 के अप्रैल-दिसंबर दौरान देश का वस्तु निर्यात 2.44 प्रतिशत बढ़कर 330.29 अरब डालर रहा। वाणिज्य मंत्रालय को उम्मीद है कि 2025-26 में वस्तु एवं सेवा निर्यात 850 अरब डालर को पार कर सकता है जो 2024-25 में 825 अरब डालर रहा था।
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