Uttar Pradesh Ayush Budget: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में आयुष सेवाओं के लिए करीब 2867 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है. सरकार का कहना है कि पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों.. आयुर्वेद, यूनानी और होम्योपैथी को और मजबूत बनाने के लिए यह राशि खर्च की जाएगी.
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Uttar Pradesh Ayush Budget: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में आयुष सेवाओं के लिए करीब 2867 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है. सरकार का कहना है कि पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों.. आयुर्वेद, यूनानी और होम्योपैथी को और मजबूत बनाने के लिए यह राशि खर्च की जाएगी. बीते कुछ सालों में आयुष की ओर लोगों का भरोसा बढ़ा है खासकर ग्रामीण इलाकों में जहां ये सेवाएं बड़ी राहत देती हैं.
प्रदेशभर में फैला आयुष का नेटवर्क
इस समय यूपी के अलग-अलग जिलों में 2111 आयुर्वेदिक अस्पताल, 254 यूनानी अस्पताल और 1,585 होम्योपैथिक चिकित्सालय संचालित हैं. इसके अलावा 8 आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज, 2 यूनानी मेडिकल कॉलेज और 9 होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज भी काम कर रहे हैं. इन कॉलेजों से जुड़े अस्पतालों में मरीजों का इलाज भी किया जा रहा है. सरकार का दावा है कि आयुष सेवाएं अब सिर्फ विकल्प नहीं बल्कि मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था का हिस्सा बन चुकी हैं.
दवा आपूर्ति को लेकर बड़ा प्लान
अक्सर सरकारी अस्पतालों में दवाओं की कमी की शिकायत सामने आती है. इसे ध्यान में रखते हुए सरकार ने आयुर्वेदिक और यूनानी अस्पतालों में प्रमाणित और गुणवत्तापूर्ण दवाओं की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने की बात कही है. इसके लिए लखनऊ और पीलीभीत में संचालित दो सरकारी औषधि निर्माणशालाओं को और मजबूत किया जाएगा. इन इकाइयों की उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर काम किया जाएगा ताकि अस्पतालों में दवाओं की कमी न हो.
ग्रामीण इलाकों में आयुष की अहम भूमिका
ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों में आयुष सेवाएं खास तौर पर उपयोगी साबित हो रही हैं. जहां बड़े अस्पतालों तक पहुंच मुश्किल होती है.. वहां आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक चिकित्सालय लोगों को प्राथमिक इलाज उपलब्ध करा रहे हैं. सरकार का मानना है कि आयुष ढांचे को मजबूत करने से स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा और बढ़ेगा. पिछले कुछ सालों में आयुर्वेद और योग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है. सरकार चाहती है कि प्रदेश इस क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाए. मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ दवा निर्माण को सशक्त करना इसी दिशा में कदम माना जा रहा है.
क्या बदलेगी आयुष की तस्वीर?
कुल मिलाकर 2,867 करोड़ रुपये का यह प्रावधान सिर्फ बजट का आंकड़ा नहीं है बल्कि पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को नई ऊर्जा देने की कोशिश है. सरकार का संदेश साफ है कि आधुनिक चिकित्सा के साथ-साथ आयुष को भी बराबर महत्व दिया जाएगा ताकि हर वर्ग तक सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं पहुंच सकें.
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