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दुबई को अक्सर एक सपने की तरह पेश किया जाता है. चमचमाती इमारतें, आकर्षक सैलरी और लक्जरी लाइफस्टाइल. लेकिन एक भारतीय प्रवासी का कहना है कि इंस्टाग्राम पर दिखने वाली चमक के पीछे एक अलग कहानी भी है.
एक इंस्टाग्राम रील में उसने साफ कहा कि यह दुबई के खिलाफ कोई प्रोपेगेंडा वीडियो नहीं है, लेकिन मैं आपको यहां शिफ्ट होने से पहले थोड़ा सच्चाई से रूबरू कराना चाहता हूं. दो साल पहले दुबई आए इस शख्स ने बताया कि वह बड़े सपनों के साथ यहां पहुंचा था. मुझे वही पता था जो इंटरनेट दिखाता है- लाइफस्टाइल, एक्सपोजर और बेहतर मौके. और यह सब सच भी है, लेकिन दूसरा हिस्सा कोई नहीं बताता.
दुबई वो सच जो कोई नहीं बताता!
वह ‘दूसरा हिस्सा’ है लगातार जॉब अप्लाई करना और जवाब तक न मिलना. 20 जगह आवेदन करो और सभी जगह से घोस्ट कर दिए जाओ. बढ़ते किराए का दबाव अलग है. रेंट आपकी सैलरी को निगल जाता है. बजट बनाओ तो अचानक 200 दिरहम की पार्किंग फाइन जैसे खर्च सामने आ जाते हैं.
भावनात्मक दबाव भी कम नहीं है. आप देखते हैं कि लोग एक डिनर में आपकी महीने की कमाई खर्च कर देते हैं, और आप पूरे दिन काम करके भी बचत की कोशिश कर रहे होते हैं. कई बार घर लौटते हुए लगता है कि शायद आपने काफी नहीं किया.
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फिर भी कहानी निराशा पर खत्म नहीं होती. वह कहता है कि कुछ दिन ऐसे भी आते हैं जब सब कुछ सही लगता है-अच्छा ब्रंच, अलग-अलग संस्कृतियों के लोगों से मुलाकात और रात 2 बजे भी परिवार के साथ सुरक्षित घूम पाना.
आखिर में वह मानता है कि ग्रोथ की एक कीमत होती है और वह है अपने कम्फर्ट जोन से बाहर निकलना. दबाव कभी पूरी तरह खत्म नहीं होता, लेकिन रोमांच भी नहीं.
2025 तक दुबई की आबादी 39,07,733 बताई जाती है और अनुमान है कि कुल जनसंख्या का लगभग 75% हिस्सा प्रवासियों का है, जिससे यह दुनिया के सबसे विविध शहरों में गिना जाता है. यह सिर्फ आंकड़ों की बात नहीं है, बल्कि एक ऐसे समुदाय की कहानी है जहां अलग-अलग देशों के लोग साथ रहकर आगे बढ़ने की कोशिश करते हैं.
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